घोंट दिए खुद के अरमान, ताकि सलामत रहे आपकी जान

- डॉक्टर्स-डे पर विशेष

By: Meghshyam Parashar

Published: 01 Jul 2020, 11:13 AM IST

भरतपुर . कोरोना महामारी ने हर किसी की खुशी को काफूर कर दिया, लेकिन धरती के भगवान देश की मुस्कान को बचाए रखने के लिए योद्धा की तरह लड़े। इसी का नतीजा है कि हम कोरोना को पटकनी देने में बहुत हद तक कामयाब रहे हैं। डॉक्टर्स की दिलेरी की वजह से अब हम जीत की ओर अग्रसर हैं। 'अपनोंÓ से दूर रहकर खुद के अरमानों का गला घोंटकर हमारे डॉक्टर योद्धा जनता की जान की सलामती के लिए दिन-रात जुटे रहे। इस सबके सुखद परिणाम सामने हैं। पत्रिका ने डॉक्टर्स-डे की पूर्व संध्या पर खतरे के बीच रहकर लोगों की जान बचाने वाले कुछ चिकित्सकों की दिनचर्या जानी तो इनकी सेवा का नया रूप निकलकर सामने आया।

सेवा के जज्बे ने निकाल दिया डर

कोरोना काल के शुरुआत क्षण डरावने थे। शुरुआती दिनों में परिवार को लेकर चिंता भी हुई, लेकिन हजारों लोगों की जान बचाने का भार कंधों पर था। ऐसे में डर को भगाना ही लाजिमी समझा। अंतत: डर के आगे जीत होती है। हम यह जंग जीतने में कामयाब हुए हैं। लंबे समय तक किट में रहने के कारण कई-कई घंटे लघुशंका भी नहीं जा पाते थे। किट में हवा नहीं लगने के कारण उसी में पसीने से लथपथ रहते थे, लेकिन मन में एक ही ध्येय था कि इस संकट काल में मरीजों को महफूज रखा जाए। ऐसे में होटल में टीम के साथ रहा। परिजनों से बात सिर्फ वीडियोकॉल पर ही हुई। अब मरीजों की संख्या में थोड़ी कमी आई है तो घर पर ही आइसोलेट हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से परिवार से अभी भी दूरी बरकरार है। यह तीन माह का समय नई चीजें सिखा गया है, लेकिन फिक्र से ज्यादा सुकून इस बात का है कि हम भरतपुर को महफूज रखने में कामयाब रहे हैं।
- डॉ. विवेक भारद्वाज, चिकित्सक आरबीएम अस्पताल भरतपुर

मरीजों को ही बनाया परिवार

कोरोना नई बीमारी के रूप में सामने आई। ऐसे में चिकित्सकों की चिंता भी लाजिमी थी। खुद को सुरक्षित रखकर मरीजों को बचाना नया तरह का अनुभव था। इसके बीच परिवार की दूरी ने थोड़ा मायूस किया, लेकिन मरीजों को परिवार का हिस्सा मानकर हम सेवा में जुटे रहे। इसी का नतीजा है कि हम लोगों को बचाने में कामयाब रहे। पिछले दो-ढाई माह का समय परिवार से अलग रहकर बिताया है। इस बीच वीडियो कॉलिंग परिवार से जोड़े रखने का माध्यम बनी रही। खास तौर से छोटे बच्चों से नहीं मिल पाना थाोड़ा कष्टकारक रहा, लेकिन कोरोना जैसी महामारी से जंग जीतने के लिए यह बहुत जरूरी था। ऐसा करके हम अपनी और दूसरों की जिंदगी को सलामत रख सके हैं। पेशे से चिकित्सक पत्नी डॉ. अर्चना मित्तल ने भी इसके लिए हौसला अफजाई की। पूरी टीम ने मनोयोग के साथ मरीजों की सेवा की। ऐसे में भरतपुर की रिकवरी रेट बहुत अच्छी रही है।
- डॉ. मनीष गुप्ता, चिकित्सक आरबीएम अस्पताल भरतपुर

स्वीकारी चुनौती तो जीत ली जंग

कोरोना वैश्विक महामारी ने एकबारगी सब कुछ हिला कर रख दिया, लेकिन चिकित्सकों की टीम धैर्य के साथ मोर्चे पर डटी रही। इसके परिणाम भी बेहतर रहे। परिवार से दूरी के साथ खुद को बचाना बड़ी चुनौती थी, लेकिन इस चुनौती का डटकर मुकाबला किया। परिवार का सहयोग भी इसमें बराबर रूप से मिला। कोरोना ड्यूटी के दौरान परिवार से दूर होटल में ही रहे। ऐसे में वीडियो कॉल परिवार से जोडऩे में सहायक रही। ड्यूटी से लौटने के बाद परिवार से वीडियो कॉल पर ही अब तक बात होती रही है। अब भी परिवार से दूरी है। यह एहतियात खुद को और पूरे शहरको सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। शुरुआत में मरीजों को डील करना थोड़ा मुश्किल हुआ, लेकिन एचओडी से मिले डाइरेक्शन को फॉलो करते हुए हम यहां पहुंचे मरीजों की जिंदगी बचाने में कामयाब रहे हैं। यह हम सब चिकित्सकों को गर्वित करता है।

- डॉ. प्रभुत्व गोयल, चिकित्सक आरबीएम अस्पताल भरतपुर

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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