जाट आरक्षण: अब केंद्रीय ओबीसी आयोग की टीम करेगी गांवों का निरीक्षण

-टीम रिपोर्ट बनाने के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मंत्रालय को करेगा सिफारिश, जहां से लोकसभा को भेजा जाएगा प्रस्ताव

By: Meghshyam Parashar

Updated: 20 Feb 2021, 11:52 AM IST

भरतपुर. भरतपुर-धौलपुर के जाटों को आरक्षण देने का मामले को लेकर अब कार्रवाई आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि पिछले लंबे समय से आरक्षण को लेकर आंदोलन कर रहे समाज की मेहनत भी रंग लाने वाली है। अब इस माह या मार्च माह के प्रथम सप्ताह में केंद्रीय ओबीसी आयोग की एक टीम भरतपुर व धौलपुर के कुछ गांवों का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाएगी। ताकि राजस्थान राज्य ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर निरीक्षण कर दूसरी फाइनल रिपोर्ट तैयार कर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मंत्रालय को सिफारिश कर भेजी जा सके। इसके बाद मंत्रालय की ओर से प्रस्ताव बनाकर लोकसभा को भेजा जाएगा। ताकि उसे पारित कराया जा सके। जानकारी के अनुसार राजस्थान में 33 जिले हैं इनमें 31 जिलों के जाटों को केंद्र में आरक्षण का लाभ प्राप्त है लेकिन भरतपुर-धौलपुर जिलों के जाटों को केंद्र में आरक्षण से वंचित रखा गया है। इसके अलावा इन दोनों जिलों के जाटों को 2015 में राज्य में भी आरक्षण से वंचित कर दिया था, लेकिन सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर वापस 2017 में इन दोनों जिलों के जाटों को राज्य में आरक्षण का लाभ प्राप्त हुआ और उसके बाद अब केंद्र सरकार में आरक्षण की मांग जा रही है। अब बताते हैं कि भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारी सांसद डॉ. मनोज राजौरिया के नेतृत्व में दो बार केंद्रीय ओबीसी आयोग से मिल चुके हैं। अध्यक्ष भगवानदास साहनी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल आगामी कुछ दिनों में दोनों जिलों में आकर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट बनाएगा। हालांकि इससे पहले राजस्थान राज्य ओबीसी आयोग भी इस तरह का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाकर केंद्र सरकार को भेज चुका है।

मुकदमा वापसी को लेकर भी हो चुका निर्णय

भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से की गई तीन सूत्री मांगों में राज्य सरकार दोनों जिलों के जाटों को केंद्र में आरक्षण के लिए अपनी सिफारिश चि_ी पहले ही लिख चुकी है। संघर्ष समिति और सरकार के बीच वार्ता हुई थी। इसमें विगत 2017 में आरक्षण आंदोलन के दौरान लगे 28 मुकदमों में से आठ मुकदमें वापस हो चुके हैं। मुकदमों के संदर्भ में गृह सचिव रामनिवास मेहता, पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने बताया था कि 20 मुकदमों के लिए भी अनुसंधानकर्ता अधिकारियों को बुलाकर शीघ्र ही निस्तारण किया जा सकेगा।

बेरोजगार युवाओं की मांग भी अब तक अधूरी

बताते हैं कि वर्ष 2013 में सरकारी विभागों में भर्ती निकाली गई थी। बाद यह भर्ती प्रक्रिया 2016 तक चल रही, लेकिन उस समय आरक्षण का मामला अटक गया। इससे बेरोजगार युवाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सका। ऐसे में सैकड़ों युवा पिछले लंबे समय से इस मामले को लेकर भी आंदोल कर रहे हैं।

-केंद्रीय ओबीसी आयोग की एक टीम दोनों जिलों में आएगी। इसके लिए प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलकर दो बार मिल चुके हैं। टीम की रिपोर्ट के बाद संबंधित मंत्रालय लोकसभा को प्रस्ताव भेजेगा।
डॉ. मनोज राजौरिया
सांसद धौलपुर-करौली

Meghshyam Parashar Bureau Incharge
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