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कमाई कर यूआइटी नहीं चुका रही निगम की चार साल की उधारी

कर्ज तले रौबदार भरतपुर यूआइटी, शहरी सरकार पहले से ही झेल रही आर्थिक तंगी की मार, अब नगर सुधार न्यास का भी किनारा

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कमाई कर यूआइटी नहीं चुका रही निगम की चार साल की उधारी

कमाई कर यूआइटी नहीं चुका रही निगम की चार साल की उधारी

भरतपुर. आर्थिक तंगी का सामना कर रही शहरी सरकार से अब नगर सुधार न्यास ने भी किनारा कर लिया है। चार साल से ग्रांट की रकम चुकाने में यूआइटी बैकफुट पर है। इससे नगर निगम के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शहर में किसी कॉलोनी का विकास करने के बाद नीलामी या अन्य स्त्रोतों से प्राप्त आय में से यूआइटी की ओर से नगर निगम को 15 प्रतिशत राशि देनी होती है, लेकिन पिछले चार साल से यूआइटी की ओर से किसी प्रकार की कोई राशि नहीं मिली है।
वर्ष 2018-19 तक पूरा हिसाब हो चुका है। तत्कालीन समय में यूआइटी की ओर से 12 करोड़ 67 लाख रुपए नगर निगम को देने थे। इसके बाद कुछ रास्तों के विकास सहित अन्य कार्य यूआइटी की ओर से कराए गए तो बाकी एक करोड़ 38 लाख रुपए नगर निगम को दिए गए थे। इसके बाद से लेकर अभी तक किसी प्रकार की ग्रांट यूआइटी की ओर से नहीं दी गई है। नगर निगम की ओर से यूआइटी को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला है। ग्रांट नहीं मिलने के कारण विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि राशि पिछले चार साल से नहीं मिली है।
पूर्व में भी हो चुका है राशि पर विवाद
यूआइटी की आय में से 15 प्रतिशत राशि नगर निगम को देने का नियम है। क्योंकि कोई भी कॉलोनी या स्कीम विकसित करने के बाद उसकी देखरेख के साथ रोशनी व सफाई की व्यवस्था नगर निगम ही करती है। पूर्व में भी तत्कालीन नगर निगम आयुक्त शिवचरण मीना के समय इसको लेकर विवाद हुआ था।
आरक्षित दर की 15 फीसदी की राशि
अगर यूआईटी स्कीम या कोई भी कॉलोनी भूखंड विक्रय करती है तो उसकी आरक्षित दर निर्धारित करती है। उदाहरण के तौर पर एक भूखंड की आरक्षित दर आठ हजार रुपए निर्धारित की गई। अब अगर वह भूखंड 12 हजार रुपए प्रति वर्गगज बिकता है तो उससे कोई मतलब नहीं है। बल्कि नगर निगम को जो ग्रांट मिलेगी, वह आरक्षित दर आठ हजार रुपए प्रति वर्गगज की 15 प्रतिशत ही मिलेगी।
बार-बार लिखे यूआइटी को पत्र
नगर निगम की ओर से जून 2022 एवं पिछले महीने छह अप्रेल को भी पत्र यूआइटी को पत्र लिखा गया था, लेकिन अभी तक ग्रांट नहीं मिली है। आंकड़ों की बात करें वर्ष 2018-19 में 12 करोड़ 67 लाख रुपए बकाया चल रहे थे, लेकिन तब तक का फाइनल हिसाब हो गया था।
इनका कहना...
वर्ष 2018-19 तक पूरा हिसाब हो चुका है। इसके बाद से किसी प्रकार की ग्रांट यूआईटी की ओर से नहीं मिली है। इस संबंध में पत्र भी लिखा गया है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला है।
-अभिजीत कुमार, महापौर, नगर निगम
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निगम के अधिकारियों के साथ बैठक करके चर्चा करेंगे कि कितनी राशि बकाया है और कितनी राशि बनती है।
- कमलराम मीणा, सचिव, यूआईटी
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