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फर्जी की पट्टे की रकम लेकर असली की तरह रसीद देते रहे आरोपी

-मथुरा गेट थाने में एक और मामला दर्ज, 40 हजार रुपए लेकर थमा दी 10 हजार की रसीद-अभी तक पुलिस बरामद नहीं कर सकी फर्जी रसीद बुक व अन्य दस्तावेज

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फर्जी की पट्टे की रकम लेकर असली की तरह रसीद देते रहे आरोपी

फर्जी की पट्टे की रकम लेकर असली की तरह रसीद देते रहे आरोपी

भरतपुर. नगर निगम के नाम से जारी फर्जी पट्टा प्रकरण के तार गिरोह से ही नहीं बल्कि और भी रसूखदारों से जुड़े हुए हैं, लेकिन अभी तक पुलिस इस प्रकरण में कोई खास खुलासा नहीं कर सकी है। हालांकि बताते हैं कि जिला कलक्टर की ओर से गठित कमेटी की ओर से रिपोर्ट सौंपने के बाद इसका खुलासा किया जा सकता है। क्योंकि खुद विपक्षी पार्टी के नेता भी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति के आरोप लगा चुके हैं। इसमें एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि गिरफ्तार आरोपियों की ओर से भले ही पट्टा फर्जी दिया जाता था, लेकिन रसीद पर कोई शक नहीं कर सकता था। कोई क्रमांक से लेकर उस पर अंकित हर सूचना असली जैसी दिखती थी। पुलिस ने अभी तक फर्जी पट्टे, रसीद बुक व अन्य दस्तावेज भी बरामद नहीं किए हैं। उल्लेखनीय है कि एकमात्र राजस्थान पत्रिका की ओर से 29 जुलाई से लेकर अब तक फर्जी पट्टा प्रकरण का खुलासा किया जा रहा है।
इधर, मथुरा गेट थाने में आयुष सिंघल पुत्र देवेश कुमार सिंघल निवासी 14 महादेव गली गंगा मंदिर ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया है कि मेरे पिता एवं ताऊजी देवेश कुमार सिंघल एवं बृजेश कुमार के चौदह महादेव गली स्थित पैतृक मका के संबंध में स्टेट ग्रांट के तहत पट्टा कराने के लिए जानकारी के लिए नगर निगम गया तो वहां मुझे योगेश उर्फ योगी मिला। उसने मुझसे पूछा कि कैसे घूम रहे हो। मैंने कहा कि घर का पट्टा कराना है। इस पर उसने घर का पता पूछा और कहा कि मैं यहां नगर निगम में कम्प्यूटर ऑपरेटर हूं और अपने ऑफिस में ले गया। जहां कहा कि मैं आपका पट्टा कराकर दे दूंगा। इसके लिए आपको नगर निगम के चक्कर नहीं लगाने होंगे। पहले मैं मौका देखूंगा। इस पर वह मौका देखने के लिए घर आया व बाहर से मौका देखकर बोला आपका पट्टा हो जाएगा, लेकिन दुकान होने के कारण आपका पट्टा व्यवसायिक होगा। इसके लिए नगर निगम की कार्यवाही व फीस के 30 हजार रुपए एवं व्यवसायिक पट्टे की सरकारी रसीद के 10 हजार रुपए देने होंगे। इस पर मैंने मौके पर उसे पैसे दे दिए। योगेश कुमार अपने आप फाइल तैयार कर एक पट्टा क्रमांक 4933 दिनांक 15 जुलाई 2022 पत्रावली संख्या 11280 और रसीद क्रमांक 84 पुस्तक संख्या 2920 दे दिए। इसको हमने दिनांक 19 जुलाई 2022 को सब रजिस्ट्रार भरतपुर के यहां से पंजीयन करा लिया, लेकिन अब अखबारों की ओर से जानकारी होने पर कि योगेश उर्फ योगी ने फर्जी पट्टे जारी किए हैं। इसलिए पट्टा फर्जी होने की आशंका पर मामला दर्ज कराया गया है।


...क्योंकि आग में जलाया सच

फर्जी पट्टा प्रकरण में एक और बात सामने आई है कि हाल में ही नगर निगम के जिस शाखा में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार किया गया था। उसी शाखा में उसका सामान रखा हुआ था। जहां बड़ी संख्या में आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों की प्रति प्राप्त हुई थी, लेकिन नगर निगम के ही एक जिम्मेदार अधिकारी के आदेश पर उन सभी दस्तावेजों को आनन-फानन में आग के हवाले कर दिया गया। अब सवाल यह उठता है कि अगर नगर निगम का फर्जी पट्टा प्रकरण से कोई मतलब नहीं है तो उन दस्तावेजों को पुलिस या संबंधित कमेटी को सूचना दिए बगैर क्यों जलाया गया। क्योंकि कहीं यह भी जांच का सवाल है। हालांकि इसकी सूचना भी कुछ पार्षदों की ओर से संबंधित जांच कमेटी को दी गई है।

आज सीएम तक पहुंचाएंगे फर्जी पट्टा प्रकरण

नगर निगम के पार्षदों का एक गुट फर्जी पट्टा प्रकरण को लेकर मेयर व आयुक्त को घेरने की तैयारी भी कर चुका है। इसी डर से अभी तक नगर निगम की ओर से साधारण सभा की बैठक तक नहीं बुलाई गई है। क्योंकि पार्षद बैठक में फर्जी पट्टा प्रकरण को लेकर सवाल करेंगे, लेकिन दोषियों की जिम्मेदारी तय कोई नहीं कर पाएगा। ऐसे में पार्षदों का एक गुट कुम्हेर के गांव पला आ रहे मुख्यमंत्री को साक्ष्यों के साथ ऑडियो भी सौंपेगा, ताकि सीएम तक नगर निगम के फर्जी पट्टा घोटाले का सच बताया जाएगा। इसके बाद साक्ष्यों को सार्वजनिक भी किया जाएगा।

नगर निगम के जिम्मेदारों पर हर फर्जीवाड़ा बेअसर

कांग्रेस का बोर्ड बने तीन साल का समय गुजरने को है, लेकिन हकीकत यह है कि इस बोर्ड के कार्यकाल में कितने ही फर्जीवाड़ों के प्रकरण व विवाद सामने आ चुके हैं, लेकिन हर बार जिम्मेदारों के जिम्मेदारी से मुकरने व दोषियों को बचाने की कवायद जारी रही है। कभी मेयर-आयुक्त विवाद तो कभी महीनों से खाली पड़ा आयुक्त का पद, कभी इकरन नंदीशाला में लकडिय़ों के नाम पर मिठाई वितरण की कलई खुलकर सामने आती रही है, लेकिन जांच के नाम पर खानापूर्ति व जिम्मेदारों का मौन आमजन के सामने सच बयां करता रहा है। निगम को चाहिए कि इस प्रकरण में सच का सामना करते हुए निष्पक्ष जांच कराए। ताकि भविष्य में इस तरह की घोटाला निगम की बदनामी न कर सके।