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जिस गाड़ी से शहर में होता है एंटी लार्वा का छिड़काव, उसके नाम से जारी हो गया ई-रवन्ना

-गाड़ी नगर निगम कार्यालय में खड़ी थी, उसके नाम से ओवरलोड खनिज सामग्री भरकर होता रहा परिवहन-स्टोन क्रशर संचालकों ने कर रहे फर्जीवाड़ा, परिवहन विभाग ने लिखा खनिज विभाग को पत्र

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जिस गाड़ी से शहर में होता है एंटी लार्वा का छिड़काव, उसके नाम से जारी हो गया ई-रवन्ना

जिस गाड़ी से शहर में होता है एंटी लार्वा का छिड़काव, उसके नाम से जारी हो गया ई-रवन्ना

भरतपुर. जिस पांच टन क्षमता की गाड़ी में रखी टंकी में 500 लीटर पानी की टंकी फिट और उससे नगर निगम एरिया में एंटी लार्वा का छिड़काव किया जाता है, उस गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर से पहाड़ी के खनन जोन में फर्जी ई-रवन्ना बनाकर ओवरलोड खनिज सामग्री का परिवहन किया जाता रहा। जब नोटिस नगर निगम के पास पहुंचा तो उसके जबाव आने के बाद परिवहन विभाग ने इसका खुलासा किया है। इसमें सामने आया है कि खुद स्टोन क्रशर संचालकों की ओर से यह फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। जबकि खुद खनिज विभाग ने अभी तक ऐसे प्रकरणों में जांच करना तो दूर की बात है अभी तक बोलना तक उचित नहीं समझा है। यही कारण है कि ओवरलोड के माफिया गिरोह ने अब नया रास्ता भी बना लिया है।
जानकारी के अनुसार वाहन में माल लादने के बाद ई-रवन्ना काटा जाता है। जैसे ही ई-रवन्ना काटने की प्रक्रिया शुरू होती है तभी ई-रवन्ना का सॉफ्टवेयर वाहन-4 से इंटरलिंक होने के कारण लोडिंग वाहन का रिकॉर्ड मिलान करता है। यदि गाड़ी में तय क्षमता से अधिक माल भरा गया है तो तुरंत वाहन-4 सॉफ्टवेयर से संबंधित वाहन के स्वामी का चालान काट देता है। इसके बाद गाड़ी प्रदेश अथवा देश के जिस भी जिले के परिवहन कार्यालय में पंजीकृत होगी और परमिट जारी किया होगा, ई-चालान सीधे उस कार्यालय में पहुंच जाएगा। इसके साथ ही परिवहन विभाग की ओर से संबंधित रजिस्ट्रेशन नंबर वाली गाड़ी के मालिक को नोटिस भेजा जाता है। ऐसे कुछ मामले सामने निकल कर आए हैं कि जहां वाहन छोटा था और उसका क्षमता 10 गुना बताकर स्टोन क्रशर संचालकों ने ई-रवन्ना जारी करा लिया। अब नोटिस पहुंचा तो मामले का खुलासा हुआ।

पिकअप को ही डंपर मानकर जारी किया ई-रवन्ना

वाहन संख्या आरजे 05 जीबी 0289 आयुक्त नगर निगम के नाम पंजीकृत है। यह नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव करने वाली गाड़ी है। इसका सकल भार 1550 किलोग्राम है। 21 जनवरी 2020 को जारी रवन्ना के अनुसार वाहन 22.08 टन किलोग्राम था। 24 अगस्त को भी वाहन में 25 टन माल संलग्न जारी किया जाना पाया गया है, लेकिन जब मामला नगर निगम तक पहुंचा तो वहां से परिवहन विभाग को बताया गया कि उक्त वाहन कभी भी इस गतिविध में शामिल नहीं हुआ। इसी प्रकार वाहन संख्या आरजे 05 जीबी 0661 एक पिकअप है इसका सकल भार 4450 किग्रा है, लेकिन 21 अगस्त को जारी रवन्ना के अनुसार 25.27 टन माल भरा होना बताया गया है, जो कि असंभव है।

बड़ा सवाल...दोनों विभागों के बीच उलझा कार्रवाई का मामला

हकीकत यह है कि खनिज विभाग व परिवहन विभाग के बीच ओवरलोड को लेकर कार्रवाई का मामला उलझा हुआ है। बताते हैं कि जब खनिज विभाग ने नाका स्थापित कर कर्मचारी नियुक्त किए हैं तो वहां उनके सामने से ही ओवरलोड वाहन क्यों निकल रहे हैं। इसके अलावा जब स्टोन क्रशर पर ई-रवन्ना जारी करते समय वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डालते ही उसकी क्षमता आ जाती है तो वाहन मालिक को क्षमता से अधिक माल क्यों लोड कराया जाता है। अगर ऐसे मामले सामने आते हैं दोषियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज क्यों नहीं कराई जाती है। स्थिति यह है कि अब परिवहन विभाग जहां स्टोन क्रशर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए खनिज विभाग को पत्र लिख चुका है तो खनिज विभाग का कहना है कि ओवरलोड के खिलाफ तो परिवहन विभाग ही कार्रवाई कर सकता है।

जबाव मांगते सवाल

1. जनवरी में ही पहला मामला सामने आया तो दोनों विभाग चुप रहे?

2. फर्जीवाड़ा मिलने के बाद संबंधित क्रशर को सीज क्यों नहीं किया?

3. पुलिस मदद नहीं करती है तो एसपी व आईजी को क्यों नहीं बताया?

आरटीओ बोले: करना पड़ता है बड़ी परेशानी का सामना

प्रादेशिक परिवहन अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि खनिज विभाग को पत्र भेजकर मामले से अवगत कराया है। संबंधित स्टोन क्रशरों की सूची भी मांगी गई है। खनिज विभाग को कार्रवाई के लिए भी कहा है। कामां-पहाड़ी जांच करते समय बड़ी परेशानी आती है। निरीक्षण के दौरान एक-दो वाहनों के चालान होते ही मुखबिरी कर रहे लोग अन्य को सतर्क कर देते हैं। इस क्षेत्र में धर्मकांटा नहीं होने वाहनों का कांटा कराना संभव नहीं है। पुलिस थानों में पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण एसएचओ भी वाहनों को सीज करने में असमर्थता व्यक्त करते हैं। स्टोन क्रशर संचालकों को नोटिस जारी किए जाएंगे।

-परिवहन विभाग ने जो पत्र हमारे विभाग को लिखा है। उसकी जांच की जाएगी। अगर वास्तव में स्टोन क्रशर संचालकों की ओर से यह फर्जीवाड़ा किया जा रहा है तो उन्हें सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को जानकारी कर टीम को भेजा जाएगा।
प्रताप मीणा
एसएमई खनि विभाग