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बीजेपी में घमासान…पोस्टर तक पहुंचीं वसुंधरा, खेमा भी सक्रिय

- चुनावी आहट के साथ बढ़ी सक्रियता

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बीजेपी में घमासान...पोस्टर तक पहुंचीं वसुंधरा, खेमा भी सक्रिय

बीजेपी में घमासान...पोस्टर तक पहुंचीं वसुंधरा, खेमा भी सक्रिय

भरतपुर . कांग्रेस के गढ़ बन रहे भरतपुर संभाग में अब भाजपा सेंध लगाने की पूरी जुगत में है। इसकी नसीहत प्रदेश से मिल भी चुकी है। अगले साल होने वाले विस चुनाव से पहले भाजपा को एकसूत्र में बंधने को कहा है। यही वजह है कि पूरे प्रदेश में अब तक उपजते रहे पोस्टर विवाद के बीच अब पूर्वमुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा के पोस्टरों में छपने लग गईहैं। राजे के पोस्टरों में आने के बाद वसुंधरा खेम भी बैठकों में नजर आ रहा है।
भरतपुर में सोमवार को हुई जिला कार्यसमिति की बैठक से पहले प्रदेश स्तर से पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं को साफ निर्देश दिए गए कि बैठक में एकता दिखनी चाहिए। ऐसे में वसुंधरा खेमे के कुछ कार्यकर्ता और पदाधिकारी बैठक में लंबे समय बाद नजर आए, जो अक्सर ऐसी बैठकों से बचते रहे थे। जिले में अब तक भाजपा दो खेमों में नजर आती है। इनमें एक खेमा वसुंधरा राजे का माना जाता है, जबकि दूसरे खेमे का ताल्लुक प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां से बताया जाता है। अब तक इन दो धड़ों में नजर आ रहे कुछ कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी अलग-थलग से थे, लेकिन प्रदेश की नसीहत के बाद कुछ एक जाजम पर आने लगे हैं। हालांकि यह पूरी तरह अभी भी एक साथ नजर नहीं आ रहे हैं।

बैठक में यह रहे मौजूद

अक्सर बैठकों से दूरी रखने वाले पदाधिकारियों में इस बार पूर्व विधायक अनीता सिंह, पूर्व सांसद बहादुर सिंह, पूर्व विधायक ग्यारसाराम कोली एवं बच्चू सिंह बंशीवाल नजर आए, जो काफी दिनों से ऐसी बैठकों से दूरी बनाए हुए थे। इसके अलावा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ऋषि बंसल, विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रह चुकीं ऋतु बनावत, पूर्व विधायक दीपा सिंह, जिलाप्रमुख जगत सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष गिरधारी तिवाड़ी एवं डॉ. जितेन्द्र सिंह फौजदार बैठक में नजर नहीं आए। ऐसे में इनकी गैरमौजूदगी भी कार्यकर्ताओं में चर्चा का विषय बनी रही।

और फिसल गई जुबान

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में सोमवार को भाषण के दौरान प्रदेश मंत्री महेन्द्र जाटव की जुबान फिसल गई। वह भाषण देते समय वरिष्ठ कार्यकर्ता शब्द का उच्चारण करते समय '... कार्यकर्ताÓ बोल गए। ऐसे में काफी देर तक कार्यकर्ता चुटकी लेते रहे। जिलाध्यक्ष ने उन्हें इसके लिए टोका तो उन्होंने सफाई दी कि मेरी जुबान फिसल गई थी। वैसे मैं बोलना वरिष्ठ कार्यकर्ता ही चाह रहा था।