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जिले में एंबुलेंस 108 बीमार, इनको चाहिए इमरजेंसी उपचार

-जिले में संचालित ज्यादातर स्थानों पर एंबुलेंस 108 के वाहन खटारा

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जिले में एंबुलेंस 108 बीमार, इनको चाहिए इमरजेंसी उपचार

जिले में एंबुलेंस 108 बीमार, इनको चाहिए इमरजेंसी उपचार

भरतपुर. जिले में आपातकालीन चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने तथा घायलों व बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाने वाली एंबुलेंस सेवा 108 पिछले काफी दिनों से बीमार चल रही है। खास बात यह है कि यह सेवा इतनी बीमार है कि सामान्य उपचार से तबियत भी ठीक नहीं होगी। इसके लिए इमरजेंसी वाला उपचार चाहिए। क्योंकि एंबलुेंस सेवा 108 उपलब्ध कराने वाली कंपनी व विभाग के अधिकारी अभी तक यह भी तय नहीं कर सके हैं कि आखिर किस 108 एंबुलेंस को खटारा घोषित किया जाएगा। हकीकत यह है कि अभी तक विभाग व कंपनी के बीच संबंधित 108 एंबुलेंसों को खटारा घोषित करने का मामला भी नहीं सुलझा है। हाल में ही डहरा मोड, चिकसाना, अटलबंध, रूपवास में नई एंबुलेंस आई हैं। जिले में कुल 22 एंबुलेंस हैं। बयाना, उच्चैन, रूपवास, सेवर, डीग, कुम्हेर, भुसावर, रारह में 108 एंबुलेंस को खटारा घोषित किया जाना है, लेकिन मामला कंपनी व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के बीच उलझा हुआ है।

नदबई: साढ़े चार लाख किमी चलने के बाद घोषित नहीं की खटारा

नदबई. थाने पर खड़ी 108 एंबुलेंस सभी दावों की पोल खोल रही है। सीएचसी पर संचालित 108 एंबुलेंस वर्तमान में प्रशासन की अनदेखी के कारण दम तोड़ते हुए लडखड़़ाते कदमों से सफ र करने को मजबूर है। आलम यह है कि 2013 मॉडल की यह एंबुलेंस अपने निर्धारित किलोमीटरों से भी लाखों किलोमीटर अतिरिक्त चल चुकी है। जबकि एंबुलेंस की बॉडी पूरी तरह डैमेज तथा कंडम दिखाई देती है। वैसे तो सरकार की ओर से 10 वर्ष या तीन लाख किलोमीटर के निर्धारित किलोमीटर चलने के बाद एंबुलेंस को कंडम मानने का प्रावधान है, लेकिन नदबई सीएससी पर 2013 से संचालित यह एंबुलेंस साढ़े चार लाख किलोमीटर का सफ र तय करने के बावजूद भी प्रशासन की अनदेखी के कारण उखड़ती हुई सांसों के बाबजूद भी लगातार रूप से सफ र करने को मजबूर है।

भुसावर: धक्का देकर करानी पड़ती है स्टार्ट

भुसावर. चार सीएससी पर केवल दो एंबुलेंस वैर एवं हलैना पर कार्यरत हैं। जो आने वाले दिन किसी भी पुराने गंभीर रोग से पीडि़त मरीज की तरह बनी हुई है। भुसावर छोकरवाड़ा दोनों कस्बा स्टेट हाइवे से जुड़े हुए हैं। एक्सीडेंटल मरीज अधिकांशत यहीं से रैफ र होते हैं जिनको इन खटारा एंबुलेंसों का पहले इंतजार आने का रहता है जैसे तैसे आ जाती हैं फि र इनमें से तो ऑक्सीजन समाप्त रहती है तो फिर साफ सफ ाई और चिकित्सा व्यवस्था और तो और मरीज गंभीर रहता है तो भी इनको ज्यादा स्पीड से चलाने पर नई खराबी का खतरा बना रहता है। कई बार एंबुलेंस को धक्का मारकर स्टार्ट करना पड़ता है। भुसावर कस्बे की एम्बुलेंस को खराब हुए पांच महीने हो गए है पर अभी तक भुसावर अस्पताल को कोई एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई है।

उच्चैन: रोगियों को निजी खर्च से जाना पड़ता है अस्पताल

उच्चैन. कहने को कस्बा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर दो एम्बुलेंस खड़ी हुई है लेकिन रोगियों को आपातकालीन समय में निजी खर्च पर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। 104 एंबुलेंस अवधि पार के अलावा खराब होने के कारण अस्पताल परिसर में पिछवाड़े में खड़ी हुई है जबकि गत माह पूर्व विधायक कोटे से प्राप्त एम्बुलेंस अस्पताल के दरवाजे पर खड़ी है, लेकिन अस्पताल प्रशासन विधायक कोटे से मिली एम्बुलेंस को संचालित करने के लिए चालक और डीजल खर्च के लिए बजट नहीं होने का हवाला देते आ रहा है। जिसका सीधा सीधा असर रोगियों पर पड़ रहा है। चिकित्सा प्रभारी डॉ. योगेश मीणा का कहना है विधायक कोटे से प्राप्त एम्बुलेंस संचालित करने के लिए पूर्व में कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन विभाग की ओर से उनको संचालित करने के लिए कोई गाइड लाइन प्राप्त नहीं हुई है।

कुम्हेर: एक एंबुलेंस के भरोसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

कुम्हेर. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्हेर पर वर्तमान में एक एंबुलेंस है। सीएचसी कुम्हेर के चिकित्सा प्रभारी अधिकारी डॉ. जितेंद्र ने बताया कि अस्पताल के लिए वर्तमान में एक बेस एंबुलेंस है जिसे आवश्यकता पडऩे पर काम में लिया जाता है। किसी भी इमरजेंसी के लिए 104 और 108 एंबुलेंस को कॉल करके बुला लिया जाता है। कोरोना काल में बेस एम्बुलेंस को ही काम मे लिया गया था।

बयाना: मरम्मत के बाद भी नहीं सुधरी एंबुलेंस की तबियत

बयान. वर्ष 2009 में सीएचसी को 108 एम्बुलेंस मिली थी तब से लगातार यह एम्बुलेंस चल रही है। यह एम्बुलेंस करीब दो लाख किलोमीटर से अधिक चल गई है काफ ी समय से बार-बार खराब होती है तथा 108 एम्बुलेंस का एनजीओ के माध्यम से संचालन कराया जाता है। कई बार इस 108 एम्बुलेंस के खराब होने के बाद मरम्मत कराई गई मगर अब भी इस 108 एम्बुलेंस की स्थिति सही नहीं है।

जुरहरा: 10 दिन से खराब, मरीज परेशान

कामां. जीवनदायिनी कहीं जाने वाली 108 एंबुलेंस पिछले करीब 10 दिनों से खराब पड़ी हुई है जिसके चलते मरीजों को राज्य सरकार की एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पा रही है जिसको लेकर मरीज परेशान होते नजर आ रहे हैं ऐसा ही नजारा कामा उपखंड क्षेत्र के कस्बा जुरहरा में देखने को मिला। कस्बा जुरहरा की 108 एंबुलेंस पिछले करीब 10 दिन से खराब होने के कारण जयपुर मरम्मत के लिए गई हुई है जिसके चलते जुरहरा में एंबुलेंस नहीं होने के कारण मरीजों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उनको आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।