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आज CEO के रूप में अनिर्बन लेंगे एशिया के सबसे बड़े स्टील प्लांट BSP का चार्ज, रिसर्च, प्रशासन का खासा तजुर्बा पर सामने 6 बड़ी चुनौतियां

अनिर्बन अभी तक दुर्गापुर स्टील प्लांट और इस्को स्टील प्लांट (आइएसपी) बर्नपुर दोनों इकाई की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Jun 01, 2019

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आज CEO के रूप में अनिर्बन लेंगे एशिया के सबसे बड़े स्टील प्लांट BSP का चार्ज, रिसर्च, प्रशासन का खासा तजुर्बा पर सामने 6 बड़ी चुनौतियां

भिलाई. अनिर्बन दासगुप्ता भिलाई इस्पात संयंत्र के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) होंगे। शुक्रवार को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी ने अनिर्बन की नियुक्ति आदेश जारी किए। अनिर्बन अभी तक दुर्गापुर स्टील प्लांट और इस्को स्टील प्लांट (आइएसपी) बर्नपुर दोनों इकाई की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वे आज बीएसपी का चार्ज लेंगे। इधर भिलाई बिरादरी ने BSP CEO एके रथ को भावभीना विदाई दी। पत्रिका ने सबसे पहले 28 अपै्रल के अंक में अनिर्बन के अगला सीइओ होने का खुलासा कर दिया था।

रिसर्च, प्लानिंग, प्रबंधन और प्रशासन का तर्जुबा
अनिर्बन आइआइटी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से मेटलर्जी में बी टेक हैं। उन्होंने सेल में अपनी सेवा की शुरुआत सेंटर फॉर इंजीनियरिंग एंड टेक्रालॉजी रांची से की। इसके बाद 2010 से 2017 तक सेल के दिल्ली स्थित निगमित कार्यालय में चेयरमैन सचिवालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) रहे।

यहां से उन्हें पहले आइएसपी बर्नपुर का सीइओ फिर बाद में दुर्गापुर स्टील प्लांट की दोहरी जिम्मेदारी सौंपी गई। अब सेल की सबसे बड़ी यूनिट भिलाई इस्पात संयंत्र को संभालेंगे। इस तरह अनिर्बन को रिसर्च के क्षेत्र से लेकर कॉर्पोरेट प्लानिंग, प्रबंधकीय और प्रशासकीय क्षमता का अच्छा-खासा तर्जुबा है।

लंबे कार्यकाल का मिलेगा फायदा
अनिबर्न की सेवानिवृत्ति की तारीख 2025 में हैं। यानी लगभग छह साल वे अपना योगदान दे सकेंगे। भिलाई बिरादरी के जानकार बताते हैं कि शायद अपने पूरे कार्यकाल तक भिलाई में सेवाएं न दे पाएं, क्योंकि वे 2021 में सेल चेयरमैन चौधरी की सेवानिवृत्ति के बाद सबसे प्रबल दावेदार होंगे। तो भी बीएसपी को उनके कुशल नेतृत्व का लाभ मिलेगा।

सेल में एकमात्र अफसर जो जीएम से सीधे सीइओ बने
बताया जाता है कि अनिर्बन सेल चेयरमैन चौधरी के विश्वासपात्र और निकटतम अधिकारियों में से हैं। पूरे सेल में अनिर्बन ही अब एक एकमात्र ऐसे अधिकारी हैं जो अपनी तकनीकी दक्षता, कुशल प्रबंधन और काबिलियत के बूते महाप्रबंधक से सीधे सीइओ बने हैं। यही वजह है कि चेयरमैन ने सेल की सबसे बड़ी इकाई और भविष्य की उम्मीदें भिलाई इस्पात संयंत्र की जिम्मेदारी अपने भरोसेमंद अधिकारी को सौंपा है।

अनिर्बन की महत्वपूर्ण उपलब्धियां
1. ऑटो सेक्टर के लिए हाई ग्रेड स्टील बनाने सेल और आर्सेलर मित्तल के ज्वाइंट वेंचर में अनिर्बन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
3. इस्को बर्नपुर यूनिट में नए प्रोजेक्ट को अपने कुशल नेतृत्व में स्थापित करने के बाद रनिंग स्टेज में लाया फिर अब सुचारु रूप से संचालन भी हो रहा है।
2. चेयरमैन सचिवालय में पदस्थ रहते हुए कार्पोरेट प्लानिंग में अनिर्बन का खास योगदान रहा है। इसके लिए सेल ने मैकेंजी एंड कंपनी के साथ टाइअप किया था।

अनिर्बन के सामने छह बड़ी चुनौतियां
वेतन समझौता नहीं होने व सुविधाओं में कटौती से बीएसपी कार्मिकों का मनोबल गिरा है

1. सेल का सिरमौर और अग्रणी इकाई कही जाने वाले भिलाई इस्पात संयंत्र की साख को पुन: अर्जित करना। वित्तीय वर्ष 2018-19 में बीएसपी बोकारो स्टील लिमिटेड और राउरकेला इस्पात संयंत्र से पिछड़ गया। इससे बीएसपी की प्रतिष्ठा को जबर्दस्त आंच लगी है।
2. बीएसपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारतीय रेल की रेलपांत की मांग को पूरी करना है। रेलवे ने बीते साल बीएसपी को 12 लाख टन रेलपांत का ऑर्डर दिया था, लेकिन लगभग 10 लाख टन की ही आपूर्ति कर सका। इस साल 16.50 लाख टन का ऑर्डर मिला है।
3. संयंत्र में आए दिन हो रहे हादसे पर रोक लगाना अनिर्बन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। 9 अक्टूबर 2018 की घटना के बाद से भिलाई बिरादरी सहमी हुई है। छिटपुट हादसे हर-दूसरे तीसरे दिन हो रहे हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है।
4. 18 हजार करोड़ की आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण परियोजना पूरी हो चुकी है, लेकिन नई इकाइयों में निर्धारित क्षमता के मुताबिक उत्पादन नहीं हो रहा है। आए दिन नई-नई तकनीकी दिक्कतों से प्रबंधन को जूझना पड़ रहा है। जिसका असर इस साल मुनाफे पर दिखा भी।
5. योजना के मुताबिक रावघाट से अब तक उत्खनन व लौह अयस्क की आपूर्ति भी शुरू हो जाना चाहिए थी, लेकिन परियोजना पिछड़ती जा रही है। इधर दल्लीराजहरा खदान समूह में अयस्क का भंडार खत्म हो रहा है। संयंत्र की उत्पादन क्षमता 7.5 मिलियन टन हो गई है। ऐसे में अब लौह अयस्क की खपत भी बढ़ेगी।
6. वेतन समझौता नहीं होने और बहुत सी सुविधाओं में कटौती से कार्मियों का मनोबल गिरा हुआ है। जिय कार्यसंस्कृति और चुनौतियों को अवसर में बदल लेने की क्षमता से भिलाई की पहचान थी, उसमें कहींन कहीं गिरावट आई है।