
सेक्टर नंबर 13: खातेदारों से 12 साल पहले खेती का हक छीना, मुआवजे का अब तक इंतजार
भरतपुर. नगर सुधार न्यास ने 12 साल पहले जिन किसानों से खेती करने का हक छीना, वो किसान आज भी मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। आठ हजार आवेदक भूखंड आवंटन के लिए आवेदन कर भूल चुके हैं, लेकिन जिनके परिवार दशकों से जिस जमीन के सहारे जीवन यापन कर रहे थे। आज उन्हें अपने हक के लिए खुद की ही जमीन को लेकर आंदोलन करना पड़ रहा है। सरकारी सिस्टम की इतनी बड़ी लापरवाही का मामला जुड़ा हुआ है सेक्टर नंबर 13 की स्कीम से...जहां किसान आज भी मुआवजे का इंतजार करते हुए सात दिवस में समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं।
नगर सुधार न्यास ने 2002 नेशनल हाईवे स्थित सेक्टर नंबर 13 स्कीम का अधिगृहण कर लिया। इसके बाद राज्यपाल की अनुमति के लिए उन्होंने भेज दिया फिर सेटलमेंट की रिपोर्ट एक्वायर कर नगर विकास न्यास के नाम खातेदारी चला दी। भूखंडों की रिजर्व प्राइज नौ हजार रुपए वर्गमीटर रखी गई थी। इसकी प्लानिंग 21 सितंबर, 2005 को हुई थी। जबकि एक सितंबर, 2011 को सरकार से स्वीकृति मिली। इसके बाद 3 सितंबर 2014 को 2200 बीघा भूमि पर कब्जा लिया गया। इसे लेकर तमाम तरह के भू स्वामियों से विवाद चलते रहे। इस कारण 19 नवंबर 2017 को वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से मंजूरी मिल सकी। योजना में 4 करोड़ रुपए की लागत से अप्रोच रोड बनाई जा चुकी हैं। इसमें मलाह मोड से सेवर रोड तक का दाएं क्षेत्र, सेवर रोड से हीरादास और काली की बगीची तिराहे तक का अंदरूनी हिस्सा शामिल है। 2006 में यूआईटी ने रजिस्ट्री पर रोक लगवा दी। इसके बाद 2010 में किसानों के खेती करने पर रोक लगा दी। कुछ किसानों ने फसल की थी तो प्रशासन ने ट्रेक्टर चलवा कर फसल को नष्ट कर दिया। इसके बाद किसान यूआईटी के चक्कर लगाते रहे। न तो किसानों को 25 प्रतिशत जमीन मिली न कोई मुआवजा। दर्जनभर गांव के किसान मुआवजे के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। इसमें बरसो का नगला, सोनपुरा, विजय नगर, तेरही नगला, जाट मड़ौली, श्रीनगर, मलाह, अनाह आदि के किसान शामिल हैं। किसानों का कहना है कि हमारी जमीन होते हुए भी हम दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। हम दिहाड़ी मजदूर बन गए हैं हम पर खाने तक को नहीं हैद्ध बाजार से किलो के हिसाब से गेहूं खरीदना पड़ रहा है। बच्चों को पढ़ा भी नहीं सकते।
शहर के बाहर दो लाख की आबादी बसाने का है प्लान
नगर विकास न्यास की ओर से जयपुर-आगरा राजमार्ग पर बहुप्रतिक्षित आवासीय योजना सेक्टर-13 को भरतपुर का उप नगर माना जाता है। इसमें दो लाख की आबादी को बसाने का प्लान किया गया है। यहां मिनी सचिवालय, कॉलेज, अस्पताल, स्पोटर्स काम्पलेक्स, मार्केट, सामुदायिक भवन, दो स्कूल, आठ पार्क सहित तमाम सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।
फैक्ट फाइल
-346.86 हेक्टेयर में है सेक्टर -13 योजना
-2980 किसानों की जमीन हुई थी अवाप्त
-8892 आवेदन लॉटरी के लिए हुए
-5023 लोगों ने आवेदन वापस लिए
-1110 किसानों को नहीं मिले आरक्षण पत्र नहीं मिले
जानिए...
