
सेस वसूलने में विभाग नहीं कर रहा श्रम, छिन रहा श्रमिकों का हक
भरतपुर . जिले में बहुमंजिला इमारतों का निर्माण तो धड़ाधड़ हो रहा है, लेकिन इस पर लगने वाले सेस को वसूलने में श्रम विभाग फिसड्डी साबित हो रहा है। इसी का नतीजा है कि श्रमिक अपने हक से वंचित होते नजर आ रहे हैं। निर्माण कार्य कराने के लिए कुल निर्माण लागत का एक प्रतिशत सेस श्रम विभाग को देना होता है।
अब हालात ये हैं कि भवन स्वामी तो सेस दे रहे हैं, श्रम विभाग भी मैन पॉवर के अभाव में भवन मालिकों से सेस वसूलने में नाकाम नजर आ रहा है। ऐसे में निर्माण श्रमिकों, मजदूर व उनके बच्चे विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। विभाग ने इसकी वसूली के लिए इस सत्र में जिले के 181 भवन मालिकों को नोटिस भी जारी किया है। इसके बाद भी प्रभुत्वशाली मालिक सेस जमा नहीं करा रहे हैं। वर्ष 2009 में लेबर सेस शुरू किया गया था। तब से अब तक जिन लोगों ने आवासीय और व्यावसायिक भवनों का निर्माण कराया है। उन पर अभी तक लेबर सेस बकाया चल रहा है। ऐसे भवन मालिकों से श्रम विभाग बकाया सेस वसूलने लिए सर्वे के आधार पर नोटिस जारी कर वसूली में लगा है।
10 लाख तक के आवासीय निर्माण सेस मुक्त
सरकार की ओर से जारी लेबर सेस वसूली की गाइडलाइन के तहत 10 लाख रुपए तक के आवासीय निर्माण सेस मुक्त हैं, लेकिन इससे अधिक के निर्माण पर भवन मालिक को कुल निर्माण लागत का एक प्रतिशत लेबर सेस के रूप में श्रम विभाग में जमा कराना होगा।
स्टाफ की कमी काम में बाधक
विभाग के पास लंबे समय से स्टाफ की कमी चल रही है। ऐसे में केवल एक श्रम निरीक्षक होने से सेस वसूली में भी समस्या आती है। वहीं स्टाफ की कमी के चलते सही तरीके से निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। लेबर सेस के पैसे से भवन निर्माण श्रमिकों व उनके बच्चों के लिए स्कॉलरशिप, विवाह सहायता योजना, बीमा योजना, प्रसूति सहायता योजना और शुभ शक्ति योजना जैसी कई योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
ऐसे भवनों पर सेस बाकी
जिले में विभाग की ओर से किए गए सर्वे के आधार अभी तक 10 लाख रुपए से अधिक लागत के ऐसे भवनों का निर्माण होना भारी संख्या में पाया है, जिन्होंने सेस जमा नहीं कराया है। विभाग इसके लिए समय-समय पर सर्वे कराता है। वहीं अब विभाग ने भवन मालिकों को नोटिस जारी कर निर्माण लागत का एक प्रतिशत सेस जमा कराने के आदेश दिए हैं। इनमें कई होटल, फ्लेट्स, अपार्टमेंट, निजी अस्पताल व स्कूल और कॉम्पलेक्स सहित अन्य भवन हैं।
निगम व यूआईटी भी जिम्मेदार
लेबर सेस के रूप में विभाग के पास वर्ष 2021-2022 सत्र में केवल चार करोड़ 82 लाख 28 हजार 487 रुपए आए हैं। सेस की राशि भवन मालिक नगर निगम, नगर निकाय और यूआईटी में भी जमा कराते हैं। वहीं कितने भवन मालिकों ने निगम या यूआईटी में सेस की राशि जमा कराई है इसकी सही जानकारी विभाग के पास नहीं है, जबकि नियम से लेबर सेस श्रम विभाग में ही जमा होता है। यूआईटी व निगम को भी इसकी जानकारी श्रम विभाग को भेजनी चाहिए। इससे सेस वसूली में विभाग को आसानी हो सके।
लेबर सेस पर प्रतिवर्ष 24 प्रतिशत ब्याज
भवन मालिक को निर्माण कार्य कराने से 30 दिन पहले ही अपने भवन की कुल निर्माण लागत का एक प्रतिशत के हिसाब से सेस जमा कराना होता है। ऐसा नहीं करने पर निर्माण कार्य पूरा होने की तिथि से 24 प्रतिशत प्रतिवर्ष के हिसाब के ब्याज देना पड़ता है। वहीं जुर्माना अलग से देना होता है।
एक नजर में योजना
भवन का प्रकार नोटिस
आवासीय 107
वाणिज्यिक 58
संयुक्त भवन 16
(भवन मालिकों को इस साल भेजे गए नोटिसों की संख्या)
2009 से अब तक बकाया
निर्धारित उपकर राशि 6,59,87,411
ब्याज राशि 5,44,11,891
जुर्माना राशि 6,16,66,690
(नोट : आंकड़े श्रम विभाग के अनुसार, राशि रुपए में)
इनका कहना है
सेस वसूली का कार्य विभाग की ओर से किया जा रहा है। हालांकि स्टाफ की कमी के चलते वसूली में समस्या भी आ रही है। लेबर सेस जमा नहीं कराने पर श्रम विभाग अपने स्तर पर भूखण्ड के आधार पर निर्माण कार्य की लागत निकालकर सेस वसूलने का काम करता है। इस पर 24 प्रतिशत की दर से वार्षिक लगाने के साथ ही जुर्माने का भी प्रावधान है। इन सभी से बचने के लिए भवन मालिक को लेबर सेस जमा कराना चाहिए।
- ओ.पी. सहारण, सहायक श्रम आयुक्त
Published on:
06 Mar 2022 05:48 pm
बड़ी खबरें
View Allभरतपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
