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जनाना अस्पताल या रैन बसेरा!

जनाना अस्पताल के हालात, अस्पताल में बिना पंखे के सो रहे मरीजों के परिजन, इधर रैन बसेरे में लटका ताला..

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जनाना अस्पताल या रैन बसेरा!

जनाना अस्पताल या रैन बसेरा!


ज्ञान प्रकाश शर्मा
भरतपुर. जनाना अस्पताल में मरीजों के परिजनों को रात निकालना मुश्किल हो रहा है। सोने के नाम पर कहीं पंखे ही नहीं हैं। तो कहीं एक ही पंखे के नीचे 10-15 जने रात बिताने को मजबूर हैं। दूसरी ओर,नगर निगम की ओर से बनाए गए रैन बसेरे सो पीश बने हुए हैं, क्योंकि उनके गेट पर ताला लटका हुआ है। ऐसे में मरीजों के परिजन गंदगी और मच्छरों के बीच रात निकालने को मजबूर हैं।
यहां बात हो रही हैं जनाना अस्पताल की, जहां पर मरीजों के परिजनों को रात बिताने की भी सुविधा नहीं है। यहां रात को करीब 12 से एक बजे के बीच पत्रिका टीम ने हाल जानने के प्रयास किए तो स्थिति कुछ अलग ही नजर आई। अस्पताल के प्रथम मंजिल पर जागकर रात बिता रहे रूपवास निवासी मनीष चौधरी का कहना है कि भाई एक तो पंखा नहीं है, दूसरा यहां पर चोरी के डर की वजह से सभी जने एक साथ सो भी नहीं पाते हैं। ऐसे में एक-दो सोते हैं तो एक जने को जागना पड़ता है। शनिवार दिन में भी एक मोबाइल चोरी कर भाग रहे युवक को बड़ी मुश्किल से पकडक़र पुलिस के हवाले किया था।
उन्ही से सामने पीआईसीयू वार्ड के सामने बिना पंखे के रात बिता रही नोह बछामदी निवासी रेनू ने बताया कि एक सो रहा है तो वह जाग रही है। दिन में हुई मोबाइल चोरी को देखा था, इसलिए सामान चोरी नहीं हो जाए, इसके लिए नींद नहीं आ रही है। थोड़ा आगे चले तो ऑपरेशन थिएटर के आगे रात बिता रहीं श्रेया का कहना है कि क्या करें, जहां जगह मिल जाती है। वहीं पर रात बिता लेते हैं। यहां पर पंखों का अभाव है, लेकिन मच्छरों इतने हैं कि सोने ही नहीं देते हैं।
12.15 बजे लगा मिला रैन बसेरा
यहां जनाना अस्पताल के पास रहने के लिए तो रैन बसेरा है, लेकिन उसपर 12.15 बजे ही ताला लग जाता है। ऐसे में कोई आवाज भी लगाए तो कोई बोलता भी नहीं है। ऐसे में मरीजों के परिजन रात को अस्पताल परिसर में ही निकालना पड़ता है। जबकि होना तो यह चाहिए था कि रैन बसेरा पूरी रात खुले रहने चाहिए। चाहे जब कोई भी रहने के लिए आ सकता है।
12.30 बजे रक्त के लिए तड़प रही गर्भवती
यहां 12 बजे आई गर्भवती महिला रक्त के लिए तड़प रही थी। कामां से आई गर्भवती सुमन के परिजनों का कहना है कि भाई गरीब आदमी हैं। गर्भवती के साथ में पड़ोसी आए हैं, तो रक्त की व्यवस्था कहां से होगी। इधर-उधर भटक रही गर्भवती महिला दर्द से करां रही थी, लेकिन कोई नहीं सुन रहा था। बाद में देखा कि पत्रकार आए हैं तो कम्पाउंडर सहित अन्य स्टाफ भी उसकी मदद को आगे आ गया और उसे वार्ड में ले गए।
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