
दुर्ग . भिलाई-दुर्ग विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) में हुए ठेके के दौरान घोटाले से दोषमुक्त हुए 17 लोगों पर फिर हाईकोर्ट में प्रकरण चलेगा। जिला न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए शासन की अपील को सुनवाई के लिए हाईकोर्ट बिलासपुर ने मंजूर कर लिया है। 24 वर्ष पहले अविभाजित मध्यप्रदेश शासनकाल में साडा के 11 विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। 17 साल तक मुकदमा चला विशेष न्यायालय में।
17 नवंबर 2016 को विशेष न्यायाधीश सत्येन्द्र साहू ने फैसले में कहा है कि प्रकरण में भ्रष्टाचार करना और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाकर शासन को क्षति पहुंचाने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं है। केवल दो संस्थाओं के निर्माण कार्य के दस्तावेज से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता अभियुक्तों ने षडयंत्र कर भ्रष्टाचार किया है। एसीबी ने पूरी जांच अध:मन स्थिति में की है, जिससे समुचित साक्ष्य संग्रहित नहीं किए जा सके। विचारण के दौरान भी समुचित साक्ष्य अभिलेख में लाने का प्रयास नहीं किया। संदेह का लाभ देकर अभियुक्तगणों को दोषमुक्त किया जाता है।
जिस अपराध को एसीबी रायपुर ने जांच पूर्ण कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था। वह अपराध संख्या १४६ -१९९६ एसीबी थाना भोपाल में जिंदा है। यह खुलासा उस समय हुआ जब बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने न्यायालय के निर्देश पर एसीबी थाना के जरायम का अवलोकन किया। जिसमें प्रकरण की विवेचना अपूर्ण लिखी है। धारा को भी संशोधित कर १३ एक-ई के स्थान पर १३ एक डी लिखा गया है।
ये ठेकेदार जिन पर आरोप लगा
विद्यारतन भसीन(अब विधायक) चतुर्भुज राठी, कमलेश चंद्राकर, जीवन लाल जैन, लेखराज मेघानी, मुरली राठी, महेश परघनिया, महेश,लक्ष्मण व अर्जुनचंद्र दास। दो ठेकेदार महेश व लक्ष्मण की मौत गई है।
9 लाख के काम के दिए 13 करोड़
हुडको योजना के तहत ११ विकास कार्यों के लिए ११ अलग-अलग टेंडर जारी किए। टेंडर लेने वाले सभी कांट्रेक्टर तत्कालीन साडा अध्यक्ष के करीबी थे। आरोप है कि चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने सीएसआर से ४५ से ५३ प्रतिशत अधिक दर पर ठेके स्वीकृत कर शासन को क्षति पहुंचाई। नौ लाख रुपए के कार्य के एवज में शासन के खजाने से १३ करोड़ का भुगतान किया।
फरिहा आमिन, विशेष लोक अभियोजक दुर्ग ने बताया कि जिला न्यायालय की विशेष अदालत में फैसला आरोपियों के पक्ष में गया। इस फैसले को हमने चुनौती देते हुए अपील का प्रस्ताव तैयार कर विधि विभाग को भेजा था। साडा मामले में अपील हाईकोर्ट में प्रस्तुत हो चुकी है। चार अन्य प्रकरणों की अपील भी जल्द हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी। चारों प्रकरणों में कार्रवाई जारी है।
हाईकोर्ट में अपील की तैयारी
१.धान घोटाला- वर्ष २००३ में छह राइस मिलर्स ने धान का ग्रेड बदलकर अनुबंध नियमों को ताक पर रख धान का उठाव किया। सभी राइस मिलर्स को दोष मुक्त है।
२. रिश्वत- २०११ में पाटन में पदस्थ लेखापाल मनहरण लाल २० हजार रिश्वत लेते पकड़ाया था।
३. सड़क घोटाला- १९९२ में सब इंजीनियर संजय रावटी ने फे कारी -परसाही सड़क निर्माण में रिश्वत लेकर सड़क कागजों मे दर्शाई थी।
४. डिप्टी कमांडेट- बीएसपी से चोरी छिपे लोहा निकालने के मामने में सीआईएसएफ के तत्कालीन डिप्टी कमांडेट अभय गुप्ता ने पवन लाखोटिया को पांच लाख रिश्वत लेकर तत्कालीन दुर्ग सांसद ताराचंद साहू के निवास स्थान भेजा था।
Published on:
23 Dec 2017 10:20 am
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