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Chhattisgarh Elections : ताम्रध्वज बनेंगे सीएम और रविंद्र चौबे होंगे विधान सभा अध्यक्ष

सियासत किस करवट बैठेगी, बहुमत किसे मिलेगा, यह तो 11 दिसंबर को मालूम चलेगा। पत्रिका टीम इन सियासी अटकलों और चर्चाओं में से कुछ खास बातें सामने लाई है, जो आपको कहीं गुदगुदाएंगी तो कहीं सोचने पर मजबूर कर देंगी।

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Chhattisgarh Elections : ताम्रध्वज बनेंगे सीएम और रविंद्र चौबे होंगे विधान सभा अध्यक्ष

भिलाई@Patrika. सियासी संग्राम में अभी अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। सियासी गलियारों में गुफ्तगूं उनकी है जो चुनाव मैदान में कूदे थे। मतदान हो चुका है, सुस्ती का समय है, बैठे-बैठे हार-जीत का गुणा-भाग लगाया जा रहा हैै। इसमें एक खास तरह का समीकरण भी सामने आ रहा है, जिसके हिसाब से भविष्य की संभावनाएं और राजनीतिक बिसात पर नेता की हस्ती का अनुमान लगायाा जा रहा। कौन जीतेगा तो क्या बनेगा? उसके हारने का राजनीतिक जीवन पर क्या असर होगा? उसका मंत्री बनना तय है, फलां मुख्यमंत्री पद का दावेदार है। दोनों जीते तो कुर्सी किसकी होगी, क्या नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे, इतिहास दोहराया जाएगा या फिर रचा जाएगा? ऐसे कई सवाल और उन पर आमजन ही नहीं पार्टी कार्यकर्ताओं के कयास हैं। सियासत किस करवट बैठेगी, बहुमत किसे मिलेगा, यह तो 11 दिसंबर को मालूम चलेगा, लेकिन अभी तो सियासी सुर इन्हीं सवालों और अटकलों के इर्द-गिर्र्द घूम रहे हैं। पत्रिका टीम इन सियासी अटकलों और चर्चाओं में से कुछ खास बातें सामने लाई है, जो आपको कहीं गुदगुदाएंगी तो कहीं सोचने पर मजबूर कर देंगी।

परिवारवाद की सियासत आगे बढ़ेगी या ढहेगा दुर्ग
@Patrika .दुर्ग में मोतीलाल वोरा के कद से कांग्रेस की तुलना की जाती रही है। भाजपा के दिवंगत नेता हेमचंद यादव ने दुर्ग के गढ़ में सेंध लगाई थी। अब फिर विधानसभा का प्रतिनिधित्व वोरा परिवार के चिरंजीव अरुण के पास है, लेकिन इस चुनाव को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं उनमें एक यह भी है कि वोरा की हार से एक परिवार की राजनीति का अंत होगा या दुर्ग फतह कर कांग्रेस की धुरी बने रहेंगे।

क्या जिले के ये दो महापौर एकसाथ जाएंगे विधानसभा
दुर्ग से चंद्रिका चंद्राकर और भिलाई से देवेंद्र यादव ने महापौर रहते हुए विधानसभा का चुनाव लड़ा है। अब सियासी सोच से एक सवाल यह भी उभर रहा है कि क्या जिले के यह दोनों महापौर एकसाथ विधानसभा की सीढ़ी चढ़ सकेंगे? भाजपा की चंद्रिका और कांग्रेस के देवेंद्र से पहले जिले में सरोज पांडेय विधायक और महापौर रह चुकी हैं। क्या राजनांदगांव के महापौर मधुसूदन यादव अपने संसदीय क्षेत्र में विस उम्मीदवार के तौर पर सफल हो पाएंगे।@Patrika

भसीन जीते तो कौन से महकमे के मंत्री बनेंगे?
वैशालीनगर के भाजपा प्रत्याशी विद्यारतन भसीन को ऐढ़ी चोटी का जोर लगाने के बाद टिकट मिला था। अब जीत की उम्मीद लगाए उनके कार्यकर्ता ही अटकलें लगा रहे हैं कि भसीन लगातार दूसरे कार्यकाल में सदन जाएंगे तब भाजपा की सरकार बनने पर उनको मंत्रिमंडल में शामिल तो किया ही जाएगा, ऐसा किया गया तो उनको किस महकमे का जिम्मा मिलेगा। दर्जा कैबिनेट मंत्री का होगा या फिर राज्यमंत्री बन पाएंगे?

