
इंडियाज गॉट टेलेंट में सुनाई दे रही भरतपुरिया की बांसुरी की धुन...
भरतपुर. बचपन में मां सुशीला तोमर जब हारमोनियम पर सुर लगातीं तो मेरा रोम-रोम खिल उठता। ग्यारह साल की उम्र में उनके साथ पड़ोस के मंदिर में भजन गाना शुरू कर दिया। भरतपुर के बिहारी जी मंदिर में मेरे पहले गुरु राकेश बंसीवालाजी से मुलाकात हुई। वे चाय की दुकान चलाते हैं और मंदिर में उनकी बांसुरी की मधुर ध्वनि आज भी गूंजती है। जब उनसे थोड़ा बहुत सीखा तो कथाओं, भजनों और मंदिरों में बांसुरी बजाने लगा। स्टेज परफॉर्मेंस भरतपुर के टाउन हॉल में दी तो ऑडियंस की तालियां मिलीं। इसके बाद मुझे सभी बच्चों की तरह इंजीनियरिंग करने जयपुर भेज दिया गया। यहां मैंने बीटेक में एडमिशन लिया, लेकिन मन नहीं लगा तो कॉलेज जाना कम कर दिया। मन में बांसुरी की धुन रोजाना गूंजा करती, तो यहां मैंने संदीप सोनी सर से फ्लूट सीखना शुरू कर दिया। इस दौरान कॉलेज में दोस्तों ने काफी मदद की। वे अपनी पॉकेट मनी से मेरा फाइन भर दिया करते थे। बीटेक में ट्रेनिंग के दौरान मैंने घरवालों से झूठ बोलकर दिल्ली में रवि प्रसन्ना सर के यहां ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया। दो महीने की इंजीनियरिंग ट्रेनिंग में मैंने फ्लूट की ट्रेनिंग ले ली।
इसके बाद शुरू हुआ असली संघर्ष। मैं गुरुजी पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के गुरुकुल में एडमिशन के लिए एक साल तक 1300 किलोमीटर का सफर तय करता रहा। गुरुजी इतनी आसानी से किसी को एडमिशन नहीं देते, लेकिन वहां से जो मुझे नोट्स मिलते उसे मैं भरतपुर में आकर रोजाना छह से आठ घंटे तक पूरा करता। पंडित जी ने मेरी लग्न को देखा तो खुश हुए। मैंने उन्हें कहा कि यह मेरी इंजीनियरिंग का आखिरी साल है, यदि मुझे आपका सानिध्य नहीं मिला तो घरवालों की मर्जी से इंजीनियरिंग की जॉब करनी पड़ेगी। जब मैं एक साल तक संघर्ष करता रहा तो उस दौरान स्वामी विवेकानंद की किताबें पढ़ता। उनकी इस बात से प्रेरणा मिलती रही कि 'जिस दिन जीवन में कठिनाई न आए, उस दिन समझना कि गलत रास्ते पर हो।
म्यूजीशियंस से मिली स्टेंडिंग ओवेशन और प्यार
काफी संघर्ष के बाद मुझे वहां एडमिशन मिल गया। जहां गुरुजी के शिष्यों ने काफी कुछ सिखाया। गुरुजी ने मुझे उड़ीसा के गुरुकुल में भेज दिया। वहां मैंने छह महीने तक ट्रेनिंग ली। फिर पंडितजी ने मुझे मुंबई वापस बुला लिया। यहां 2011 से 2015 तक रहा और गुरुजी से बांसुरी सीखने का मेरा सपना पूरा हुआ। गुरुजी हमेशा कहते हैं कि म्यूजिक ही हमारा धर्म है। इसे पूजा की तरह करना है। गुरुजी से सीखने के बाद मैंने इंटरनेशनल शोज में परफॉर्म करना शुरू कर दिया। कपिल शर्मा के शो में भी परफॉर्म करने का मौका मिला। दिल है हिंदुस्तानी 2 शो के जरिए काफी पहचान मिली है। शो में 'संकल्प केथवाल प्रोजेक्ट एंड मनुराज राजपूत को काफी सराहना मिल रही है। परफॉर्मेंस से म्यूजीशियन प्रीतम, बादशाह, सुनिधि काफी प्रभावित हुए हैं और स्टेंडिंग ओवेशन भी मिला है। शो में टॉप 12 में पहुंच चुके हैं।
भरतपुर पहुंचने पर मनुराज का किया स्वागत
इंडियाज गॉट टेलेंट की टॉप-टेन प्रतिभाओं में शुमार भरतपुर के बांसुरी वादक मनुराज राजपूत एवं जयपुर के दिव्यांश का बुधवार को भरतपुर पहुंचने पर स्वागत हुआ। भरतपुर पहुंचकर मनुराज को दादी का दुलार मिला तो मां ने भी मनुराज के लिए मनौतियां मांगी। इस दौरान शहर में निकले दोनों प्रतिभागियों का शहरवासियों ने स्वागत किया। भरतपुर के मनुराज एवं जयपुर के दिव्यांग कचोटिया बांसुरी एवं बीट बॉक्सिंग के संगम के जरिए इंडिया गॉट टेलेंट में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। एक टीवी चैनल पर आ रहे इस शो के जज भी दोनों की प्रतिभा को खूब सराह रहे हैं। बुधवार को शहर के लक्ष्मण मंदिर चौक पर दोनों कलाकारों का भरतपुरवासियों ने स्वागत किया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों के बीच रोड शो भी निकाला गया। गोपालगढ़ मोहल्ला निवासी बांसुरी वादक मनुराज ने कहा कि भरतपुरवासियों का अपना स्नेह उन्हें सदैव मिला है। इसी स्नेह की बदौलत वह इस मुकाम तक पहुंच सके हैं। रोड शो के दौरान उन्होंने भरतपुर वासियों से मनुराज एवं दिव्यांश की जोड़ी को अधिक से अधिक वोटिंग करने की अपील की। मनुराज ने कहा कि ज्यादा वोटिंग ही उन्हें अगले राउंड के लिए सिलेक्ट कराएगी। शो में जज गायक बादशाह, अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी एवं किरन खेर तथा गीतकार मनोज मुंतशिर हैं। मनुराज एवं दिव्यांश बुधवार को घर पहुंचे। यहां मनुराज की नानी एवं मां सुशीला तोमर ने दोनों को तिलक लगाकर शुभकामनाएं दीं। मनुराज की मां ने कहा कि भगवान ने मनुराज को कोई भाई नहीं दिया था, लेकिन छोटे भाई के रूप में दिव्यांश को देकर उसे अपार खुशियां दी हैं।
Published on:
31 Mar 2022 03:51 pm
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