
10 वीं बोर्ड टॉपर ने दादा से किया था वादा, मैं लाऊंगी सबसे ज्यादा नंबर, अखबार में फोटो छपेगा तो फ्रेम करवाकर गिफ्ट करूंगी...
भिलाई . पिछले साल 30 मई को सुबह जब अखबार घर पहुंचा तो उसमें दसवीं के टॉपर्स की खबर छपी थी। दादाजी ने अखबार पढ़ा और मुझसे उम्मीद लगाते हुए कहा, बेटा मैं चाहता हूं कि तुम्हारी काबिलियत भी एक दिन अखबार में छपे। दादाजी (रमेशचंद सिंघल) की कही उस बात को मैंने मुस्कुराकर स्वीकार किया। दादा जी से वादा किया कि अगले साल जब मेरा फोटो भी अखबार में छपेगा, उसे मैं फ्रेमिंग कराके आपको गिफ्ट करूंगी। उस अच्छी जिद को पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत की।
आज जब रिजल्ट आया तो सबसे पहले यह खुशबखरी दादाजी को सुनाई। उनको बताया कि आपसे किया वादा पूरा कर दिया है। यह सुनकर दादाजी की आंखे डबडबा गईं। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। अपनी मेहनत पर भरोसा रखकर आगे बढऩे की यह कहानी भिलाई की वर्णिता सिंघल की है, जिसने सीबीएसई 10वीं के नतीजों में 98.8 फीसदी अंक हासिल कर प्रदेश के टॉपर्स की सूची में जगह बना ली है। वर्णिता को 500 में से 494 अंक मिले हैं। वर्णिता नवीन सिंघल की पुत्री हैं।
96 फीसदी रहा जिले के स्कूलों का रिजल्ट
सीबीएसइ ने सोमवार को 10वीं बोर्ड के नतीजे जारी किए। इसमें भिलाई के 6 छात्रों को 98 फीसदी से अधिक अंक मिले हैं। बिलासपुर रेंज के आइजी दीपांशु काबरा के पुत्र निलांश काबरा ने भी वर्णिता की तरह 98.8 फीसदी अंक हासिल किया है। इनके साथ ही तीसरे पायदान पर विक्रम वर्मा है, जिन्हें 500 में 493 व 98.60 फीसदी अंक मिले। इस साल जिले की 52 स्कूलों से 8953 विद्यार्थियों ने 10वीं की परीक्षा दी थी, जिसमें से 8333 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। जिले में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का आंकड़ा 96 फीसदी बताया गया है।
अमरीकन विवि से रिसर्च है सपना
टॉपर निलांश काबरा का कहना है कि 11वीं में पीसीएम व अर्थशास्त्र लेकर पढ़ाई करूंगा। मैं अमरीकन विवि से इंजीनियरिंग करना चाहता हूं। अपने जूनियर सार्थियों से कहना चाहता हूं कि कभी भी यह न सोचें कि दिन में 12-15 घंटे पढऩे से ऐसे अंक मिल जाएंगे। 6 से 8 घंटे ही पढ़ाई करें, लेकिन वह शेड्यूल एक दिन में छूटना नहीं चाहिए। हार्डवर्क और सेल्फ डिसिप्लीन से जरूरी है। निलांश आइजी दीपांशु काबरा के पुत्र हैं।
कामर्शियल पायलट बनने देंगे इम्तेहान
डीपीएस के ही विक्रम वर्मा ने 98.60 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है। उनका कहना है कि पढ़ाई एक तय शेड्यूल में की जाए तो सफलता तय होती है। हमारे टीचर्स और पैरेंट्स ने हमेशा मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रखा। वॉट्सएप पर चैटिंग करने में जितना समय लगता, उतना मैंने किताबों पर दिया। विक्रम के पिता विवेक वर्मा बीएसपी में एजीएम व मां नम्रता वर्मा पेशे से सिविल इंजीनियर हैं।
Published on:
07 May 2019 03:29 pm
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