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VIDEO…प्राइवेट हॉस्पिटलों में रही नो एंट्री, मरीज हुए इतने परेशान!

-राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में निजी अस्पताल रहे बंद

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भरतपुर. इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन राजस्थान के आव्हान पर जिला शाखा के डॉक्टरों ने राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में निजी अस्पताल को बंद कर विरोध जताया। इससे मरीजों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिला अध्यक्ष कमलेश शर्मा ने बताया कि पूर्व में राज्य सरकार और डॉक्टरों के बीच करीब आठ बिंदुओं पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकार उससे मुकर गई। सरकार ने डॉक्टरों पर कुठाराघात किया है। इसके विरोध में आज सभी ने अपने-अपने अस्पतालों को बंद कर सामूहिक हड़ताल शुरू की है। अस्पतालों के बंद होने के कारण मरीज काफी परेशान नजर आए। अस्पताल दिखाने पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना कर वापस लौटना पड़ा। सभी अस्पतालों पर ताले लगे हुए थे। कई गंभीर मरीज परेशान हुए और वापस लौट गए। ऐसी गंभीर हालात में कई मरीजों को सरकारी अस्पताल ले जाया गया।

अब समझिए कि इस बिल में ऐसे क्या प्रावधान हैं जिन पर विवाद हुआ

1. राइट टू हेल्थ बिल में आपातकाल में यानी इमरजेंसी के दौरान निजी अस्तालों को निशुल्क इलाज करने के लिए बाध्य किया गया है। मरीज के पास पैसे नहीं हैं तो भी उसे इलाज के लिए इनकार नहीं किया जा सकता। निजी अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि इमरजेंसी की परिभाषा और इसके दायरे को तय नहीं किया गया है। हर मरीज अपनी बीमारी को इमरजेंसी बताकर निशुल्क इलाज लेगा तो अस्पताल वाले अपने खर्चे कैसे चलाएंगे।

2. राइट टू हेल्थ बिल में राज्य और जिला स्तर पर प्राइवेट अस्पतलों के महंगे इलाज और मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्राधिकरण का गठन प्रस्तावित है। निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है कि प्राधिकरण में विषय विशेषज्ञों को शामिल करना चाहिए ताकि वे अस्पताल की परिस्थितियों को समझते हुए तकनीकी इलाज की प्रक्रिया को समझ सके। अगर विषय विशेषज्ञ नहीं होंगे तो प्राधिकरण में पदस्थ सदस्य निजी अस्पतालों को ब्लैकमेल करेंगे। इससे भ्रष्टाचार बढेगा।

3. राइट टू हेल्थ बिल में यह भी प्रावधान है कि अगर मरीज गंभीर बीमारी से ग्रसित है और उसे इलाज के लिए किसी अन्य अस्पताल में रैफर करना है तो एम्बुलेंस की व्यवस्था करना अनिवार्य है। इस नियम पर निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है कि एंबुलेंस का खर्चा कौन वहन करेगा। अगर सरकार भुगतान करेगी तो इसके लिए क्या प्रावधान है, यह स्पष्ट किया जाए।

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