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गुडगांवा कैनाल में पानी नहीं आने से सूखने लगी फसल, हरियाणा सरकार समझौते की नहीं कर रही पालना

कामां तहसील क्षेत्र के गांवों के लिए जीवनदायिनी कही जाने वाली गुडगांवा कैनाल में पिछले एक महीने से हरियाणा की ओर से गुडगांवा कैनाल मे यमुना जल समझौते का पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।

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गुडगांवा कैनाल में पानी नहीं आने से सूखने लगी फसल, हरियाणा सरकार समझौते की नहीं कर रही पालना

गुडगांवा कैनाल में पानी नहीं आने से सूखने लगी फसल, हरियाणा सरकार समझौते की नहीं कर रही पालना

भरतपुर. कामां तहसील क्षेत्र के गांवों के लिए जीवनदायिनी कही जाने वाली गुडगांवा कैनाल में पिछले एक महीने से हरियाणा की ओर से गुडगांवा कैनाल मे यमुना जल समझौते का पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। गुडगांवा कैनाल में पानी नहीं आने से कामां क्षेत्र के किसानों के खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी है। कई बार सरकार से पानी छुड़वाने की भी मांग की गई है। लेकिन हर बार हरियाणा प्रशासन ठेंगा दिखा देता है। रविवार को गांव सहेड़ा, सतवास, पथवारी भट्टकी, नगला बनचरिया, नगला जालिम, नगला बलदेव, ऐंचवाडा सहित दर्जनों गांवों के नाराज किसानों ने भाजपा नेता जवाहर सिंह बेढम की अध्यक्षता में पथवारी मोड पर पंचायत की। किसानों ने सरकार के रवैये के खिलाफ नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन किया। किसानों ने बताया कि गुडगांवा कैनाल में यमुना जल समझौते का पानी नहीं आने से किसान सड़कों पर है और आंदोलन करने को मजबूर है। सरकार को किसानों व आमजन की जरा भी परवाह नहीं है और किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए किसानों को पानी नहीं मिल रहा है। साथ भी बरसात भी नहीं हो रही है। जिसके चलते किसानों की फसल सूख रही है किसानों ने बताया कि यदि जल्द ही गुडगांवा कैनाल में पानी नहीं छोड़ा गया तो किसानों को उपखण्ड कार्यालय पर धरना देने पर मजबूर होना पड़ेगा।
बैठक में भाजपा जुरहरा मंडल अध्यक्ष गजराज आर्य, प्रेमचंद बामनी, भुगी ज्ञान सिंह फौजदार, जोगेंद्र सिंह व अवतार सिंह, आसू खान, गिरवर सिंह, बलराम यादव पथवारी, चेतराम नगला बचरिया, जसमत, जालिम, मानसिंह फौजी, डालचंद व चरण सिंह आदि मौजूद थे।


यह हुआ था समझौता

वर्ष १९९४ में राजस्थान के जल संसाधन विभाग के साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब के साथ गुडगावां कैनाल से यमुना जल समझौता के तहत हरियाणा के माध्यम से समझौता हुआ था। लेकिन ओखला वैराज से कभी भी इस समझौते के मापदंड के अनुसार पानी नहीं मिल पाता है। कामां मेवात क्षेत्र की पोखर भी सूखी पड़ी हुई है। जिससे पशु पालक भी परेशान होते नजर आते है। लेकिन विभाग के अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।