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मेयर से लेकर नियमन शाखा के हरेक कर्मचारी के हस्ताक्षरों का होगा मिलान

-अब एफएसएल से जांच में हो सकती है प्रकरण में और भी देरी, पहले से नगर निगम कर रहा आंतरिक जांच में विलंब

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मेयर से लेकर नियमन शाखा के हरेक कर्मचारी के हस्ताक्षरों का होगा मिलान

मेयर से लेकर नियमन शाखा के हरेक कर्मचारी के हस्ताक्षरों का होगा मिलान

भरतपुर. नगर निगम के नाम से फर्जी पट्टा जारी करने का मामला अब नियम व जांच की प्रक्रिया की उलझन में फंसता दिख रहा है। भले ही एसपी की ओर से गठित कमेटी ने प्रकरण में जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब समय पर जांच पूरी कर अन्य आरोपियों के नाम सामने लाना किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि अभी फर्जी पट्टा जिनके नाम से जारी हुआ है वे और दो मुख्य आरोपियों के ही नाम सामने आए हैं। इसके अलावा भी फर्जीवाड़े के इस गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों के नाम सामने आने बाकी है। हालांकि नगर निगम के इतिहास में सबसे बड़े इस फर्जी पट्टा घोटाले को लेकर अब तक की निगम की जांच को लेकर कार्यशैली सवालों के घेरे में बनी हुई है। बताते हैं कि रसूख के दबाव में अब एफआइआर तक दर्ज कराने में देरी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि एकमात्र राजस्थान पत्रिका की ओर से 28 जुलाई 2022 को सबसे पहले फर्जी पट्टा प्रकरण का खुलासा किया गया था। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने एफआइआर दर्ज कराई थी और पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
एसपी श्याम सिंह की ओर से गठित कमेटी ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। एफएसएल से जांच कराने के लिए पुलिस ने नगर निगम के मेयर से लेकर नियमन शाखा से जुड़े हरेक अधिकारी व कर्मचारी को नोटिस भेजकर निर्धारित समय में आकर हस्ताक्षरों का नमूना देने को कहा है। ताकि यह नमूना एफएसएल को भेजकर हस्ताक्षरों का मिलान कराया जा सके। वहीं नगर निगम की ओर से भले ही अवकाश के दिन में पट्टों का रिकॉर्ड खंगाले जाने को लेकर झूठी वाहवाही लूटी जा रही है, लेकिन इतना करने के बाद भी सब रजिस्ट्रार कार्यालय को कोई पत्र नहीं भेजा जा सकता है। बताते हैं कि यह सबकुछ फर्जी पट्टा प्रकरण को दबाकर आमजन के सामने झूठी वाहवाही लूटने के लिए किया जा रहा है।

लोग पूछ रहे पट्टा असली या फर्जी, अफसर परेशान

नगर निगम में हर दिन लोग प्राप्त हुए पट्टों के असली या फर्जी होने को लेकर परेशान नजर आ रहे हैं। आए दिन लोग कार्यालय पहुंच कर अधिकारियों से पूछ रहे हैं कि उनका पट्टा फर्जी है या असली, लेकिन अभी तक खुद अधिकारी भी पशोपोश में है। वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि अभी तक पट्टों का ऑनलाइन नहीं होना भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। इस प्रकरण की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से कराई जाए तो सच का खुलासा हो सकता है। क्योंकि इससे पहले भी नगर निगम के तमाम घोटालों को लेकर एसीबी से जांच की मांग की जाती रही है, परंतु रसूख के दबाव में जांच नहीं कराई जाती।

इनका कहना है

-फर्जी पट्टा प्रकरण में भाजपा के सभी पार्षदों को बुलाकर बात की है। पार्टी आंदोलन की रणनीति बना रही है। बाकी इस प्रकरण में मेयर भी दोषी है। यह सब फर्जीवाड़ा नगर निगम प्रशासन व मेयर के सानिध्य में ही किया गया है। अब दो प्रमुख आरोपियों का ही नाम उजागर इतिश्री कर रहे हैं। अगर निष्पक्ष जांच कराई जाए तो और भी नामों का खुलासा होना तय है। हम सभी पार्षदों को साथ लेकर विरोध करेंगे।

डॉ. शैलेष सिंह

जिलाध्यक्ष, भाजपा