भिलाई@Patrika. 4 अप्रैल की सुबह साढ़े 10 बजे 24 जवानों को लेकर इंस्पेक्टर गोपाल कटगांव की ओर बन रहे पुलिया में चल रहे निर्माण कार्य को सुरक्षा देने निकले ही थे कि 10 मिनट में जोरदार धमाकों और फायरिंग की आवाज आई। उस वक्त हम सीओबी में ही थे और तुरंत ही मैसेज आया कि डोमिनेशन पार्टी पर हमला हो चुका है। हम बेकअप पार्टी लेकर बिना देर किए निकले और कैंप से 2 सौ मीटर ही पहुंचे थे कि हमारी पार्टी पर भी अंधाधून गोलिया बरसने लगी और आईईडी लगातार ब्लॉस्ट होने लगे। किसी तरह हमारी टीम उस फायरिंग के बीच से दौड़ते हुए निकली और वहां मोर्चा संभाले जवानों को बेकअप दिया। वह मंजर कुछ अलग ही था। पहले हमें एक जवान के घायल होने की खबर मिली। किसी तरह उसे वहां से बाहर निकाला तो पता चला कि तीन और जवान शहीद हो गए।जब हमारी कार्रवाई से माओवादी पीछे हटने लगे तो मेरी टीम उनके पीछे दौड़ी और उसी बीच एक गोली मेरी बाई जांघ के आर-पार हो गई फिर भी मैं उनके पीछे भागा। माहला में हुई नक्सली मुठभेड़ की यह आंखों देखी बीएसएफ के 114 बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट गोबू कुमार ने पत्रिका से शेयर की। रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल रायपुर में सोमवार को उनसे हुई मुलाकात में उन्होंने दो घंटे चली इस मुठभेड़ में अपने जवानों के जज्बे और उनके हौसलों के किस्से भी सुनाए कि किस तरह गोली लगने के बाद भी वे मोर्चे पर डटे रहे।