मनमर्जी के निशाना छोड़ गए बर्बादी के निशां

- निशानों पर पड़ी भूमाफिया की नजर और छूट गई जमीन
- मुआवजे की जगह बेबसी बनी मुकद्दर

By: Meghshyam Parashar

Published: 24 Jul 2021, 11:03 AM IST

भरतपुर . नक्शे में नुक्स है। ले-आउट समझ से परे। जमीन अधिग्रहित करने के न मापदंड नजर आते हैं और न ही जमीन को छोडऩे की वजह। धरातल पर कुछ है तो बस भू माफियाओं की सांठ-गांठ। संभाग की सबसे बड़ी आवासीय कॉलोनी का तमगा लेने वाली सेक्टर 13 की कहानी की स्क्रिप्ट भूमाफियाओं की ओर से लिखी नजर आती है। यही वजह है कि असल खातेदारों की तकदीर में सिर्फ बेबसी ही नजर आ रही है।
यूआईटी ने अपना घरौंदा बनाने का ख्वाब संजोने वालों के लिए सेक्टर-13 योजना बनाई। इसके लिए बड़े पैमाने पर कार्य शुरू किया गया। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए कुछ सेवानिवृत पटवारियों की सेवाएं ली गईं। यहीं से इसमें खामियाों की नींव डल गई। सूत्रों का दावा है कि ऐसे कार्मिकों ने मनमर्जी से जमीनों पर निशान लगाकर उन्हें अधिग्रहित करने का काम शुरू कर दिया। खास बात यह है कि इसमें बड़े पैमानों पर जमीन का अधिग्रहण हुआ। इस दौरान ऐसी निशान लगी जमीनों पर भूमाफियाओं की नजर पड़ गई। यहां से इसमें सांठ-गांठ का खेल शुरू हो गया। कार्मिकों की ओर से जिन जमीनों पर निशान लगाए गए, उन जमीनों के मालिकों के पास भू माफिया पहुंचे और जमीन अधिग्रहण में पैसा नहीं मिलने की बात कहकर खातेदारों को बहकाकर औने-पौने में भाव में यह जमीन उन्होंने खरीद ली। इसके बाद सौदे का असल खेल शुरू हुआ। खातेदारों से औने-पौने में जमीन खरीदकर भू माफियाओं ने सांठ-गांठ कर यूआईटी से इन जमीनों को अधिग्रहण से मुक्त करा लिया। इसके बाद यहां सेक्टर 13 का निर्माण तो नहीं हुआ, लेकिन भू माफियाओं ने अपने पैर यहां जमा लिए। यही वजह है कि यूआईटी की यह योजना अब तक धरातल पर अधूरी ही नजर आ रही है।

लगातार रकबे, बीच में हुआ अधिग्रहण

सेक्टर-13 में खामियों का कितना बोलबाला है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लगातार रकबे होने के बाद भी बीच में एक रकबा लेकर बाकी अन्य को अधिग्रहण से मुक्त कर दिया गया। यह सब सांठ-गांठ के चलते हुआ। झीलरा गांव से आगे सेवर की ओर पडऩे वाले रकबा नंबर 1111, 1112, 1137, 1007 एवं 1009 रकबा को छोड़कर यहां महज एक 1110 रकबा को यूआईटी ने अधिग्रहण कर लिया। बाकी रकबा क्यों छोड़े गए। इसका जवाब अधिकारियों के पास नहीं है। कई कॉलोनी ऐसी हैं, जहां महज एक या दो प्लॉटों को ही अधिग्रहित किया गया है। कहीं-कहीं जमीन के आगे के हिस्से को अधिग्रहित कर पीछे की जमीन को मुक्त कर दिया गया। इसके चलते इसमें मिलीभगत होना तय माना जा रहा है।

दूसरे शहरों तक नहीं छोड़ा पीछा

सूत्रों ने बताया कि कि सेक्टर 13 योजना में कुछ ऐसी जमीनों पर निशान लगाकर अधिग्रहण करने की कार्रवाई की गई, जिनके खातेदार बाहर रहते थे। ऐसी जमीनों पर निशान लगने के बाद भू माफिया पता करते-करते उनके असल ठिकानों पर जिले से बाहर भी जा पहुंचे और उनसे जमीनों का सौदा औने-पौने भावों में कर लिया। बाद में अधिकारियों से सांठ-गांठ कर जमीनों पर मालिकाना हक बताते हुए जमीनों को अधिग्रहण से मुक्त कराकर यहां प्लाटिंग की गई। ऐसे प्लॉट यहां महंगे दामों पर बेचे गए।

केस नंबर - 1

सेवर कलां निवासी ...... का कहना है कि हमारे पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा था। वह भी इस योजना में अधिग्रहण कर लिया। इसके लिए इधर-उधर खूब चक्कर लगाए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अधिकारियों की मनमर्जी के चलते आसपास की जमीन को छोड़कर महज हमारा की प्लॉट अधिग्रहित किया गया। इसका अभी तक मुआवजा भी नहीं मिला है। मनमर्जी के चलते बीच में से जगह ले ली हैं। अन्य जगहों को छोड़ दिया है। अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा हमारे परिवार को भुगतना पड़ रहा है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।

केस नंबर - 2

सेवर कलां के पास रहने वाले ...बताते हैं कि सेक्टर-13 योजना में कॉलोनी के बीचोंबीच कुछ हिस्से को अधिग्रहित किया है, जबकि अन्य को छोड़ दिया है। इससे हम परेशान हैं। कई मर्तबा इसको लेकर अधिकारियों के पास गुहार लगाई है, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा है। भूमाफियाओं की सांठगांठ के चलते इसमें नियम दरकिनार हुए हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। योजना के लिए इकतरफा जमीन लेना तो समझ में आता है, लेकिन इसमें जहां से मन हुआ वहां निशान लगा दिए गए। इसके चलते कई लोगों की खेती की जमीन छिन गई और वह सड़क पर आ गए।


इधर, नगर सुधार न्यास पर तालाबंदी करने का लिया निर्णय

भरतपुर. गांव झीलरा में राजवीर सिंह की आवास पर बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि अब सात गांवों की बैठक रविवार को रखी जाएगी। झीलरा, अनाह, बरसो का नगला, विजयनगर, मालीपुरा, श्रीनगर, सेवर के किसान इस बैठक में आएंगे। इसमें प्रशासन के खिलाफ निर्णय लिया जाएगा। अगर आवश्यकता पड़ती है तो नगर सुधार न्यास पर तालाबंदी, कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया जाएगा। अगर प्रशासन नहीं मानता है तो सेक्टर नंबर 13 की आवासीय स्कीम के नाम पर जिन खेतों का अधिग्रहण किया गया है, उनकी जुताई की जाएगी। बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता गिरधारी तिवारी, पूर्व पार्षद समुंदर सिंह, पूर्व पार्षद व नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष इंद्रजीत भारद्वाज, पार्षद सुरेश धर्मपुरा, राजवीर बरसो, सौरभ मेहता, पार्षद श्यामसुंदर गौड़, भंवरसिंह, बच्चू शर्मा, निरंजनलाल, शिवचरण, ओमप्रकाश सैनी, नाथुलाल, दुर्गाप्रसाद शर्मा, रणधीर सिंह ठाकुर, राजवीर सिंह, दिनेशचंद, प्रताप सिंह, सुनील कुमार, जयप्रकाश, सतीश, बनयसिंह आदि उपस्थित रहे।

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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