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सीएम के विधानसभा क्षेत्र पाटन में फिर गरमाएगी राजनीति, गांधी विचार यात्रा के बाद सांसद करेंगे गांधी संकल्प पदयात्रा

राजनीतिक लिहाज से जागरूक माने जाने वाला पाटन विधानसभा क्षेत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके भतीजे सांसद विजय बघेल के चुनावी प्रतिद्वंद्विता के लिए भी पूरे प्रदेश में जाना जाता है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरण के बीच यहां की राजनीति एक बार फिर गरमाने लगी है।

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सीएम के विधानसभा क्षेत्र पाटन में फिर गरमाएगी राजनीति, गांधी विचार यात्रा के बाद आज सांसद करेंगे गांधी संकल्प पदयात्रा

सीएम के विधानसभा क्षेत्र पाटन में फिर गरमाएगी राजनीति, गांधी विचार यात्रा के बाद आज सांसद करेंगे गांधी संकल्प पदयात्रा

दुर्ग@Patrika. राजनीतिक लिहाज से जागरूक माने जाने वाला पाटन विधानसभा क्षेत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghel)और उनके भतीजे सांसद विजय बघेल (MP Vijay Baghel) के चुनावी प्रतिद्वंद्विता के लिए भी पूरे प्रदेश में जाना जाता है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरण के बीच यहां की राजनीति एक बार फिर गरमाने लगी है। (CG Politics) इस बार किसी चुनावी प्रतिस्पर्धा के कारण नहीं बल्कि राजनीतिक कद बढऩे के बाद महात्मा गांधी के नाम पर यात्रा के बहाने दोनों नेताओं का अघोषित शक्तिप्रदर्शन के कारण यह क्षेत्र सुर्खियों में है। सीएम भूपेश बघेल अपने प्रदेश व्यापी गांधी विचार यात्रा (Gandhi Vichar Yatra) के तहत छह अक्टूबर को यहां पहुंचे थे। इस दौरान सीएम के आभामंडल से अलग हटकर वे न सिर्फ पाटन की गलियों में घूमें बल्कि लोगों से खुलकर मुलाकात भी की। (Bhilai Patrika news) अब सांसद विजय बघेल अपनी पार्टी की गांधी संकल्प यात्रा (Gandhi Sankalp Yatra)के तहत उन्हीं इलाकों में जाने वाले हैं, जहां सीएमा बघेल ने पदयात्रा की थी। दोनों नेता चुनावों में यहां एक दूसरे को पराजित कर चुके हैं और दोनों का यहां व्यापक जनाधार भी है। ऐसे एक ही इलाके में दोनों नेताओं की बारी-बारी पदयात्रा को अघोषित शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। सांसद बघेल गुरूवार को पाटन में समर्थकों के साथ पदयात्रा करेंगे।

यह है पदयात्रा के राजनीतिक मायने
लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद सांसद विजय बघेल का राजनीतिक कद बढ़ा है। विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद भाजपा में उन्हें स्थानीय नेता के सबसे मजबूत विकल्प के तौर देखा जा रहा है। ऐसे में छत्तीसगढिय़़ावाद के सहारे सत्तासीन सीएम भूपेश बघेल के विजयी रथ को रोकने भविष्य में सांसद विजय बघेल को सामने किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व ने इसके संकेत भी दे दिए हैं। इसी के चलते सांसद विजय बघेल की पदयात्रा सीएम के चुनाव क्षेत्र में वहीं रखी गई है, जहां 25 दिन पहले पदयात्रा की है।

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2023 के चुनाव की चर्चा अभी से
पाटन राजनीतिक जागरूकता के साथ व्यक्तित्व व योग्यता के मूल्यांकन के आधार पर जनप्रतिनिधियों के चुनाव के लिए भी जाना जाता है। इसी के चलते आजादी के बाद उस दौर में भी जब राजनीतिक दलों के खिलाफ मुकाबले के लिए प्रत्याशी नहीं मिलते थे, तब भी यहां सामाजिक नेता चुनाव जीतते रहे हैं। विधानसभा में सीएम भूपेश बघेल की जीत के महज 3 माह बाद लोकसभा में सांसद विजय बघेल की ऐतिहासिक जीत भी इसी का नतीजा है। ऐसे में अब सीएम और सांसद दोनों महत्वपूर्ण पदों पर स्थानीय और एक-दूसरे के धूर विरोधी नेताओं के होने से राजनीतिक सरगर्मी भी स्वाभाविक है। हालात यह है कि यहां वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में सीएम भूपेश बघेल और सांसद विजय बघेल के बीच चुनावी मुकाबले की भी चर्चा शुरू हो गई है।

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लोकसभा चुनाव के बाद फिर बढ़ी तल्खी
कभी एक साथ राजनीति करने वाले भूपेश और विजय के बीच राजनीतिक तल्खी नई बात नहीं है, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी से टिकट नहीं मिलने की कथित नाराजगी और भूपेश के प्रदेश की कमान संभालने के बाद दोनों नेताओं के बीच फिर से नजदीकी का अनुमान लगाया जा रहा था। अमूमन एक दूसरे के साथ कार्यक्रमों से परहेज करने वाले दोनों कई बार एकसाथ नजर भी आए, लेकिन लोकसभा चुनाव में सीएम ने जिस तरह टार्गेट कर सांसद विजय के खिलाफ दुर्ग लोकसभा में फोकस किया, उससे एक बार फिर दोनों के बीच तल्खी बढ़ गई है।

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ननि और पंचायतों के चुनावों पर भी नजर
दोनों नेताओं के अपने क्षेत्र में फोकस और अपरोक्ष रूप से शक्ति प्रदर्शन को आगामी नगरीय निकायों और त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव से जोडकऱ देखा जा रहा है। पाटन नगर पंचायत के साथ पाटन जनपद पंचायत और जिला पंचायत में इस समय भाजपा का कब्जा है। सीएम बनने के बाद इन सभी इकाइयों में जीतकर पार्टी की खोई प्रतिष्ठा को हासिल करने की चुनौती सीएम भूपेश बघेल के सामने है। वहीं लोकसभा चुनाव में पूरे जिले में जिस तरह सांसद को रिकॉर्ड मतों से जीत मिली है, उससे सांसद विजय बघेल पर भी इन इकाइयों में आधिपत्य बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है। माना जा रहा है कि दोनों नेता फिलहाल इन चुनावों को लक्ष्य बनाकर तैयारी कर रहे हैं।

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