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#CG Assembly Election 2018 : हार के बाद भी भाजपा ने मनाया जश्न और बांटी थी मिठाइयां

1980के भिलाई विधानसभा चुनाव चुनाव में 11,157 वोट के साथ भाजपा को तीसरा स्थान मिला। फिर भी लोगों ने खूब जश्न मनाया था।

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जब हार के बाद भी खूब मनाया जश्न और बांटी मिठाइयां

भिलाई. पहले चुनाव प्रचार-प्रसार को लेकर प्रत्याशियों में न इतनी होड़ थी और न ही संसाधन। मार्केट, सार्वजनिक स्थलों और सड़कों पर ही कुछ बैनर और झंडे नजर आते थे। कांग्रेस की अपेक्षा हम लोगों के पास तो बिलकुल ही साधन नहीं होते थे। तब कार्यकर्ता अपने-अपने घर से पुराने पायजामा- कुर्ता और साडिय़ों को धोकर लाते थे। उसी को फाड़कर बैनर और झंडे बनाते थे। लकड़ी या टिन में कमल का एक छाप बना लेते थे और स्याही या रंग में डूबाकर उसे कपड़े पर छाप देते थे। कार्यकर्ताओं में उत्साह इतना अधिक होता था कि किसी को कुछ बोलने और बताने की जरूरत ही नहीं होती थी। सभी स्वस्फूर्त अपने-अपने क्षेत्र में प्रचार करते थे।

भाजपा ने भिलाई से विजय सिंह गुप्ता को उम्मीदवार बनाया था

वर्ष १९८० की बात है। भाजपा ने भिलाई विधानसभा से विजय सिंह गुप्ता को उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस से श्रमिक नेता रवि आर्य प्रत्याशी थे। २०,९६७ वोट पाकर कांग्रेस की जीत गई। दूसरे नंबर पर एमसीआई प्रत्याशी पी मोइत्रा थे। उन्हें १२१७७ वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर रही भाजपा को पहली बार ११,१५७ वोट मिले। पार्टी अपनी जमानत बचाने में सफल रही। इस पर हम लोगों ने मिठाइयां बांटी और खूब जश्र भी मनाया।

घर से लेकर आते थे रोटी और सब्जी
तब कार्यकर्ताओं को खिलाने-पिलाने का दौर भी नहीं था। यहां तक कि चुनाव के दिन बूथ में और बाहर पांडाल पर बैठने वाले कार्यकर्ताओं के लिए रोटी-सब्जी व चावल घर से बनाकर लाते थे। इसके लिए सभी प्रमुख कार्यकर्ताओं को संख्या के हिसाब से पांच-दस लोगों के खाने का इंतजाम की जिम्मेदारी देते थे।

आरोप-प्रत्यारोप न बाबा न
वह दौर आज की तरह आरोप-प्रत्यारोप का नहीं था। व्यक्तिगत लांछन और आरोप तो बिलकुल ही नहीं। प्रत्याशी अपनी-अपनी पार्टी की रीति-नीति और विचारधारा की प्रचार करते थे। वादे और दावे भी राष्ट्र व समाज हित के होते थे। स्टार प्रचारक भी नहीं आते थे। अच्छे बोलने वाले स्थानीय कार्यकर्ता ही मंच संभालते थे। गुलाब भारती और नर्मदा प्रसाद शुक्ल बहुत ओजस्वी भाषण देकर लोगों को रिझा लेते थे।

चाय नाश्ता भी साथ
सेक्टर-8 में घर के सामने भाजपा और थोड़ी ही दूर में राजकुमार मिश्रा के घर कांग्र्रेस का चुनाव कार्यालय था। एक दिन दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। तब मैंने मिश्रा जी से कहा कि चुनाव तो निपट जाएंगे, लेकिन हम लोग तो पड़ोसी बने रहेंगे। इसके बाद दोनों ने तय किया कि दिन मेंअपनी-अपनी पार्टी का प्रचार करेंगे, शाम को चाय, नाश्ता साथ करेंगे।