आरोपियों ने दुकान का इंटीरियर, ब्रांड प्रमोशन, एमबीबीएस डॉक्टर के साथ ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, दवाइयों का स्टॉक और कर्मचारियों की व्यवस्था कंपनी द्वारा किए जाने का भरोसा दिलाया। झांसे में आकर पीडि़त ने 27 अक्टूबर 2024 को फ्रेंचाइजी ले ली। इसके बाद आरोपियों ने फ्रेंचाइजी फीस, इंटीरियर, मार्केटिंग, दवाइयों के स्टॉक और डॉक्टर-पैथोलॉजी सुविधा के नाम पर अलग-अलग किस्तों में रकम ली। कुल मिलाकर करीब 26 लाख रुपए वसूल लिए गए। जब न तो वादे पूरे हुए और न ही पैसे लौटाए गए, तब पीडि़त ने पुलिस की शरण ली।