18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पैदल बॉर्डर तक पहुंच रहे स्टूडेंट, यूनिवर्सिटी ने बनाए बंकर

- 'मैं झुकेगा नहीं की तर्ज पर यूक्रेन तैयार

3 min read
Google source verification
पैदल बॉर्डर तक पहुंच रहे स्टूडेंट, यूनिवर्सिटी ने बनाए बंकर

पैदल बॉर्डर तक पहुंच रहे स्टूडेंट, यूनिवर्सिटी ने बनाए बंकर

भरतपुर . रूसी ताकत को नजरअंदाज कर यूक्रेन मैं झुकेगा नहीं की तर्ज पर जंग के लिए पहले से ही तैयार था। यही वजह है कि रूसी सेना के बॉर्डर तक पहुंचने से पहले ही यूक्रेन की यूनिवर्सिटीज ने छात्रों की हिफाजत के लिए बंकर और बम शेल्टर बना दिए, ताकि हमले के वक्त छात्र इनमें छिप सकें। हालांकि लगातार हमलों के बाद वहां फंसे छात्र चिंता के बीच वतन लौटने की जद्दोजहद कर रहे हैं। शुक्रवार को भी यूक्रेन के लबीफ शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्र पोलेंड के बॉर्डर तक पैदल चलकर पहुंचे। अपनों की फिक्र के लिए भारतीय परिजन लगातार उनसे संपर्क में हैं और हर पल की खबर के लिए टीवी पर नजरें गढ़ी हुई हैं।
रूसी हमले से महज दो दिन पहले भरतपुर पहुंचे अनिरुद्ध नगर निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि आधे फरवरी माह में ही वहां हालात खराब हो चले थे। प्रमोद कुमार पुत्र राजेश कुमार लबीफ की यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। प्रमोद हाल ही में 21 फरवरी को यूक्रेन से लौटे हैं। उन्होंने 'पत्रिकाÓ को बताया कि वर्ष 2014 में रूस ने क्रीमिया पर अटेक किया था। इसके बाद से ही यूक्रेन के लोग हमला झेलने को तैयार थे। पिछले तीन साल से रूसी सेनाएं लगातार बॉर्डर तक आ-जा रही थीं। रूस ने इससे पहले यूक्रेन को नाटो में नहीं जाने के लिए चेताया भी था, लेकिन यूक्रेन इस पर राजी नहीं। इसी का नतीजा है कि यूके्रन अब रसिया के हमले झेल रहा है।

हालात बिगड़े तो गाइड लाइन जारी

छात्र प्रमोद कुमार ने बताया कि आधे फरवरी माह से ही वहां हालात पेनिक हो चले थे। इसके चलते यूक्रेन सरकार ने दावा किया है कि लोग कतई घबराएं नहीं। यूक्रेन के सैनिक हर तरह की लड़ाई में सक्षम हैं। हालांकि हमले को लेकर यूक्रेन में रह रहे भारतीय छात्र चिंता में डूबे थे। ज्यादातर छात्रों ने इसी दौरान वतन वापसी के लिए प्रयास शुरू कर दिए। ऑनलाइन क्लास जारी रहने के कारण राजस्थान के बहुतेरे छात्रों ने यूक्रेन को छोड़ दिया। हालांकि इस दौरान भी किराये में बढ़ोतरी हो गई थी, लेकिन ज्यादातर छात्रों को ज्यादा किराया चुकाकर वतन लौटना पड़ा, लेकिन अब भी बहुतेरे छात्र वहां फंसे हुए हैं।

यूनिवर्सिटीज ने बना लिए बंकर

युद्ध के बादल मंडराते देख यूक्रेन सरकार ने पहले ही लोगों को सावचेत कर दिया। ऐसे में यूनिवर्सिटीज ने चर्च के आसपास बंकर, बम शेल्डर आदि बनाए दिए थे, ताकि वहां छात्र छिप सकें। इसके लिए यूनिवर्सिटी ने छात्रों को बंकर्स की लोकेशन भी सेंड कर दी थी। इसके अलावा छात्रों को ज्यादा बाहर नहीं घूमने, जरूरत पर ही घर से बाहर निकलने एवं कैश पास रखने की हिदायत दी थी। साथ ही मेडिसन, खान-पान व्यवस्था एवं अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त कर लिया था।

चिंता में डूबे रहे 70 किलोमीटर

यूक्रेन के लबीफ शहर में एमबीबीएस की थर्ड ईयर की छात्रा हैदराबाद निवासी हर्षिता अन्य सहपाठियों के साथ पोलेंड बॉर्डर तक पहुंची। हर्षिता ने सहपाठी प्रमोद को बताया कि यह 70 किलोमीटर चिंता में डूबे रहे। बॉर्डर के पास तक छात्र टैक्सी के जरिए, लेकिन इससे पहले वह काफी दूर पैदल चलकर पहुंचे। इस बीच उनकी सांसें अटकी रहीं। साथ ही परिजनों के फोन भी उन्हें चिंता में डाले रहे।

यह बन रही बड़ी वजह

क्रीमिया पर हमले के बाद से ही रूस की नजर यूक्रेन पर थी। रूस नहीं चाहता था कि यूक्रेन नाटो में शामिल हो। बताते हैं कि रूस ने इसके लिए यूक्रेन को लोन देने की भी बात कही थी। रूस का मानना है कि यूक्रेन के नाटो में जाने से अमेरिका पॉवरफुल होगा। इसको लेकर रूस लगातार यूक्रेन पर दवाब बना रहा था। रूस का सपना सोवियत यूनियन को वापस लाना है। इस वजूद की लड़ाई में अब दोनों देश आमने-सामने हैं। रूस और यूक्रेन के कल्चर और भाषा में भी बड़ा फर्क है। इसके अलावा रूस की जनसंख्या करीब साढ़े चौदह करोड़ है तो यूक्रेन की महज साढ़े चार करोड़ के आसपास जनसंख्या है।