राय ने छोड़ी कांग्रेस की नैया क्या निषाद बनेंगे खेवनहार
@Patrika.गुंडरदेही विस पर सबकी नजर है। विधायक राजेंद्र राय कांग्रेस छोड़ जनता कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। उनके मुकाबले भाजपा ने दिग्गज नेता ताराचंद साहू के बेटे दीपक साहू को उतारा है। कांग्रेस ने साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले कुंवर सिंह निषाद पर भरोसा जताया है। त्रिकोणीय मुकाबले के बीच दो दिग्गजों से मुकाबला कर रहे निषाद निर्णायक भूमिका में हैं। क्या निषाद कांग्रेस के खैवनहार बनकर उसे यह सीट लौटा पाएंगे?

क्या पांडेय और कुरैशी साथ पहुंचेंगे सदन में
भिलाईनगर के विधानसभा चुनाव का इतिहास रहा है यहां से एक बार प्रेमप्रकाश पांडेय जीतते हैं तो दूसरी बार बाजी बदरुद्दीन कुरैशी के हाथ में आती रही है। यह पहली दफा है कि पांडेय तो इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन कांग्रेस ने कुरैशी को वैशालीनगर से उतारा है। अब 1993 से पांच बार का इतिहास तो पीछे छूट गया है, लेकिन अभी कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों प्रतिद्वंद्वी क्या इस बार साथ में सदन पहुंचेंगे?

ताम्रध्वज और भूपेश में से कौन बनेगा मुख्यमंत्री
@Patrika.कांग्रेस के दो दिग्गज सांसद ताम्रध्वज साहू दुर्ग ग्रामीण और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल पाटन से चुनाव लड़ रहे हैं। भूपेश को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन कांग्रेस ने दुर्ग ग्रामीण का प्रत्याशी बदलकर सांसद ताम्रध्वज पर दांव आजमाया। दोनों के समर्थक इनको मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताते रहे। इसी को राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं कि दोनों जीत गए और कांग्रेस बहुमत में आई तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा?

कांगे्रस जीते और भूपेश हारे, तब रहेंगे सीएम की दौड़ में
पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल की टक्कर भाजपा के मोतीलाल साहू से है। पाटन की इस सीट पर जातिगत समीकरण हावी रहे हैं। पहली बार साहू प्रत्याशी मैदान में है। ऐसे में अटकलबाज चर्चा कर रहे हैं कि कांग्रेस प्रदेश में बहुमत ले आए, लेकिन पाटन से भूपेश हार गए तो सीएम के दावेदार कौन-कौन होंगे? ताम्रध्वज को कुर्सी मिलेगी या टीएस सिंहदेव के सिर पर सजेगा ताज, सत्यनारायण शर्मा सीएम बनेंगे या विस अध्यक्ष बनाए जाएंगे?

रविंद्र का बनेगा रिकॉर्ड या बाफना का बढ़ेगा कद
@Patrika.साजा से रविंद्र चौबे आठवीं बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। १९८५ में अविभाजित मध्यप्रदेश में वे पहली बार विधायक बने। तब से लगातार चुनाव लड़ते आ रहे हैं। २०१३ में एक बार हार से सामना हुआ। अब अटकलों की हवा गर्म है। सातवीं बार विधायक बनने का रिकॉर्ड बन पाएगा या नहीं? जीत उनकी होगी या पार्टी भी बहुमत में आएगी? मंत्री बनेंगे या सीएम की दौड़ में होंगे शामिल? विस अध्यक्ष तो नहीं बना दिए जाएंगे?

क्या प्रजा चुनेगी राजा या फिर बन जाएंगे रंक
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने खैरागढ़ और गुंडरदेही से राजाओं पर दांव खेला है। खैरागढ़ से देवव्रत सिंह और गुंडरदेही से राजेंद्र राय को प्रत्याशी बनाया है। देवव्रत पहले भी कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं और राय अभी विधायक हैं। ऐसे में क्या खैरागढ़ और गुंडरेदही की प्रजा फिर अपने-अपने राजा को चुनकर सदन में भेजेगी?

जनता-जनार्दन सोच रही गुरु, महंंत दोऊ खड़े....
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में कांगे्रस से सतनाम समाज के गुरु रुद्र कुमार और भाजपा से राजमहंत सांवलाराम डाहरे मैदान में है। यह प्रत्याशियों के लिए तो उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा का सवाल है ही, जनता के लिए भी है। खासतौर पर सतनामी समाज के लिए कि वह किस पर बलिहारी होगी?

रमन के सामने कितना काम आ पाएंगी करूणा
@Patrika.मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। कांगे्रस ने उनसे मुकाबला करने पूर्वप्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी की भतीजी करूणा शुक्ला को यहां उतारा है। पिछले दो चुनावों में रमन क्रमश:३५८६६ और ३२३८४ वोट के अंतर से जीतते रहे हैं। चर्चा है कि नतीजे शायद न बदलें लेकिन फासले जरूर कम हो जाएंगे। क्या सचमुच जनता ने करूणा पर करूणा दिखाई है?