भरतपुर. अनुकंपा नियुक्ति के लिए चक्कर काट रहा युवक परेशान होकर सोमवार को पानी की टंकी पर जा चढ़ा। समझाइश पर दो घंटे बाद युवक के नीचे उतरने पर प्रशासन ने चैन की सांस ली।
डीग के गांव पैंगोर निवासी युवक पिछले तीन साल से भी ज्यादा से अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर सीआरपीएफ, जिला प्रशासन और सरकार के चक्कर काट काटकर फुटबॉल बना हुआ है। लेकिन उसे अनुकंपा नियुक्ति पर नौकरी नहीं मिल पा रही। जिम्मेदारों की संवदेनहीनता से तंग आकर सोमवार को एक बार फिर युवक राधेश्याम करीब 10 बजे भरतपुर शहर की नई मंडी स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गया। युवक साथ में पेट्रोल से भरी बोतल भी लेकर गया। सूचना मिलते ही तुरंत पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसडीआरएफ ने तुरंत टंकी के चारों तरफ नेट बांध दिया। मौके पर पहुंचे सीओ सिटी नगेंद्र कुमार युवक को देर तक समझाइश कर नीचे आने के लिए बोलते रहे लेकिन युवक नहीं उतरा। आखिर में अधिकारियों की ओर से अनुकंपा नियुक्ति के लिए उच्चस्तरीय अधिकारियों से बात करने और उचित प्रयास के आश्वासन पर दो घंटे बाद 12 युवक टंकी से नीचे उतर आया। सीओ सिटी नगेन्द्र कुमार ने बताया कि युवक के मामले में पहले से ही अधिकारियों की वार्ता चल रही है। एक बार फिर से उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत कराया जाएगा।
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यह है मामला
राधेश्याम के पिता जवाहर सिंह सीआरपीएफ की 114 बटालियन में तैनात थे। रांची से नीमच में फील्ड ऑपरेशन में जाते समय करीब साढ़े तीन साल पहले उनका देहांत हो गया। युवक राधेश्याम पिछले साढ़े तीन साल से अनुकम्पा नियुक्ति के लिए दर-दर की ठोकर खा रहा है। लेकिन नौकरी नहीं मिली। राधेश्याम ने बताया कि उसकी मां को 14 हजार रुपए पेंशन मिलती है। इनमें से 10 हजार रुपए नौकरी के प्रयास में मंत्री-सांसदों के चक्कर काटने पर खर्च हो जाते हैं। इतने बड़े परिवार में महज 4 हजार रुपए से महीने का गुजारा नहीं हो पाता है। युवक जून में भी टंकी पर चढ़ गया था। उससे पहले युवक इच्छा मृत्यु की मांग करते हुए राष्ट्रपति को पत्र लिख चुका है।