भरतपुर. कच्चा परकोटा नियमन संघर्ष समिति भरतपुर की ओर से गांधी पार्क स्थित चौपाटी के सामने जगराम धाकड की अध्यक्षता में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया। इसके बाद बाजार में रैली निकालकर जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर प्रशासन से मांग की गई कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के निर्देश 20 सितम्बर की अनुपालना न करते हुए शहर के कच्चे परकोटे पर स्थित संरक्षित स्मारक दिल्ली दरबाजा, अनाह गेट फ तेह बुर्ज, सूरजपोल बुर्ज के प्रशिक्षित क्षेत्र तथा मछली मौहल्ला, सहयोग नगर के डंडा क्षेत्र को जलडूब बताकर नगर निगम भरतपुर की एम्पावर्ड कमेटी के द्वारा निरस्त की गई पटटे की पत्रावलियों को बहाल कराकर पट्टे दिलाने की मांग की।
धरने को सम्बोधित करते हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष इन्द्रजीत भारद्वाज ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से कच्चे डंडे स्थित संरक्षित स्मारकों से 100 मीटर की दूरी में 16 जून 1992 से पूर्व बने मकानों को पट्टा देने की स्वीकृति देने के बावजूद भी उक्त स्थानों के पट्टे के आवेदनों को नगर निगम भरतपुर द्वारा निरस्त करने की कार्यवाही की जा रही है, जो निन्दनीय है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार गोवर्धन गेट के समीप मछली मौहल्ला एवं सहयोग नगर के लोग जो कच्चे डन्डे पर निवास करते हैं उक्त खसरा नम्बर की भूमि को जलडूब में शामिल कर सैकडों पट्टे की पत्रावलियों को निरस्त किया जा रहा है जबकि कच्चा डंडा कभी भी जलडूब क्षेत्र में नहीं रहा है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन पर दोहरे मापदण्ड अपनाने का आरोप लगाते कहा कि जो कभी कच्चा डंडा जलडूब नहीं रहा उसको जलडूब बताकर पट्टों को रोका जा रहा है। वहीं दूसरी ओर डंडे के खसरे नम्बर में शामिल मैदानी क्षेत्र की भूमि पर पट्टे देने का काम किया जा रहा है। भारद्वाज ने कहा कि राजस्थान सरकार भरतपुर शहर के कच्चे डंडे पर पट्टा देना चाहती है लेकिन नगर निगम पटटे देने के साथ साथ कच्चे डंडे की अड़चनों को दूर करने में लापरवाही बरत रही है जिसके चलते नीम दरवाजा स्थित मिटटी की बुर्ज पर रहने वाले लोगों की पत्रावलियों का मौके का सर्वे आज तक नहीं कराया गया है।