भरतपुर/गोवर्धन. जिस ब्रजरज को मस्तक पर लगा लेने भर से मुक्ति का भी मुक्त होना मान लिया जाता है, उसी ब्रजरज में एक बार फिर से संतों को लोटने का अवसर मिला तो नहीं चूके। ऐसा लगा कि मानो वे ब्रज की धूल से स्नान कर रहे हों। गिरिराज महाराज की तलहटी के राधाकुंड में 500 सौ साल पुरानी परंपरा में श्रीपाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी के आश्रित संतों, वैष्णवजनों, वेदपाठी विद्यार्थियों ने धूलोट महोत्सव मनाया। ब्रज रसिकों ने कहा है कि मुक्ति कहे गोपाल से, मेरी मुक्ति बताए, ब्रजरज उड़ मस्तक लगे, तो मुक्ति मुक्त है…. यही भाव के यहां के गौड़ीय संतों में देखने को मिला। हर कोई मोहे ब्रज की धूल बनादे लाडि़ली श्रीराधे के भाव में नजर आया। पारंपरिक धूलोट महोत्स के बीच प्रात: बेला में श्रीपाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी के गद्दीनशीन पीठाधीश्वर महंत केशव दास महाराज के निर्देशन में गायन वादन के साथ कुंड की परिक्रमा की लगाई। परिक्रमा मार्ग के 18 मंदिरों में राधा-कृष्ण की लीलाओं का गायन व महिमा कीर्तन किया। तदुपरांत रात्रि बेला में धूलोट से पहले राधा-गोपीनाथ से कीर्तन कर ब्रज की रज में लोट लगाने की अनुमति मांगी। राधाकुंड के तट स्थित मंदिर परिसर में ब्रज के कोने-कोने से आई रज को गौरांग संस्कृत महाविद्यालय के वेदपाठी विद्यार्थियों ने बिछा दिया। देखते ही देखते ढोल, मृंदग, झांझ-मजीरा की धुन पर साधु-संत व भक्तों ने ब्रज की रज में लोट लगाना शुरू कर दिया। ब्रज की रज में ईश्वर के वास रूपी भाव में एक-दूसरे को रज लगाकर खूब होली खेली। परिक्रमा मार्ग व राधाकुंड का तट का पूरा माहौल ब्रजरजमय हो गया। धूलोट उत्सव में भाग लेने आये त्रिपुरा, आसाम, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, पंजाब, दिल्ली आदि प्रांतों के साथ-साथ विदेशी भक्तो ने भी मस्तक पर ब्रजरज लगाकर अपने को धन्य किया। धूलोट की रज को प्रसादी भाव में वितरित किया गया। इस अवसर पर पीठाधीश्वर महंत केशव दास महाराज ने बताया कि स्वयं उद्धव जी ने गोपीपद के रेणु में ब्रजरज की महिमा का वर्णन करते हुए रज के बीच लता-पताका और घास के रूप में जन्म लेने की इच्छा प्रकट की है। ब्रहमाजी ने स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साक्षी ब्रज रस की महिमा का गुणगान किया है। यह ब्रजरज भगवान राधा-कृष्ण की लीलाओं की साक्षी है। 538 वर्ष पहले श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु ने राधाकुंड में ब्रज की रज की महिमा का गुणगान किया है, तभी से उनके अनुयायी ब्रजरज के धूलोट को मनाते हैं। यहां सभी भक्त ठाकुर जी के भाव में लोटपोट हुए हैं। आचार्य राधाबल्लभ दास ने बताया कि ब्रजरज में ईश्वरीय तत्व है, इसकी महिमा का बखान करना मुश्किल है। अद्वैत दास ने बताया कि जिस ब्रजरज में योगीराज भगवान श्रीकृष्ण, उनकी अल्हादिनी शक्ति राधारानी, गोप-गोपिकाओं ने विचरण किया हो, तो वह अपने आप अलग ही महत्व रखती है। धूलोट के लिए गिरिराज जी की तलहटी के स्पर्श की रज के साथ-साथ कुंडों के भीतर से निकाली गई रज को मिलाया गया। इस अवसर पर निताई दास, सुवल दास सरदार, सखी चरन दास, पुजारी नित्यानंद दास, दीनबंधु दास कोतवाल, राजकिशोर, छैलबिहारी दास, अनाथबंधु दास, लोकनाथ दास, कृष्ण दास आदि थे।