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बिहारीजी मंदिर: 600 साल में पहली बार भक्तों के बगैर मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

शहर के किला परिसर स्थित बिहारीजी मंदिर का इतिहास 600 साल पुराना है। अब तक सिर्फ गृहण को छोड़कर मंदिर कभी बंद नहीं रहा है। इस बार कोरोना संक्रमण की आशंका को लेकर मंदिर बंद है। पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी पर्व भी बगैर भक्तों के ही मनाया जाएगा।

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बिहारीजी मंदिर: 600 साल में पहली बार भक्तों के बगैर मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

बिहारीजी मंदिर: 600 साल में पहली बार भक्तों के बगैर मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

भरतपुर. शहर के किला परिसर स्थित बिहारीजी मंदिर का इतिहास 600 साल पुराना है। अब तक सिर्फ गृहण को छोड़कर मंदिर कभी बंद नहीं रहा है। इस बार कोरोना संक्रमण की आशंका को लेकर मंदिर बंद है। पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी पर्व भी बगैर भक्तों के ही मनाया जाएगा। यह मंदिर निम्बार्क संप्रदाय का है। नागाजी महराज चतुर्थ चिंतामणि निम्बार्क संप्रदाय के जनक थे। मान्यता है कि बृज चौरासी कोस परिक्रमा की परंपरा नागाजी महाराज के समय से चली आ रही है। कहते हैं कि बाबा एक दिन में चौरासी कोस की परिक्रमा कर लेते थे। इस बात की प्रमाणिकता के लिए तत्कालीन राजाओं ने जगह-जगह आमजन को खड़ा करके पता लगाया। बाबा हर जगह उपस्थित मिले। एक बार वो परिक्रमा कर रहे थे। बैशाखा का महीना था। भयानक तपन थी। अचानक बाबा की लटा झाड़ी में उलझ गई। कहते हैं कि तीन दिन तक वो खड़े रहे, साधु-संतों ने कहा कि लटा हम सुलझा दें। इस पर बाबा ने कहा कि जिसने उलझाई हैं वो ही सुलझाएगा। तीन दिन खड़े रहने के बाद भगवान सात-आठ वर्ष के बालक का रूप धरकर आए। बाबा का हाथ पकड़ कर हिलाने लगे उठो जागो आंख खोलो मैं आ गया बाबा। बाबा ने आंख खोलकर देखा तो मुकुंद ने कहा कि जिसको आपने बुलाया वो ही आया है। बाल मुकुंद भगवान से कहा कि मैं कैसे विश्वास करूं। अगर आप वही है तो युगल रूप में दर्शन दो। भगवान ने युगल रूप में दर्शन दिए। भगवान ने कहा कि वरदान मांगो। आप मेरे साथ रहोगे। भगवान ने कहा कि इस युग में ऐसा संभव नहीं है। मैं आपको विग्रह देता हूं। एक दिन सुबह स्नान करोगो तो मेरा विग्रह आपको मिल जाएगा। दूसरा वरदान बृजमंडल में दूध के लिए मांगा। मुझे कोई दूध के लिए मना नहीं करेगा। अविरज भक्ति का वरदान मांगा। भगवान अतरध्यान हो गए। भगवान का विग्रह रूप बाबा के पास आ गया। पहले कदमखंडी में बिहारीजी को विराजमान किया गया। वहां से रथ में लेकर जयपुर लेकर जा रहे थे। रथ यहां पर ही आकर रुक गया। तीन-दिन दिन बाद भी रथ नहीं हिला तो नागा बाबा ने यहां पर ही विराजमान कर दिया। राधाजी की प्रतिमा भरतपुर के महाराजा बलवंत सिंह ने विराजमान कराई।

बरसाना में अनूठी परंपरा: बरसानावासी राधा को बेटी तो नंदगांव मानता है कान्हा को बेटा

कामां से 20 किमी की दूरी पर स्थित नंदगांव व बरसाना हैं, भगवान कृष्ण राधा के प्रेम प्रतीक इन दो गांवों में आज भी सिर्फ इनका ही प्रेम बसता है। इन दो गांवों में आज तक कोई रिश्ता शादी नहीं हुई। बरसाना के वासी राधारानी को बिटिया तो नंदगांववासी भगवान श्रीकृष्ण को अपना बेटा मानते हैं। मतलब यह है कि बरसाना में भगवान श्रीकृष्ण को दामाद माना जाता है और नंदगांव को राधारानी का पीहर। पूर्वजों ने यह तय किया था कि इन दो गांवों में सिर्फ इन दोनों का ही प्रेम रहेगा। बरसाना का सिर्फ एक ही दामाद रहेगा वो है श्रीकृष्ण नंदगाव की सिर्फ राधा। शास्त्रों के अनुसार 5160 साल पहले ब्रज में श्रीकृष्ण की लीलाओं का उल्लेख मिलता है। बरसाना में राधारानी नंदगांव में श्रीकृष्ण बलदाऊ के मंदिर है। आज भी नंदगांव के कुछ घरों की स्त्रियां घर के बाहर मटकी में माखन रखती हैं कि कान्हा वेश बदलकर आएगा और माखन खाएगा। बताते हैं कि होली भाई-बहन से नहीं खेली जाती है। बल्कि ससुराल में या प्रेम के भाव के साथ ही खेली जाती है। ब्रज की यही रीत है जो कि खुद भगवान श्रीकृष्ण ने महारास के साथ शुरू की। जब बरसाना में लठामार होली है तो नंदगांव के हुरियारे आते हैं। उस समय जयकारा होता है कि वृषभान के मेहमान (श्रीकृष्ण) की जय।

सरयू के जल से होगा श्रीकृष्ण का अभिषेक, मंदिर नहीं आ सकेंगे श्रद्धालु

-श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा

गोवर्धन. योगीराज भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में एक फिर से आज बुधवार को अजन्मे कान्हा का जन्म होगा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के रोहणी नक्षत्र की मध्य रात्रि हो हुआ था। सनातन परंपरा के अनुसार सदियों से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है। पहली बार कोरोना संक्रमण काल के चलते कान्हा के जन्म के अभिषेक का श्रद्धालु लाइव दर्शन नहीं कर पाएंगे। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुरजी के श्रीविग्रह का महाभिषेक सरयू नदी के पावन जल से होगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास व मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास अयोध्या से सरयू नदी का जल लेकर कान्हा की नगरी पहुंच गए हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव 12 अगस्त को मनाया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार नंदगांव में कान्हा का जन्मोत्सव एक दिन पहले मंगलवार को मनाया गया है। जन्माष्टमी को लेकर ब्रज के मंदिरों को भव्य रूप से मनाया सजाया गया है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म महाभिषेक में परम पवित्र सरयू नदी के जल का भी उपयोग किया जाएगा। अयोध्यापुरी से सरयू का जल लेकर श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास महाराज जल लेकर मथुरा पहुंच गए हंै। मोक्षपुरी मथुरा एवं अयोध्या की परम पवित्र नदियां यमुना और सरयू के साथ गंगाजल का उपयोग भी श्रीकृष्ण जन्ममहाभिषेक के दिव्य एवं अलौकिक धार्मिक अनुष्ठान में किया जाएगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के सानिध्य में भगवान श्रीकृष्ण के अलौकिक जन्ममहाभिषेक के कार्यक्रम होंगे।