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डाक्यूमेंट्री फिल्म के हीरो 175 साल का गंगाराम कुंवारा ही मर गया

जिला मुख्यालय से 7 किमी दूर ग्राम बावामोहतरा में 175 वर्षीय मगरमच्छ गंगाराम की मौत हो जाने पर पूरा गांव शोक में डूब गया। गांव के हर ग्रामीण की आंख में आंसू नजर आया, क्योंकि मगरमच्छ से सभी की कुछ न कुछ यादें जुड़ी हुई थी।

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Bemetara patrika

डाक्यूमेंट्री फिल्म के हीरो 175 साल का गंगाराम कुंवारा ही मर गया

संजय दुबे/बेमेतरा@Patrika. ''ए या सुनेस का, हमर गांव के गंगाराम हा परलोक सिधार दिस। अब हमन ओखर साथ कबहू नई मिल सकय। हमर गांव के देवता जइसन गंगाराम के आखरी दरसन करे बर चल हमन तको तालाब जाबो।ÓÓ सुबह-सुबह बावामोहतरा में ग्रामीण महिलाओं ने एक-दूसरे को फफक-फफककर गंगाराम (मगरमच्छ) की मृत्यु हो जाने की खबर सुनाई। गांव के पुरुष व बच्चे-बच्चे तक भी यह खबर तेजी से फैली। इसके साथ ही तालाब में ग्रामीणों का हुजुम उमड़ पड़ा।
जिला मुख्यालय से 7 किमी दूर ग्राम बावामोहतरा में 175 वर्षीय मगरमच्छ गंगाराम की मौत हो जाने पर पूरा गांव शोक में डूब गया। गांव के हर ग्रामीण की आंख में आंसू नजर आया, क्योंकि मगरमच्छ से सभी की कुछ न कुछ यादें जुड़ी हुई थी। ग्रामीणों को ऐसा लग रहा था मानों कोई जानवर नहीं, कोई अपना उन्हें छोड़कर चला गया हो।

ग्रामीणों ने मंगलवार को सुबह 10 बजे पानी में उफले देखा
गांव को पहचान दिलाने वाले मगरमच्छ गंगाराम को ग्रामीणों ने मंगलवार को सुबह 10 बजे पानी में उफले देखा। जिसके बाद ग्रामीणों ने करीब जाकर देखा तो मगरमच्छ की मौत हो चुकी थी। जिसके बाद मगरमच्छ का अंतिम दर्शन के लिए हजारों ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।@Patrika केवल बावामोहतरा ही नहीं ग्राम ढारा, भोईनाभाठा, बहेरा व बेमेतरा समेत अनेक गांव के लोग तालाब पहुंच गए। गांव में ट्रैक्टर को सजा-धजा कर मगरमच्छ की शवयात्रा निकाली गई, जिसमें लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। महिलाओं ने छूकर उनसे आशीर्वाद लिया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ही गंगाराम को दफन कर उसका स्मारक बनाकर उसकी याद को जिंदा रखेंगे।

गंगाराम पर बनी है डाक्यूमेंट्री फिल्में

ग्रामीणों ने बताया कि गंगाराम को वे गांव के सदस्य की तरह ही मानते रहे हैं। गंगाराम लोगों से इतना घुला-मिला था कि गांव का बच्चा भी उससे नहीं डरता था। @Patrika बुजुर्ग बसावन सिन्हा ने बताया कि मगरमच्छ ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। गंगाराम पर दिल्ली व रायपुर के कई कलाकारों ने डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाया है।

मगरमच्छ ने किसी को नहीं पहुंचाया नुकसान
बावामोहतरा के पुराने तालाब में 175 साल से रहने वाले मगरमच्छ ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। तालाब में नहाते समय यदि लोग मगरमच्छ से टकरा भी जाए तो वह स्वयं हट जाता था। @Patrika मगरमच्छ के इसी सीधेपन की वजह से ग्रामीण उसे प्यार से गंगाराम कहकर पुकारते थे।

दाल-भात को भी खा लेता था मगरमच्छ
ग्रामीणों ने बताया कि तालाब में मछलियां अधिक है, जो गंगाराम का चारा हुआ करता था, लेकिन तालाब से बाहर आकर उसे गोबर खाते हुए भी लोगों ने देखा है। @Patrika यही नहीं गांव के लोगों ने उसे दाल-भात भी खिलाया है। इसी तरह के कई किस्से गांव वालों की जुबान पर है।

गंगाराम को भगवान की तरह मानते थे लोग
सरपंच मोहन साहू ने कहा कि गंगाराम (मगरमच्छ) गांव की पहचान थे। गंगाराम की वजह से ही लोग बावामोहतरा को मगरमच्छ वाला बावामोहतरा बताते थे। @Patrika इस गांव से गंगाराम का 175 साल से नाता है। ग्राम ढारा के बीरसिंग दास बंजारे ने बताया कि लोग मगरमच्छ को भगवान की तरह मानते थे।