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भिलाई में 60 साल पुरानी इस बाइक को 2 लाख में खरीदने को तैयार हैं कई लोग, दिल्ली-मुंबई से भी आए ऑफर

छत्तीसगढ़ यजदी-जावा क्लब ने अपनी जान से भी प्यारी विंटेज गाडिय़ों को लोगों के बीच प्रदर्शन के लिए उतारा।

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yazdi java bike in bhilai

yazdi java bike in bhilai

भिलाई . शौक के आगे सबकुछ फीका है। 1960 के जमाने की तेज तर्रार बाइक कही जाने वाली 'यजदी-जावाÓ अब बनना बंद हो गई है, लेकिन इसके दीवानों का शौक खत्म नहीं हुआ है। अपने भिलाई में भी इन विंटेज बाइक की ऐसी ही दीवानगी सिर चढ़कर बोलती है। अपनी ओल्ड इज गोल्ड यजदी-जावा को जिंदगी का अहम हिस्सा बना चुके भिलाइयंस ने रविवार को इस शौक का नमूना पेश किया। 240 सीसी, टू-स्ट्रोक और दो साइलेंसर वाली करीब २९ जावा से-1 बैंक क्लब के सामने देखने को मिली।

छत्तीसगढ़ यजदी-जावा क्लब ने अपनी जान से भी प्यारी विंटेज गाडिय़ों को लोगों के बीच प्रदर्शन के लिए उतारा। हर कोई बीते दिनों की इस मशहूर यजदी बाइक की खूबसूरती और खूबियां परखता दिखा। यह पहली मर्तबा है जब प्रदेश के कोने-कोने से यजदी-जावा के शौकीन अपनी गाडिय़ों के साथ भिलाई में एक जगह पर इक_ा हुए। सबसे खास बात यह है कि इस बाइक को खरीदने के लिए लोग लाखों देने को तैयार है, लेकिन जो ये बाइक चला रहे हैं, वे इसे बेचना नहीं चाहते।

चार हजार में खरीदी अब लाख के बराबर
ग्रुप के सदस्य गौरव ने बताया कि ओल्ड जावा का शौक आज का नहीं है, बल्कि स्कूल के जमाने से ही यह बाइक सबसे पसंदीदा रही है। कई साल इसे खोजने में लगे। उन्होंने इस बाइक से जुड़ी कहानी का एक किस्सा बताया कि एक दिन दोस्तों के साथ उतई की ओर जा रहा थे। तब ही उनकी नजर एक भंगार की दुकान पड़ी। वहां १९६७ की जावा खड़ी देखते ही सालों की तलाश पूरी हो गई।

गाड़ी बहुत ही खराब कंडीशन में थी। न टायर थे और न ही बाकी कलपुर्जे। अपने सपनों की बाइक को पुख्ता करने उसके हेडलाइट की ओर देखा तो डाऊट क्लीयर हो गए। कबाड़ी से तुरंत बाइक खरीदने के लिए बातचीत कर ली। उस समय यह बाइक चार हजार रुपए में खरीदी। इसे सुधारने में हजारों खर्च कर दिए। शौक को कायम रखने गाड़ी में वही ओरिजनल कलपुर्जे खोजकर लगवाए जो कंपनी की ओर से नए गाड़ी खरीदने पर उस समय दिए जाते थे। गौरव कहते हैं कि भले ही इसे चार हजार में खरीदा था, मगर आज इसकी कीमत लाखों में है।

रविवार को था इंटरनेशनल जावा-डे
क्लब के सदस्य हर्षित ने बताया कि रविवार को इंटरनेशनल जावा-डे था। यह प्रदर्शनी इसी उपलक्ष्य में लगाई गई। पुरानी दुनिया में यजदी-जावा के दीवानों ने अपने-अपने शहरों में इस खास दिन को सेलिबे्रट किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंडिया में यजदी-जावा का सबसे बड़ा गु्रप बंगलुर में है। यह समूह अकसर सोशल ईशूज पर अपनी गाडिय़ों की रैली के माध्यम से माध्यम से जागरुकता फैलाता देखा गया है। भिलाई में भी करीब 25 सदस्य हैं, जो गंभीर मुद्दों पर जागरुकता फैलाने की सोच रखते हैं।

भिलाई में था जावा का शो रूम
पॉवर हाउस में जिस जगह पर अभी हीरो का शो रूम है। कभी वहां जावा का शो रूम हुआ करता था। कंपनी ने 1993तक अपना आखिरी मॉडल बाजार में उतारा है। शहर में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने भिलाई के शो रूम से अपनी इस पसंदीदा गाडिय़ों को खरीदा है।

आज भी संभालकर रखी है बाइक की रसीद
यजदी बी टाइम का 1968 मॉडल चला रहे हर्षित पारख ने बताया कि यह बाइक पिछले 40 साल से उनके परिवार का हिस्सा है। हर्षित के दादा ने ४० साल पहले इसे सिविक सेंटर स्थित यजदी के शोरूम से खरीदा था। जिसकी रसीद आज भी सलामत है। दादाजी के बाद हर्षित के पिता और चाचा ने यह बाइक चलाई। वे बताते हैं कि इस बाइक से नागपुर तक का सफर बिना किसी थकान के पूरा कर लेते थे।