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CG Road Accident: पांच महीनों में NH पर 19, स्टेट हाइवे में 48, अन्य दूसरी सड़कों पर 89 की गई जान

CG Road Accident: इसके बाद 160 हादसे कार चालकों के हुए। इनमें 29 लोगों की जान गई। ट्रक से 110 दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 31 लोगों की जान गई।

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CG Road Accident

CG Road Accident: पांच महीने में जिले में 548 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें 156 लोगों की जान चली गई। अधिकतर हादसे नेशनल हाइवे व स्टेट हाइवे में ही नहीं बल्कि जिले की अन्य सड़कों में हुए हैं। इन दुर्घटनाओं के विश्लेषण में सामने आया कि शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं।

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अब तक सबसे अधिक बाइक सवार सड़क हादसे के शिकार हुए हैं। पुलिस के मुताबिक जब बाइक दुर्घटना का एनालिसिस किया गया तो यह पता चला कि बाइक वाले बिना हेलमेट लगाए तेज रफ्तार से पेड़ में टकराए हैं या आमने-सामने टक्कर हुई है।

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कई लोगों ने मवेशियों से टकराकर अपनी जान गंवाई है। पांच महीने में 198 प्रकरण सामने आए हैं। इसमें 181 साधारण घायल, 10 गंभीर और 47 लोगों की जान गई है। इसके बाद 160 हादसे कार चालकों के हुए। इनमें 29 लोगों की जान गई। ट्रक से 110 दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 31 लोगों की जान गई।

रोड स्ट्रक्चर ज्यों का त्यों, वाहन बढ़ रहे

जिलेमें जनसंख्या वृद्धि के साथ अप्रत्याशित रुप से वाहनों की संख्या बढ़ी है। पिछले पांच वर्षों में 2 लाख 7 हजार 733 वाहन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में पंजीकृत हुए हैं। रोड़ स्ट्रक्चर तो ज्यों का त्यों है। इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ा है।

CG Road Accident: दुर्घटना की प्रमुख वजह यह

नशे की हालत में गाड़ी चलाना

तेज रफ्तार से वाहन चलाना

हेलमेट व सीट बेल्ट नहीं लगाना

ओवर टेक करना

रांग साइड से चलना

ट्रैफिक नियमों की अनदेखी

सड़कों की खराब हालत

सड़कों में इंजीनियरिंग फॉल्ट

शाम 6 से रात 9 बजे हादसे इसलिए अधिक

शाम6 से रात 9 बजे के बीच कामकाजी लोग अपने घर लौटते हैं। जल्दबाजी व तेज रफ्तार से लापरवाहीपूर्वक गाड़ी चलाने की वजह से अधिकतर दुर्घटना होती है। अधिकतर दुर्घटनाओं का यही समय है। शहर मेें काम कर गांव लौटने वाले कई लोग अक्सर नशे की हालत में रहते हैं। काम से निकलकर वे पहले शराब दुकान जाते हैं। शराब पीने के बाद गांव लौटते हैं। नशे की हालत में होने के कारण दुर्घटना के शिकार होते हैं।

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जागरुकता अभियान के बाद भी यह हाल

ट्रैफिक पुलिस ने सड़क हादसे पर नियंत्रण के लिए शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों में जागरुकता अभियान चलाया। बावजूद दुर्घटना अपेक्षित कमी नहीं आई। पांच महीने में नेशनल हाइवे 97, स्टेट हाइवे 112 और अन्य सड़कों पर 339 दुर्घटनाएं हुई।

डीएसपी सतीश ठाकुर का कहना है कि शाम से रात 9 बजे के बीच सबसे अधिक दुर्घटनाएं हुई है। इसकी मुख्य वजह लापरवाही, बिना हेलमेट और नशा है। सड़क हादसों को रोकने जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों से आग्रह है कि ट्रैफिक नियमों का पालन करें और सुरक्षित चलें।

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