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15 साल पहले रेलमंत्री ने भिलाई को संकट से उबारा, आज फिर वैसी ही चुनौती मुंहबाएं खड़ी है जब रेल मंत्री आ रहे हमारे शहर

भिलाई इस्पात संयंत्र बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था। कर्मचारियों को तनख्वाह देने पैसे नहीं थे और प्रबंधन को अपना मकान बेचना पड़ा था।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Nov 13, 2017

BSP SAIL

भिलाई. आज से पंद्रह साल पहले भी भिलाई इस्पात संयंत्र बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था। कर्मचारियों को तनख्वाह देने पैसे नहीं थे और प्रबंधन को अपना मकान बेचना पड़ा था। तब 4 फरवरी २००२ को भिलाई दौर पर आए तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने रेलपांत का ऑर्डर सीधे 4.13 से बढ़ाकर 6.5 लाख टन कर बीएसपी को संकट से उबरने में मदद की थी। इतना ही नहीं उन्होंने भिलाई स्टील प्लांंट के साथ रेलपांत आपूर्ति का एक्सक्लूजिव एग्रीमेंट भी किया था।

ग्लोबल टेंडर जारी कर दिया
आज फिर वैसी ही चुनौतियां प्रबंधन के सामने मुंहबाएं खड़ी है। इस बार समस्या ऑर्डर की नहीं है, बीएसपी की ओर से समय पर आपूर्ति की है। रेलवे की ओर से ऑर्डर भरपूर है, 8 लाख से बढ़ाकर 11.45 लाख टन रेलपांत की मांग रेलवे ने बीएसपी से की है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों से जूझ रहा हमारा संयंत्र आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। यही वजह है कि रेलवे ने ७ लाख टन रेलपांत का ग्लोबल टेंडर जारी कर दिया है।

आज भिलाई में रहेंगे रेल मंत्री
इससे बीएसपी को तगड़ा झटका लगा है। रेल मंत्री पीयूष गोयल 13 नवंबर सोमवार को भिलाई आ रहे हैं। रेल मंत्री आईसीएसआई भिलाई चैप्टर की ओर से आयोजित कार्यक्रम कॉन्क्लेव ऑन स्टार्टअप इंडिया में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। हालांकि गोयल बीएसपी नहीं जाएंगे, लेकिन 15 साल बाद और संकट के दौर में रेलमंत्री के अपने शहर में आने से भिलाई बिरादरी की उम्मीदें बढ़
गई है।

56 साल से रेलवे को कर रही पटरी की सप्लाई
27 अक्टूबर 1960- रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल का उद्घाटन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था तब से बीएसपी रेलवे का रेलपांत की आपूर्ति करते आ रहा है।
26.34 मिलियन टन रेल पटरी बन चुका है बीएसपी अब तक।
11.76 बार पूरी पृथ्वी को लपेटा जा सकता है अब तक बीएसपी की बनाई पटरी से।
20 मिलियन टन भारतीय रेलवे को ही आपूर्ति की गई है।
56 सालों में बीएसपी को रेलवे को एकमात्र आपूर्तिकर्ता रहा है।
4,७०, 4०७ किलोमीटर लंबी रेल पटरी का निर्माण कर चुका है।
20 लाख टन सालाना रेलपांत बनाने में सक्षम हो जाएगा यूनिवर्सल रेल मिल में उत्पादन शुरू होने के बाद।

खूब चला रेल है तो सेल का नारा
नीतीश ने 6.5 लाख टन रेलपांत का ऑर्डर दिया, इसके बाद तो भिलाई बिरादरी में खुशी की लहर उठ गई थी। रेल है तो सेल है और सेल है तो बीएसपी का नारा शुरू हो गया। रेलवे की मांग को पूरा करने कर्मियों में जोश भरने तत्कालीन अधिशासी निदेशक बीएमके वाजपेयी ने क्रॉप कार्यशाला आयोजित कर संयंत्र के 30 हजार से भी अधिक कर्मचारी-अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग दी थी।

रेलवे के हर मापंदड पर खरा उतरा है बीएसपी
बीएसपी ने न केवल अपनी रेलपंात की लंबाई बढ़ाई बल्कि क्वालिटी में भी काफी सुधार कर रेलवे की स्पेसिफिक डिमांड की पूर्ति की। इसके लिए अलग से लांग रेल कांप्लेक्स बनाया जहां विश्वस्तरीय चुनिंदा रेलपांत निर्माता कंपनियों की ती तरह नान डिस्ट्रक्टिव एवं अत्याधुनिक टेस्टिंग सुविधा है।

रेलपांतों की बारीकी से जांच करने के लिए अल्ट्रासोनिक एवं एडी करंट टेस्टिंग की जाती है। पहले जहां रेलपांत में हाइड्रोजन की मात्रा 2.5 पीपीएम से भी ज्यादा हुआ करता था, उसे रेलवे की डिमांड पर ही 1.5 पीपीएम बल्कि उससे भी नीचे ले आया। खासतौर परआरएच डि-गैसर लगाया गया।

रेल-सेल का विशेष करार बरकरार रहे
बीते वित्तीय वर्ष बीएसपी ने रेलवे का करीब ८ लाख टन रेलपांत ऑर्डर की पूर्ति कर दी थी। मौजूदा वित्तीय वर्ष में ११.़४५ लाख टन का ऑर्डर है। यूआरएम की स्थापना के बाद रेलपांत क्षमता २० लाख टन हो चुकी है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों की वजह से अभी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं हो पा रहा है। कठिनाइयां दूर होते ही बीएसपी, रेलवे की मांग पूरी करने में सक्षम हो जाएगा। कर्मी चाहे हैं रेल-सेल का विशेष करार बरकरार रहना चाहिए । 56 साल से रेलवे को कर रहे पटरी की सप्लाई।

जीवनदायक साबित हुआ था नीतीश का ऑर्डर
2001-02 में बीएसपी मंदी की मार झेल रहा था। उस समय भी खूब अफवाह थी कि अब रेलवेे निजी क्षेत्रों से रेलपांत खरीदेगा। मगर बीएसपी के प्रबंध निदेशक बिनोद कुमार सिंह ने वर्ष 2002-03 के लिए 6.5 लाख टन रेलपांत का बड़ा ऑडर हासिल कर लिया था।

मंदी के उस दौर में यह न सिर्फ भिलाई बल्कि समूचे सेल के लिए संजीवनी साबित हुई। रेलवे की डिमांड पूरी करने 52 टीमें बनाई गई। मेरठ से फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन लाई गई और बीएसपी ने अपने आंतरिक संसाधनों से दो महीने के रिकॉर्ड समय में नया रेल फिनिशिंग कांप्लेक्स तैयार कर निर्धारित समय-सीमा में रेलवे की डिमांड पूरी कर दी।