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उत्तर भारत के बड़े हिन्दी साहित्य के खजाने की नीलामी पर लटकी तलवार

श्री हिन्दी साहित्य समिति: अब दो दिसम्बर नियत की नीलामी की तिथि

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उत्तर भारत के बड़े हिन्दी साहित्य के खजाने की नीलामी पर लटकी तलवार

उत्तर भारत के बड़े हिन्दी साहित्य के खजाने की नीलामी पर लटकी तलवार

Sword hangs on auction of big Hindi literature treasure of North India
भरतपुर . उत्तर भारत के सबसे समृद्ध साहित्य को समेटे भरतपुर (bharatpur) की सबसे पुरानी श्री हिन्दी साहित्य समिति के खजाने पर एक बार फिर नीलामी की तलवार लटक गई है। वजह, घोषणा और आश्वासन से आगे इस साहित्य के भंडार को बचाने के प्रयास नहीं हो सके हैं। ऐसे में न्यायालय ने समिति भवन पर फिर से नीलामी का नोटिस चस्पा कर दिया है।
खास बात यह है कि सरकार की ओर से 5 करोड़ रुपए की घोषणा बजट में हो चुकी है, लेकिन यह अभी कागजों से बाहर नहीं आया है। यही वजह है कि अब न्यायालय ने 2 दिसम्बर को समिति की नीलामी के लिए नोटिस चस्पा कर दिया है। मुख्यमंत्री की ओर से बजट घोषणा में 5 करोड़ रुपए की राशि का ऐलान करने के बाद अभी तक यह राशि समिति को नहीं मिली है। पत्रिका ने पहले भी इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। हालांकि सरकार की ओर से नियुक्त किए गए राजकीय अधिवक्ता ने इस मामले को लेकर न्यायालय में पहल की थी। इसके बाद पूर्व में इसकी नीलामी टल गई थी। इसके लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र पेश कर समय मांगा गया था। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए बजट में मुख्यमंत्री ने कहा था कि श्री हिन्दी साहित्य समिति का पुस्तकालय अपने आप में अनूठा है। वर्तमान परिस्थति में इसका संरक्षण एवं संवद्र्धन जरूरी है। वर्ष 2013-14 के बजट में इसे 50 लाख रुपए का अनुदान स्वीकृत किया था। इस बजट में पुस्कालय को सरकारी संरक्षण में लेते हुए संवद्र्धन के साथ-साथ आधुनिकीकरण के लिए 5 करोड़ रुपए अनुदान दिया जाना प्रस्तावित किया, लेकिन इसके बाद अब सरकार ने इसकी सुध नहीं ली है। इसके चलते न्यायालय ने अब 2 दिसम्बर को नीलामी का नोटिस जारी कर दिया है। सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट ने समिति भवन पर नोटिस भी चस्पा करा दिया है।


दो कर्मचारियों की तनख्वाह से जुड़ा है मामला
श्री हिन्दी साहित्य समिति को पहले राज्य सरकार की ओर से शिक्षा विभाग के तहत करीब 80 प्रतिशत अनुदान मिलता था, जो वर्ष 2003 में बंद कर दिया। इसके बाद यह समिति भाषा एवं पुस्तकालय विभाग में मर्ज हो गई और यहां काम करने वाले कर्मचारियों का वर्ष 2010 में समायोजन कर दिया गया, लेकिन समिति में कार्यरत लाइब्रेरियन दाऊदयाल शर्मा एवं क्लर्क त्रिलोकीनाथ शर्मा का समायोजन नहीं हो सका। ऐसे में सरकारी कार्मिक के लिहाज से इनके वेतन एवं भत्ते बढ़ते गए और अगस्त 2019 तक इनका वेतन करीब 1 करोड़ 11 लाख 73 हजार 13 रुपए बकाया रह गया, जो अब सवा करोड़ रुपए तक हो गया है। इन दोनों कार्मिकों के न्यायालय की शरण लेने के बाद कोर्ट ने इनका बकाया दिलाने के लिए हिन्दी साहित्य समिति भवन की नीलामी का नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद समिति की नीलामी को बचाने के लिए लोगों ने गुहार लगाई। इस पर बजट घोषणा में सरकार ने समिति को 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा की, लेकिन कर्मचारियों को अभी तक उनका पैसा नहीं मिल सका है। ऐसे में फिर से समिति को नीलाम करने का नोटिस जारी हुआ है।


पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया मामला
भरतपुर की विरासत में शुमार समिति को नीलामी से बचाने के लिए यह मुद्दा पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया। पत्रिका ने 7 जनवरी के अंक में ‘4 मंत्रियों को नहीं भान, नीलामी के कगार पर ज्ञान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद अब दोबारा नीलामी का नोटिस जारी होने पर 13 जुलाई के अंक में ‘घोषणा तक सिमटा ‘सरकारी सहारा’, फिर नीलामी के कगार पर आया ज्ञान का खजाना’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।


नोटिस चस्पा होना न्यायिक
इस मामले में निर्णय जल्द हो जाएगा। सरकार इसे अधिग्र्रहण कर रही है। नोटिस चस्पा होना न्यायिक प्रक्रिया है, जो समय के हिसाब से चलेगी। कर्मचारियों की तनख्वाह वगैरह के लिए सरकार सकारात्मक रूप से विचार कर रही हे। कुछ ही दिन में यह मसला हल हो जाएगा।
आलोक रंजन, जिला कलक्टर भरतपुर