
प्रदेश का अनोखा जंक्शन जहां मास्क पहनना है अनिवार्य!
-आरबीएम चिकित्सालय क्षेत्र में दृश्यता शून्य, बन रहा धूल का जंक्शन, हादसों का स्टैण्ड
भरतपुर. राजबहादुर मेमोरियल हॉस्पिटल (RBM Hospital) में इलाज (Treatment) से पहले आपको धूल (Dust) फांकनी पड़ेगी...संभलकर नहीं आए तो बैसाखी की मदद लेना भी तयशुदा है। जी हां, आपको डराया नहीं जा रहा है, लेकिन आप हकीकत जरूर जान लें। सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन (CFCD) कार्य के चलते अस्पताल के बिल्कुल नजदीक कैनाल से रोज निकल रहा हजारों टन स्लिट सडक़ों पर फैलकर लोगों को चोटिल कर रहा है और उससे भी ज्यादा परेशानी इसके सूखने पर उड़ रही धूल से आ रही है।
गर्मी में छा रहा कोहरा!
रीको क्षेत्र की शुरुआत में ही आरबीएम चिकित्सालय से पहले उड़ता धूल का गुबार यातायात (Traffic) में खासा रोड़ा डाल रहा है। हाल यह है कि वहां से निकलना खतरे से खाली नहीं है। सुबह से ही उड़ती धूल वहां कोहरे सी दृश्यता शून्य कर दे रही है। जिसके चलते वहां से निकलने वाले वाहन चालकों को कुछ मीटर पर भी नहीं दिख रहा है।
कार्यालय समय में भिड़ंत ज्यादा
धूल का गुबार सडक़ हादसे तक करा रहा है। कार्यालय समय में वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को जल्दी होने के कारण उन्हें धूल के बीच में से निकलना दुभर सा हो रहा है। ऐसे में कई बार यहां पर वाहन की भिड़ंत भी हो रही है। चूकि वहां से रीको जाने वाले भारी वाहन काफी संख्या में निकलते हैं, इसीलिए बड़े हादसे की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
कोरोना नहीं फिर मास्क
चिकित्सालय क्षेत्र से रोजाना गुजरने वाले वाहन चालक मास्क तक इस्तेमाल करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि कई दिनों से चल रहे निर्माण कार्यों की वजह से इस क्षेत्र में काफी धूल उड़ रही है। महिला चालक तो अधिकांशत: स्कार्फ का इस्तेमाल कर रही हैं। पुरुष साफी पहनने को मजबूर हैं।
धूल का जंक्शन बना क्षेत्र
दरअसल, आरबीएम चिकित्सालय क्षेत्र में तीन बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिसके चलते यह धूल का जंक्शन बन चुका है। आरबीएम चिकित्सालय में लम्बे समय से निर्माण कार्य जारी है। वहीं दूसरी ओर ठीक सामने की सरकारी जमीन पर हो रही मिट्टी से लेवल किया जा रहा है। वहीं सबसे बड़ा काम भी कुछ ही कदम दूर सीएफसीडी कैनाल प्रोजेक्ट है।
कपड़ों पर धूल की गर्त
रीको क्षेत्र की शुरुआत में ही आरबीएम चिकित्सालय से गुजरना यानी कपड़ों पर धूल छा जाना है। कुछ मीटर की दूरी में ही कपड़ों पर धूल की गर्त सी जम रही है। वहां से रोज गुजरने वाले लोग इस समस्या से भी काफी परेशान हैं।
सीधा नुकसान...सांस आती नहीं, दूर दिखता नहीं
उड़ती धूल से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर आ रहा है। इस धूल भरे क्षेत्र से गुजरने में सबसे ज्यादा असर आंखों पर आ रहा है। धूल के आंखों में घुसने से लोग आंखें मलते हुए नजर आते हैं, जिससे और भी खराबी होती है। वहीं धूल सीधे सांसों में घुसने से लोगों को खासी की शिकायत होने लगी है।
मुद्दा गंभीर, सोचना होगा
ऐसा तो कहीं नहीं होता है। बड़े कंस्ट्रकशन वक्र्स में पहले आम लोगों का ध्यान रखा जाता है। उसके लिए इंतजाम तक किए जाते हैं। लेकिन यहां तो कोई चिंता ही नहीं है। लोगों की परेशानी के बारे में स्थानीय निकाय को जरूर सोचना चाहिए।
अशोक राजपूत, निवासी, एसटीसी हाऊसिंग बोर्ड
हादसे का डर, कदम उठाएं
चिकित्सालय से रीको रोड (Riico) तक हाल खराब हैं। ट्रकों के चक्कों में लगी मिट्टी से पूरे क्षेत्र में धूल ही धूल हो रही है। मुंह पर हाथ रख निकलना पड़ता है। कई बार हादसे का डर रहता है। संभल कर आना पड़ता है। सबसे ज्यादा डर छोटे बच्चों का रहता है।
राजेन्द्र अग्रवाल, रीको रोड
Published on:
17 Feb 2023 05:16 pm
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