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सत्ता का सफर लग्जरी, फिर भी रोडवेज की बरस रही मेहरबानी

- सत्ता खिसकने पर पूर्व जनप्रतिनिधि कर रहे रोडवेज में सफर- सांसद व बयाना विधायक की एक साल में तीन यात्रा, वो भी संदेह के घेरे में

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सत्ता का सफर लग्जरी, फिर भी रोडवेज की बरस रही मेहरबानी

सत्ता का सफर लग्जरी, फिर भी रोडवेज की बरस रही मेहरबानी

भरतपुर . सत्ता में बैठे माननीयों का सफर लग्जरी है। इसके लिए सरकारी सुविधाएं भी उनके आगे-पीछे घूम रही हैं। इसके बाद भी रोडवेज की मेहरबानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। बरसों से रोडवेज में जनप्रतिनिधियों के लिए आगे की दो सीट आरक्षित की जा रही हैं, जबकि वह रोडवेज में सफर करने से परहेज कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के नाम पर उनके चहेते जरूर फ्री की यात्रा का लुत्फ उठा रहे हैं। वहीं सत्ता हाथ से निकलने के बाद पूर्व विधायक बसों में धक्के जरूर खा रहे हैं। इसकी पुष्टि रोडवेज के आंकड़े कर रहे हैं। हालांकि वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों के चहेते इस यात्रा का लाभ ले रहे हैं।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा करना विधायकों व सांसदों को रास नहीं आ रहा है। विधायक आमतौर पर लग्जरी गाडिय़ों में सवारी करते हैं। पूर्व व वर्तमान सांसद व विधायकों को रोडवेज बसों में प्रदेश व राष्ट्रीय राजधानी में निशुल्क यात्रा की कूपन आधारित सुविधा मिली हुई है। विधायकों की बस यात्रा के खर्च एवं किराये का पुनर्भरण विधानसभा सचिवालय से रोडवेज विभाग को किया जाता है। इस सुविधा में विधायक व सांसद के साथ एक सहयोगी को भी निशुल्क यात्रा की सुविधा मिली हुई है। यात्रा के दौरान विधायक व सांसद के विधानसभा व संसद से जारी कूपन परिचालक को देना होता है। इसके एवज में मुख्य यात्रा टिकट के साथ सहयोगी का टिकट भी जारी होता है। रोडवेज की मानें तो गत वर्ष जिले के सात विधायकों में से केवल एक ही विधायक ने रोडवेज बस से यात्रा की है, जबकि छह विधायकों ने एक भी निर्वाचन क्षेत्र या स्थानीय दोनों डिपो से प्रदेश या देश की राजधानी तक का सफर तय नहीं किया है।

पूर्व विधायकों का छूटा लग्जरी सफर, रोडवेज से जोड़ा नाता

नाम गुप्त रखने की शर्त पर रोडवेज के अधिकारियों ने बताया कि बस में एक व दो नम्बर की सीट विधायक व सांसद के लिए आरक्षित है, लेकिन वर्तमान में जिले के सात विधायकों में से बयाना विधायक ने तीन बार बस से यात्रा की है, जबकि अन्य विधायकों ने एक बार भी रोडवेज की यात्रा नहीं की है। रोडवेज बसों में यात्रा करने वालों में सबसे अधिक संख्या पूर्व व भूतपूर्व विधायकों की हैं। खास बात यह है कि इन माननीय के पास से अधिकांश यात्रा करने वाले या तो उनके प्रतिनिधि हैं या फिर उनके चहेते। वह खुद रोडवेज की यात्रा नहीं कर रहे

सत्ता पक्ष की रोडवेज में रुचि नहीं

जिले की सभी सातों विधानसभा के विधायक सत्ता पक्ष से हैं। रोडवेज के आंकड़े देखे जाएं तो बयाना विधायक की एक वर्ष में तीन यात्राओं के अलावा सत्ता पक्ष से जुड़े किसी भी विधायक ने रोडवेज के सफर में रुचि नहीं ली है। विधायकों का मानना है कि जयपुर आवाजाही करते समय अन्य लोग भी साथ रहते हैं, इसलिए निजी वाहन से ही जाना होता है। लिहाजा रोडवेज में नहीं बैठ पाते।

सांसद के नाम पर हुआ सफर

रोडवेज की यात्रा करने में वर्तमान सांसद भी पीछे नहीं हैं। उन्होंने गत एक वर्ष में तीन यात्राएं की हैं, लेकिन उनकी रोडवेज की यात्रा संदेह के घेरे में है, क्योंकि उन्हें वाई प्लस सुरक्षा मिले करीब दो साल का समय होने को है और सुरक्षा मिलने के बाद वे अपने पूरे लवाजमे के साथ ही चलती है। ऐसे में उन्होंने कब और किस समय रोडवेज की यात्रा की है, जबकि रोडवेज कार्यालय में इनके पास जमा हैं।