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देखिए विधायकजी…यहां मरीजों से ज्यादा अस्पताल बीमार

-जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर असुविधाओं के कारण मरीज जाते हैं आगरा, जयपुर, अलवर-एक तो बीमार दूसरा आर्थिक मार

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देखिए विधायकजी...यहां मरीजों से ज्यादा अस्पताल बीमार

देखिए विधायकजी...यहां मरीजों से ज्यादा अस्पताल बीमार

भरतपुर. पत्रिका टीम. जिलेभर से. जिले से सातों विधायक कांग्रेस के हैं, दो राज्यमंत्री भी हैं। इसमें भी एक चिकित्सा राज्यमंत्री हैं, जब हकीकत पर नजर डालें तो सामने आता है कि विधायक व राज्यमंत्रियों के सत्ताधारी पार्टी से होने के बाद भी अस्पतालों की हालत किस कदर बिगड़ी हुई है तो इनकी तस्वीर सिस्टम को आइना दिखाती नजर आती है, परंतु सवाल इस बात का है कि उस तस्वीर को देखकर इन जनप्रतिनिधियों पर भी कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं, जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को लेकर पत्रिका की रिपोट...र्

पहाड़ी का अस्पताल बन चुका है रैफर केंद्र

पहाड़ी. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पीने के पानी का अभाव होने से मरीजो को खरीदकर पानी पीड़ रहा है। महिला चिकित्सक, वार्ड बॉय, कनिष्ठ लिपिक के पद रिक्त हैं। उपखण्ड क्षेत्र में मात्र एक सीएचसी है। इसमें हर माह करीब 300 प्रसूताएं आती हैं। महिला चिकित्सक के अभाव में क्रिटिकल प्रसव वाली महिलाओं को मजबूरन रैफर करना पड़ता है। इनको मजबूरन निजी चिकित्सालय में जाना पड़ता है। चिकित्सालय में गम्भीर मरीजों, प्रसव वाली महिलाओं के रैफर के बाद बाहर ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक की सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को निजी वाहन बाहर ले जाना पड़ता है। प्रभारी डॉ. मोहन सिंह चौधरी ने बताया कि चिकित्सालय में दो आरओ हंै। खारा पानी होने के कारण एक आरओ खराब पड़ा है। नल का कनेक्शन कटा हुआ है। मीठे पानी की समस्या है।


भले ही पद स्वीकृत किए पर डॉक्टर अब तक नहीं आए

भुसावर. राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए जाते हैं, लेकिन चिकित्सकों की नियुक्ति समय पर विभाग की ओर से नहीं की जा रही है। विभाग की ओर से कई महीनों पूर्व इस अस्पताल में कई डॉक्टर के पद स्वीकृत किए गए। महीनों गुजर जाने के बाद भी अस्पताल में सरकार ने आज तक डॉक्टर नहीं भेजे हैं। अस्पताल के प्रभारी अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि भुसावर के राजकीय सामुदायिक अस्पताल में फिजिशियन और सर्जन के अलावा ऑपरेटर, निश्चेतक डॉक्टर की आज तक पोस्टिंग नहीं की गई है। भुसावर अस्पताल में लंबे समय से खाली पड़े डॉक्टर के पदों को भरने के लिए कई बार स्थानीय लोगों ने वैर विधायक और राज्य मंत्री भजन लाल जाटव और सांसद भरतपुर के अलावा राजस्थान सरकार के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा से भी मांग की थी, लेकिन तीन डॉक्टरों की पोस्टिंग नहीं की गई है।

