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IED ब्लास्ट में दोनों पैर गंवाने वाले CRPF कोबरा कमांडो पति के लिए पत्नी ने पहनी वर्दी, आप भी जानें वायरल पोस्ट की सच्चाई

सुकमा जिले के किस्टाराम थाने के अंतगर्त नक्सल विरोधी ऑपरेशन के दौरान आईईडी की चपेट में आ गए थे। आईइडी ब्लास्ट में जवान ने अपने दोनों पैर खो दिए।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Jun 05, 2018

Central Reserve Police Force cobra commando B Ram das

IED ब्लास्ट में दोनों पैर गंवाने वाले CRPF कोबरा कमांडो पति के लिए पत्नी ने पहनी वर्दी, आप जानें वायरल पोस्ट की सच्चाई

दाक्षी साहू @भिलाई. सोशल मीडिया में इन दिनों व्हीलचेयर पर बैठे दिव्यांग युवक और सीआरपीएफ कोबरा कमांडो की वर्दी पहने उनकी पत्नी की फोटो काफी वायरल हो रही है। लोग देशभक्ति और पति-पत्नी के इस अनोखे रिश्ते को सलाम करते नहीं थक रहे हैं। जिसे देखकर पत्रिका ने वायरल पोस्ट की सच्चाई जानने का फैसला किया। ऐसा कहा जाता है कि सच्चाई कड़वी होती है, लेकिन यकीन मानिए इस युवक की सच्चाई जानकर भारत के हर नागरिक का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।

आईईडी ब्लास्ट में वीर जवान ने गंवाए दोनों पैर
पत्नी के साथ व्हीलचेयर में बैठा युवक असल में सीआरपीएफ कोबरा 208 बटालियन का जाबांज कमांडो बी राम दास है। 20 नवंबर 2017 को छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के किस्टाराम थाने के अंतगर्त नक्सल विरोधी ऑपरेशन के दौरान आईईडी की चपेट में वे आ गए थे। आईइडी ब्लास्ट में जवान ने अपने दोनों पैर खो दिए।

राजधानी रायपुर के अस्पताल में लगभग 43 दिन जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे। जब आंख खुली तो दोनों पैर कट चुके थे। देश के लिए लडऩे का जज्बा अभी बाकी था। ऐसे में पत्नी रेणुका ने फौजी पति का खोया हुआ आत्मविश्वास लौटाने के लिए खुद वर्दी पहनी। इस यादगार लम्हे की फोटो सोशल मीडिया में पोस्ट की।

नहीं छोड़ी ड्यूटी, बालाघाट में दे रहे सेवाएं
छत्तीसगढ़ में नक्सल ऑपरेशन के दौरान पैर गंवाने के बाद भी कोबरा कमांडो बी रामदास ने ड्यूटी नहीं छोड़ी। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे फिलहाल बालाघाट सीआरपीएफ मुख्यालय में सेवा दे रहे हैं। पत्रिका से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि आईईडी ब्लास्ट में सिर्फ पैर गए हैं पर दिल आज भी भारत माता के लिए धड़कता है। जब तक इस शरीर में जान रहेगा खून का एक-एक कतरा देश के नाम रहेगा।

जल्द लगाए जाएंगे कृत्रिम पैर
कोबरा कमांडो बी रामदास का जज्बा देखकर सीआरपीएफ के अधिकारी भी ड्यूटी के दौरान उनका मनोबल बढ़ाने से नहीं थकते। जल्द ही उन्हें कृत्रिम पैर लगाए जाएंगे। महाराष्ट्र के ठाणे जिला निवासी जवान ने बताया कि लगभग एक महीने कृत्रिम पैर में चलने की प्रैक्टिस वे कर चुके हैं। कृत्रिम पैर लग जाने से उनके हौसलों को दोगुनी उड़ान मिल जाएगी। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में लगभग ढाई साल पोस्टिंग का अनुभव बताते हुए कहते हैं कि दुश्मनों से लडऩे का अपना अलग ही मजा है। मौका मिला तो वे दोबारा जंगलों में पोस्टिंग लेकर मोर्चा संभालने तैयार हैं।

पत्नी की वजह से जुटा पाए दोबारा खड़े होने की हिम्मत
आईईडी ब्लास्ट में पैर गंवाने के बाद रामदास पूरी तरह टूट गए थे। उन्होंने बताया कि पत्नी रेणुका के सपोर्ट और भरोसे से वे दोबारा खड़े होने की हिम्मत जुटा पाए। पेशे से शिक्षिका रेणुका बताती है कि कमांडो पति को इस हालत में देखकर एक पल के लिए तो वे हार ही चुकी थीं। लगा दुनिया खत्म हो गई। पति का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्होंने कमांडो की वर्दी पहनी। ताकि पति दोबारा उस वर्दी को पहनने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाए। रेणुका कहती है, फौजी की पत्नी बनने का सौभाग्य नसीब वालों को मिलता है। उसे अपने कमांडो पति पर गर्व है।