
दाक्षी साहू@भिलाई. देशभर में एचआईवी के हाई रिस्क जोन में आ चुके छत्तीसगढ़ के लिए एक और चौंकाने वाली खबर है। यहां एक दो नहीं बल्कि 18 हजार से ज्यादा महिलाएं जिस्मफरोशी के धंधे में लिप्त है। हालात यह हैं कि मध्य भारत में छत्तीसगढ़ जिस्मफरोसी के धंधे के लिए सबसे सेफ जोन माना जाने लगा है। मेट्रो सिटी की तर्ज पर एचआईवी के हाई रिस्क जोन के रूप में पहले से ही चिन्हित रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में जिस्मफरोशी का धंधा तेजी से फल फूल रहा है।
इसका खुलासा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की स्टेट वाइस एंड टायपोलॉजी वाइस कवरेज ऑफ की रिस्क गु्रप अंडर द प्रोग्राम की वार्षिक रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 18 हजार 314 फिमेल सेक्स वर्कर एचआईवी प्रोग्राम के दायरे में चिन्हित किए गए हैं। राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी लगातार इन फिमेल सेक्स वर्कर को ट्रेक कर रही है। ताकि इन्हें और इनके संपर्क में आने वाले लोगों को एचआईवी संक्रमण से बचाया जा सके।
कुल एचआईवी पॉजीटिव मरीजों में 37 फीसदी महिलाएं
एचआईवी फैलने के चार प्रमुख कारण में से एक प्रमुख कारण असुरक्षित यौन संबंध है। राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी के अनुसार प्रदेश में लगभग 19 हजार 400 एचआईवी पॉजीटिव मरीज रजिस्टर्ड हैं। कुल मरीज में 37 फीसदी महिलाएं हैं। ऐसे में 18 हजार से ज्यादा फिमेल सेक्स वर्कर का खुलेआम जिस्मफरोशी में लिप्त होने से एक बड़े तबके के एचआईवी की गिरफ्त में आने की संभावनाएं काफी बढ़ गई है। असुरिक्षत यौन संबंध से एचआईवी संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा 16 से 35 साल वर्ग समूह के युवाओं को हैं।
यह भी है रिपोर्ट में
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में छत्त्तीसगढ़ के 50 हजार ट्रक ड्रायवरों को भी एचआईवी संक्रमण के हाई रिस्क गु्रप में रखा गया है। 2015-16 के रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रक ड्रायवर के अलावा 2,740 एमएसएम (मैन हू हैव सेक्स विद मैन), 2,860 इंजेक्टेड ड्रग यूजर और 545 ट्रांस जेंडर्स एचआईवी के हाई रिस्क गु्रप के रूप में चिन्हित किए गए हैं। वर्तमान में इनकी संख्या दोगुनी होने की संभावना जताई गई है। प्रदेश में रायपुर के बाद दुर्ग-भिलाई में एचआईवी के सबसे ज्यादा लगभग 4000 संक्रमित मरीज मिले हैं। इन दोनों ही शहरों में लगातार सेक्स के बड़े रैकेट के सामने आ रहे हैं।
अतिरिक्त परियोजना संचालक, राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी डॉ. एसके बिंझवार ने बताया कि फिमेल और मेल सेक्स वर्कर के लिए 36 गैर सरकारी संगठन छत्तीसगढ़ एड्स कंट्रोल सोसाइटी के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। ये सभी एनजीओ फिमेल, मेल सेक्स वर्कर, ट्रक ड्रायवर, ड्रग यूजर्स और ट्रांस जेंडर्स को ट्रेक कर उन्हें एचआईवी संक्रमण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इसके अलावा जांच, परामर्श, सुरक्षा के सारे संसाधन भी समय-समय पर उपलब्ध कराएं जा रहे हैं। ताकि हाई रिस्क समूह में आने से इन्हें बचाया जा सके। फिमेल सेक्स वर्कर को समाज की मूल धारा में लौटाने के लिए भी एनजीओ कार्य कर रही है।
Published on:
12 Oct 2017 04:30 pm
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