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भरतपुर

देखिये इस कदर आपस में ही भिड़े नगर निगम पार्षद…

-भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी के आरोपों के बीच हुई नगर निगम की प्री बजट बैठक

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भरतपुर. बजट से पूर्व मंगलवार को हुई नगर निगम की प्री-बजट बैठक फर्जी पट्टा प्रकरण व भ्रष्टाचार के आरोपों की भेंट चढ़ गई। नाराज पार्षद मेयर के पास तक पहुंच गए और उनका माइक उठा लिया। ऐसे में पार्षद आपस में ही उलझ गए। हालांकि अब 15 फरवरी तक बजट बैठक कर प्रस्ताव पारित किया जाएगा। जो कि राज्य सरकार को भेजा जाएगा। पार्षदों ने आरोप लगाया कि फर्जी पट्टा प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने का प्रस्ताव एजेंडा में शामिल नहीं किया गया है। यह सिर्फ मास्टर माइंड को बचाने के लिए किया जा रहा है।
पार्षद दाऊदयाल शर्मा ने कहा कि नगर निगम की सम्पत्ति पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। इसे मुक्त कराया जाए। नेता पतिपक्ष रूपेन्द्र सिंह ने कहा कि नगर निगम बजट के लिए जमीन बेचकर विकास करा रहा है और दूसरे विभागों में पैसा लगा रहा है। पार्षद वीरमती ने कहा कि वार्ड में तीन साल में कोई विकास नहीं हुआ। ऑटोमोबाईल बाजार व अन्य जगह नालों पर फेराकवर नहीं होने के कारण बैठक में कुछ देर तक हंगामा कर दिया व मेयर से इस्तीफा की मांग कर दी। पार्षद मुकेश कुमार ने पार्षदों के परिजनों के बैठक में आने को लेकर कहा तो पार्षद पतियों ने हंगामा कर दिया। उपमहापौर गिरीश चौधरी ने कहा कि पार्षद सदन की गरिमा बनाए रखें। पार्षद सदन में कोई प्रस्ताव रखता है तो उसकी बात दबनी नहीं चाहिए। इससे सन्देश गलत जाता है। जो भी पार्षद अपनी मांग रखता है। उसे सदन में लिखकर प्रस्ताव बनाकर भेजें। राजस्थान सरकार ने पैसा देना बन्द नहीं किया है। प्रस्ताव बनाकर भेजें। मेयर साहब किसी के दबाव में नहीं आएं और फर्जी पट्टा प्रकरण में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मेयर बोले: फाइनेंस की व्यवस्था करनी पड़ती है

मेयर अभिजीत कुमार ने कहा कि 15 फरवरी तक बजट पेश कर डीएलबी व सरकार को भेजना पड़ता है। इसके लिए प्री बजट की बैठक की गई है। इसमें सभी पार्षदों से राय लेकर फाइनेंस की व्यवस्था करनी पड़ती है। आज आय के स्रोतों को किस तरह बढाया जाए। बांड के हिसाब से आय के स्रोत पैदा किए जाएंगे। यूडी टैक्स की रिकवरी के लिए लोग तैयार है। अब केंद्र सरकार इस पर आमादा है कि नगर निगम को आय के श्रोत डवलप करने होंगे। पहले ग्रांट आती थी, उसे आय के श्रोत के अनुसार पैसा मिलेगा। चुंगी पुर्नभरण अच्छा पैसा देती थी। हर साल दस प्रतिशत बढकऱ आता था। इस साल 69 करोड़ आने थे। अगली साल 76 करोड़ आने थे। उन्होंने दो किश्तों में 36 करोड़ आए थे। इसके बाद उन्होंने रोक दिया और इससे कर्मचारीयों का वेतन दिया जाएगा।

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