-वर्षों गुजर गए प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते, अगर सात दिन के अंदर किसानों को पट्टे नहीं दिए गए तो जेसीबी से सड़क खोदकर खेती करेंगे। किसान आंदोलन करेंगे। कोरोनाकाल में अगर कोई भी घटना घटित होती है तो प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
वीरी सिंह, बरसों का नगला
-सेक्टर नंबर 13 नगर सुधार न्यास की ओर से अधिग्रहण कर ली गई है। वहां न तो खेती कर सकते हैं और न ही कोई मुआवजा मिला है। हमारी जमीन होते हुए भी हम एक-एक पैसे तो मोहताज हो रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को तो कोई चिंता है नहीं है।
घनश्यामदास बरसों का नगला
-हमारा मकान खेत के बीचों बीच में आ रहा है। हमेशा तलवार लटकी रहती है। कोई तोडऩे की कहता है तो थोड़ा तो हमें मुआवजा दिया जाए। सालों से बना हुआ मकान है हमारा।
हरि सैनी, श्रीनगर
-मैं किसान हूं और मैं खेती पर ही आश्रित हूं। यूआईटी ने जमीन अधिगृहण कर ली। इसके बाद अब मैं किस तरह से अपने परिवार का पालन पोषण करूं। अधिकारियों के पास जाते हैं तो कोई सुनता नहीं है। नए-नए अधिकारी आते हैं और चले जाते हैं। कोई सुनने वाला नहीं है।
बसंता, बरसों का नगला
-हमारी जमीन अधिगृहण कर उस पर रोड बना दी है। खेती से वंचित कर दिया है। 25 प्रतिशत जमीन दें या फिर मुआवजा दें। कुछ नहीं दिया है। वर्षों से चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं। लोगों पर कर्ज हो रहा है। मजदूरी भी नहीं मिल रही है आखिर कैसे चलेगा जीवन।
बने सिंह, विजय नगर
-जमीन में रोड डाल दी है। जमीन से वंचित कर दिया है। अधिकारियों के चक्कर पर चक्कर लगाते हैं। आश्वासन देते रहते हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। हमारी जमीन हमें वापस दें या फिर मुआवजा दें। हम एक-एक पैसे को मोहताज हो गए हैं। हम अपना भरण-पोषण तो कर सके।
अमर सिंह, बरसो का नगला
-जमीन है नहीं, खेती कहां से करें। गेहूं के लाले पड़ गए हैं। एक बार गेहूं की बुवाई तक की थी। नगर सुधार न्यास के ठेकेदार के कर्मचारी ट्रेक्टर से पूरी फसल को नष्ट कर गए, या तो हमारी 25 प्रतिशत जमीन हमें वापस कर दो और नहीं तो हमें खेती करने दें।
उदय सिंह, बरसो का नगला
-मेरे पास मात्र दो बीघा खेत है। अकेला कमाने वाला हूं। कोई साधन नहीं है। कृषि पर आधारित हूं बरसों बीत गए खाने के लिए अनाज तक नहीं है। मजदूरी कर बच्चों का पेट पालन कर रहा हूं। कोरोना के दौरान तो मजदूरी भी नहीं मिली। बच्चों को पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है। इसलिए घर पर ही रह रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के पास जाओ तो संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। आपके पास गए थे तो कह रहे थे लडऩे आए हो क्या।
लालाराम, गांव सोनपुरा
-सालों बीत गए, न तो फसल कर पा रहे हैं न जमीन को ही बेच पा रहे हैं। हमारे लिए यूआइटी लिखकर कर दे दे तो हम बेचकर अन्य जगह जमीन ले लें और अपने बच्चों का लालन-पालन कर सकें।
मुरारीलाल, गांव सोनपुरा
इनका कहना है
-नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ से कुछ स्वीकृति आनी बाकी है। हम दस्तावेज आदि भी भेज चुके हैं। बाकी स्कीम को लेकर अब क्या-क्या होना बाकी है। यह फाइल देखकर ही पता चल सकता है।
केके गोयल, कार्यवाहक सचिव यूआईटी
-स्कीम नंबर 13 यूआईटी व प्रशासन की लापरवाही का परिणाम है कि आज तक खातेदार चक्कर काट रहे हैं। मेरे कार्यकाल में इस स्कीम में तीव्र गति से काम हुआ था। मंत्रीजी सिर्फ जुबानी भाषण में देने में व्यस्त है। उन्हें धरातल पर आकर देखना चाहिए कि जो काम रुका हुआ है, उसे गति देकर खातेदारों को राहत देने के अलावा आमजन को भी सुविधा प्रदान की जाए।
विजय बंसल
पूर्व विधायक
Published on:
13 Jul 2021 12:52 pm
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