
275 करोड़ के प्रोजेक्ट का पर्यवेक्षण करेगी 11 सदस्यीय कमेटी, तकनीकी स्वीकृति बाकी
भरतपुर. दम तोड़ रहे शहर के ड्रेनेज सिस्टम को नई जान देने की कवायद शुरू हो चुकी है। अब 275 करोड़ के जल निकासी के लिए मास्टर ड्रेनेज प्रोजेक्ट का पर्यवेक्षण एवं सुझाव देने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस प्रोजेक्ट अब सिर्फ तकनीकी स्वीकृति मिलना बाकी है। इसके बाद निविदा निकालने की प्रक्रिया नगर निगम स्तर से की जाएगी। वहीं गुरुवार को स्वायत्त शासन विभाग से भी एक टीम आ सकती है।
कमेटी को लेकर निकले आदेश में उल्लेख किया है कि मुख्यमंत्री की बजट घोषणा वर्ष 2021-22 भरतपुर शहर के जल निकासी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए मास्टर ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जा रहा है। मास्टर ड्रेनेज सिस्टम प्रोजेक्ट के समय-समय पर पर्यवेक्षण एवं सुझाव देने के लिए एक पर्यवेक्षण कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में नगर निगम के मेयर अभिजीत कुमार को अध्यक्ष, डिप्टी मेयर गिरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष कपिल फौजदार, एडवोकेट श्रीनाथ शर्मा, लुपिन के अधिशाषी निदेशक सीताराम गुप्ता, नगर निगम आयुक्त डॉ. राजेश गोयल, यूआइटी सचिव, अधीक्षण अभियंता जल संसाधन विभाग, अधिशाषी अभियंता नगर विकास न्यास, अधिशाषी अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सदस्य, अधिशाषी अभियंता नगर निगम को सदस्य सचिव बनाया गया है। प्रोजेक्ट की तकनीकी स्वीकृति आने के बाद प्रथम चरण में 186 करोड रुपए से कार्य कराने के लिए निविदा निकाली जाएगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता से ली जाएगी कानून से संबंधित सहायता
कमेटी में वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ शर्मा को शामिल किया गया है। क्योंकि अधिवक्ता शर्मा ने सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन को लेकर हाइकोर्ट में रिट दायर कर रखी है। इसलिए शर्मा से संबंधित विभाग के अधिकारी सीएफसीडी को लेकर हर जानकारी प्राप्त करेंगे। इसके अलावा पूर्व में यह प्रोजेक्ट नगर सुधार न्यास के पास था, अब नगर निगम के पास है। इसलिए दोनों के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर बैठक की जाती रहेगी।
यह है योजना
नगर निगम और यूआईटी क्षेत्र के ड्रेनेज सिस्टम को ठीक कराने के लिए योजना तैयार की गई है। इसके तहत पूरे शहर को जलभराव की समस्या से निजात दिलाने की योजना है। पूरी योजना की करीब 275 करोड़ रुपए डीपीआर तैयार की गई है। पूरे ड्रेनेज सिस्टम को चिकसाना बांध से कनेक्ट किया जाएगा। इससे बरसात के मौसम में और आम दिनों में शहर का पूरा पानी चिकसाना बांध तक पहुंच सके। इससे शहर को जलभराव की समस्या से निजात मिल सकेगी। जल निकासी के लिए कुल पांच प्राचीन ड्रेन और कैनाल हैं। इसमें सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन सीएफसीडी पांच किमी लंबी, रामनगर दो मोरा चैनल चार किमी, रणजीत नगर फ्लड कंट्रोल ड्रेन चार किमी, हीरादास चैनल तीन किमी, गिर्राज कैनाल तीन किमी लंबी है।
-कमेटी प्रोजेक्ट का पर्यवेक्षण करने के साथ ही सुझाव भी देगी। तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद करीब 186 करोड़ रुपए से कार्य कराने के लिए निविदा निकाली जाएगी।
अभिजीत कुमार
मेयर नगर निगम
Published on:
01 Jul 2021 02:50 pm
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