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वृंदावन कुंभ में महंत व महामंडलेश्वरों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख, खनन बंद कराने का किया आग्रह

डीग क्षेत्र के गांव पसोपा में कनकाचल व आदिबद्री पर्वत पर हो रहे खनन के विरोध में चल रहे धरने के 59 वे दिन सोमवार को पसोपा, अलीपुर, ककराला, कोलडी, उदयपुरी, पालका आदि गांवों में महापड़ाव के समितियां का गठन किया गया।

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वृंदावन कुंभ में महंत व महामंडलेश्वरों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख, खनन बंद कराने का किया आग्रह

वृंदावन कुंभ में महंत व महामंडलेश्वरों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख, खनन बंद कराने का किया आग्रह

भरतपुर. डीग क्षेत्र के गांव पसोपा में कनकाचल व आदिबद्री पर्वत पर हो रहे खनन के विरोध में चल रहे धरने के 59 वे दिन सोमवार को पसोपा, अलीपुर, ककराला, कोलडी, उदयपुरी, पालका आदि गांवों में महापड़ाव के समितियां का गठन किया गया। वहीं आदिबद्री मंदिर पर भी दर्शनार्थियों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर पर्वत पर हो रहे खनन के विरोध में प्रदर्शन किया।

मान मंदिर के अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री व संत ब्रजदास के नेतृत्व में साधुओं की एक टोली ने वृंदावन कुंभ में स्थित सभी खालसा, अखाड़ा व शिविरों में व्यक्तिगत रूप से जाकर सभी महंत, महामंडलेश्वर, साधु व मठाधीशों से भेंट की एवं उनको ब्रज के पर्वतों पर चल खनन के विरोध में प्रस्तावित आगामी महापड़ाव की जानकारी दी। शास्त्री ने बताया है कि वृंदावन कुंभ में पधारे लगभग सभी श्रीमहंत, महामंडलेश्वरों एवं उपस्थित जगतगुरु ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम पत्र पर हस्ताक्षर कर उनसे अविलंब ब्रज के परम आराध्य पर्वत आदिबद्री व कनकाचल को खननमुक्त करने का आग्रह किया है।
महामंडलेश्वर श्रीसांवरिया बाबा ने कहा है कि ब्रजभूमि केवल वैष्णव संप्रदाय की नहीं अपितु हमारे सनातन धर्म के सभी मठ, मंदिरों व सम्प्रदायों के लिए अत्यंत पूजनीय है एवं उस ब्रजभूमि के पौराणिक चिन्ह व कृष्णकालीन पर्वतों का विनाश भारत का साधु समाज किसी भी स्थिति में सहन नहीं कर सकता है। चित्रकूट धाम के महंत श्रीसंतदास ने कहा कि अधिकांश महात्माओं को अभी ब्रज के पर्वतो पर हो रही इस विनाश लीला के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। उन्होंने कहा कि वे हरिद्वार कुंभ में पहुंचकर वह इस विषय को सभी महात्माओं साधु संतों के समक्ष रखेंगे। वही महामंडलेश्वर ने कहा की आगामी महापड़ाव में वृंदावन कुंभ के सभी वैष्णव आचार्य, वैष्णव अखाड़े के महामंडलेश्वर तो सम्मिलित होंगे ही लेकिन इसकी पूरी विस्तृत चर्चा अब हरिद्वार कुम्भ में भी होगी। जहां पर आगे की रणनीति पर विचार होगा। इस अवसर पर संत ब्रजदास, साध्वी आराधना, साध्वी गौरी, साध्वी ब्रज वाला, ब्रजकिशोर, कृष्ण दास, महातीर्थ बाबा आदि ने भी अपने विचार रखे ।