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प्रदेश को दी सीख, हम ही भूले दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि छापना

आखातीज के अबूझ सावों पर बाल-विवाहों की रोकथाम के लिए शादी के निमंत्रण पत्रों पर वर-वधू की जन्मतिथि छापने की सीख देने वाला भरतपुर जिला ही अब अपनी सीख भूल गया है।

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Rajesh Kumar Khandelwal

Apr 17, 2017

आखातीज के अबूझ सावों पर बाल-विवाहों की रोकथाम के लिए शादी के निमंत्रण पत्रों पर वर-वधू की जन्मतिथि छापने की सीख देने वाला भरतपुर जिला ही अब अपनी सीख भूल गया है।

दरअसल, पूर्व में भरतपुर से ही यह नवाचार शुरू हुआ था, जिसको पसंद कर राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में इसे लागू कर दिया है। अब आखातीज निकट ही है
और सावों की निमंत्रण पत्रिकाओं में दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि प्रकाशित नहीं करवाई जा रही है। इससे बाल विवाह को प्रोत्साहन मिलने का एक रास्ता खुला हुआ है।

इस बार आखातीज का अबूझ सावा 28 अप्रेल को तो पीपल पूर्णिमा 10 मई को है। दोनों ही तिथियों पर बाल-विवाह होते हैं। हालांकि महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री अनिता भदेल राज्य के सरपंचों को पत्र लिखकर इसकी रोकथाम का आग्रह किया है तो विभाग ने नियंत्रण कक्ष स्थापित कर बाल विवाह पर पैनी निगाह जमा दी है। लेकिन निमंत्रण पत्रिकाओं पर न ही वे संदेश देते स्लोगन लिखे जा रहे हैं, जो बाल विवाह रोक के लिए जागरूक बनाते हैं और न ही वर-वधू की जन्मतिथि। इस तरह प्रिटिंग प्रेस स्तर पर कायदे-कानूनों की अवहेलना हो रही है।

स्लोगन लिखने के आदेश भी हुए हवा-हवाई

वर्ष 2012 में भरतपुर के तत्कालीन जिला कलक्टर गौरव गोयल ने शादी कार्डों पर वर-वधू की जन्मतिथि छपवाना अनिवार्य किया था। ताकि उनकी उम्र छिपाई नहीं जा सके। कार्ड पर 'बाल विवाह अपराध हैÓ व 'विवाह के लिए लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष अनिवार्य हैÓ भी छपवाना जरूरी किया था। इस आदेश को आखातीज के सावे को देखते हुए मात्र दो माह के लिए ही लागू किया गया था। सरकार को यह पहल पसंद आई और राज्य में इसे लागू कर दिया। एक-दो वर्ष तक आदेश की पालना होती रही लेकिन अब यह हवा-हवाई हो गए।

उल्लंघन पर सजा भी

आदेश के पालन के लिए प्रिटिंग प्रेस वालों को निर्देश दिए थे। कार्ड छपवाने वाले परिवार से वर-वधू की जन्मतिथि का प्रमाण-पत्र लेना जरूरी किया था। आदेश की अवहेलना पर भादसं के तहत दण्डनीय अपराध मानते हुए गिरफ्तारी, छह माह की सजा, एक हजार रुपए जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया। इतना ही नहीं प्रिटिंग प्रेस बंद करने जैसी कार्रवाई भी शामिल की गई।

- बाल विवाह रोकने की दिशा में प्रशासन गंभीर है। एक माह पहले निर्देश जारी किए जा चुके हैं। शादी कार्डों पर वर-वधू की जन्मतिथि नहीं छापने संबंधी कोई शिकायत नहीं मिली है।
डॉ. एनके गुप्ता, जिला कलक्टर, भरतपुर

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