डॉक्टरों की कुर्सियां खाली, मरीज हो रहे परेशान

कामां. कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जगह-जगह गंदगी का आलम पसरा हुआ है। इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर चिकित्सक भी अपनी कुर्सी छोड़कर नदारद रहते हैं। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को चिकित्सकों की खाली कुर्सी से साक्षात्कार करना पड़ता है या फिर काफी देर तक इधर-उधर भटकने के बाद मरीज को चिकित्सक किसी और कमरे में बैठे हुए दिखाई देते हैं। तब जाकर कहीं मरीज का इलाज चिकित्सकों से संभव हो पाता है। दबी जुबान में अनेकों मरीजो ने अपनी व्यथा प्रकट की। वहीं मौके पर गंदगी के ढेर लगे हुए देखे जा सकते हैं। इसको लेकर चिकित्सालय प्रशासन गम्भीर नहीं है।


दो डॉक्टरों के भरोसे सीकरी का अस्पताल

सीकरी. मौसमी बीमारियों के चलते मरीजों की भीड़ को घंटों इंतजार करना पड़ता है। सीएचसी पर महज दो डॉक्टर ही करीब 400 मरीजों को देख रहे हैं। जानकारी के अनुसार सीकरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर महज दो चिकित्सक ही कार्यरत है। सीएचसी पर कस्बा व ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन करीब 300 से 400 मरीज उपचार कराने आते हैं, लेकिन अस्पताल में चिकित्सक नहीं होने के कारण बीमार मरीजों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ती है। पर्ची कटवाने से लेकर दवाई लेने तक घंटों इंतजार करना पड़ता है। वहीं कम्पाउंडरों की कमी के चलते मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं है। इस बारे में बीसीएमओ डॉ. मयंक शर्मा ने जल्द ही चिकित्सक लगाने का आश्वासन दिया।


दर्जा सीएचसी का और हालात पीएचसी से भी बदतर

नगर. ब्लॉक का बड़ा सरकारी अस्पताल फिर भी साफ सफाई की उचित व्यवस्था नहीं है। सीएचसी पर सैकड़ों मरीज उपचार के लिए आते है। ब्लॉक का बड़ा सरकारी अस्पताल होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज नगर सीएचसी पर ही उपचार के लिए आते हैं। आपातकाल के लिए भी अलग से वार्ड बना हुआ है। वार्ड में एक मरीज के साथ परिजन बेडों पर बैठे रहते है। देखरेख के अभाव में वार्ड में मरीज व परिजन वार्ड में ही खाने पीने के सामान को फेंक देते हैं। स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को भटकना पड़ता है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीएचसी पर एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की फ्री पर्ची के भी शुल्क लेने की शिकायत सामने आई। इस बारे में ब्लॉक के बीसीएमओ डॉ. मयंक शर्मा ने कहा कि अगर निशुल्क पर्ची का शुल्क लिया जाने का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। प्रभारी से बात की जाएगी।


अस्पताल हुआ क्रमोन्नत, लेकिन सुविधाओं का इंतजार

हलैना. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को क्रमोन्नत हुए करीब तीन साल होने जा रहे हैं, लेकिन चिकित्सालय में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। चिकित्सालय में सबसे बड़ी कमी भवन को लेकर है। चिकित्सक एक ही कमरे में बैठकर मरीजों को देखने के लिए मजबूर है। साथ ही एक ही वार्ड है। इसकी वजह से भी मरीजों को बाहरी परेशानी होती है। साथ ही शिशु वार्ड प्रसव कक्ष चिकित्सा प्रभारी कक्ष व ऑपरेशन थिएटर साथ ही लैब व नर्सिंग स्टाफ की कमी भी बनी हुई है। इसकी वजह से जो सुविधाएं क्षेत्र के मरीजों को मिलनी चाहिए थी। वह लोगों को सुलभ नहीं हो पा रही हैं। यह भी बता दें कि कस्बा हलैना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच डॉक्टर नियुक्त हैं, इनमें दो चिकित्सक डेपुटेशन पर हैं।


मोर्चरी में शव रखना है तो लेकर आओ बर्फ

रूपवास. कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों के सात पद स्वीकृत हैं। इसमें छह चिकित्सक पद स्थापित है। इन छह चिकित्सकों में से स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी सहित तीन चिकित्सक डेपुटेशन से लगे हुए हैं। रूपवास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जहां चिकित्सक तो लगभग पूरे हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं की भरमार है। स्वास्थ्य केंद्र पर विद्युत व्यवस्थाओं को पूर्ण करने के लिए 20 किलोवाट के जनरेटर की आवश्यकता है, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद जनरेटर 10 किलोवाट का ही है। इससे बिजली आपूर्ति ठप होने पर काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र पर मोर्चरी होने के बावजूद उसमें डीप फ्रीजर की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण दुर्घटना में होने वाले मृतक के शव को सुरक्षित रखने के लिए परेशान परिजनों को बर्फ की व्यवस्था स्वयं ही करनी पड़ती है। इतना ही नहीं किसी दुर्घटना व झगड़े में घायल का एक्स-रे करने वाली मशीन भी तीन दशक पुरानी है। इसके कारण मरीजों को अपना डिजिटल एक्स-रे कराने के लिए उच्चैन व भरतपुर जाना पड़ता है।

आदर्श सीएचसी बनाकर ही भूले जिम्मेदार

कुम्हेर. सीएससी पर मौसमी बीमारियों के चलते वायरल फीवर व प्लेट कम होने के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर मरीजों को पानी पीने के लिए वाटर कूलर फिल्टर लगा हुआ है। सफाई व्यवस्था अव्यवस्थित है। स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट पर बारिश के समय जलभराव होने से मरीजों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सीएचसी की बिल्डिंग से जनरल वार्ड के सामने बारिस के समय छत से पानी टपकता रहता है। चिकित्सा अधिकारी प्रभारी जितेंद्र फौजदार ने बताया की सीएचसी के हिसाब से यहां पर 30 बेड, स्टाफ सहित अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन आदर्श सीएससी की घोषणा के बाद अभी यहां पर काम शुरू नहीं हुआ है।

नदबई के अस्पताल में भीड़ ज्यादा, लेकिन मरीज कम

नदबई.अपने आप में सर्व सुविधाओं का दम भरने वाली सीएचसी नदबई पर वर्तमान में चिकित्सकों की कमी होने के कारण कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना इलाज के लिए आने वाले सैकडों लोगों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि सीएचसी पर मौजूदा मात्र तीन चिकित्सकों के पास विगत कोरोना के पीक समय से लेकर वर्तमान में वायरल से ग्रसित बीमारों की लंबी कतार देखने को मिल जाती है, लेकिन प्रशासन का इस ओर ध्यान ही नहीं है। चिकित्सा अधिकारी एवं प्रभारी डॉ शशिकांत ने बताया कि सीएचसी पर कस्बा एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले रोगियों की संख्या के हिसाब से कम से कम छह चिकित्सकों का होना अनिवार्य है, लेकिन वर्तमान में केवल तीन चिकित्सक ही सीएचसी पर कार्यरत हैं। इनमें डॉ हेमंत लवानियां एवं डॉ राहुल राना है। वर्तमान आवश्यकता को देखते हुए एक स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं शिशु रोग विशेषज्ञ की भी आवश्यकता है।

सोनोग्राफी की नहीं है मशीन तो ईसीजी पर जम रही है धूल

सीएचसी नदबई पर एक्सरे जांच के अलावा करीब 15 जांच की जा रही है। लेकिन ईसीजी एवं सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध ना होने के कारण मरीजों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विडंबना की बात यह है कि लंबे समय से सीएचसी पर ईसीजी मशीन उपलब्ध होने के बावजूद भी टेक्नीशियन उपलब्ध ना होने के कारण लंबे समय से उस पर धूल जम रही है। जिसके कारण क्षेत्र के लोगों की ओर से ईसीजी के लिए पैसा खर्च कर प्राइवेट स्थानों से ईसीसी कराई जा रही है। जबकि सोनोग्राफी की आवश्यकता होने के बावजूद भी अभी तक सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है।