
छत्तीसगढ़ धरोहर-4 देवी का कुंड कैसे अस्तित्व में आया कोई नहीं जानता
भिलाई@Patrika. वैसे तो पूरे देश में देवी दुर्गा की कई प्रसिद्ध और रहस्यमयी शक्तिपीठ (मंदिर) हैं जो अपनी अलग-अलग कहानियों, मान्यताओं और किवंदतियों की वजह से मशहूर है। देवी दुर्गा का एक मंदिर छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भी स्थित है जिसे लोग देवी चंडी मंदिर के नाम से जानते हैं।
पहले सिर्फ कुंड था
शहर के जानकार बताते हैं कि मंदिर का जो स्वरूप वर्तमान में नजर आ रहा है वैसा नहीं था। पहले सिर्फ कुंड हुआ करता था। ऐसी मान्यता है कि कुंड का पानी कभी नहीं सूखता था। @Patrika. वर्तमान में कुंड का आकार छोटा हो गया है। कुंड के ऊपर टिन शेड लगा हुआ था। पुराने जमाने में लोग कुंड में ही जल चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते थे।
एक मान्यता यह भी
लोग बताते हैं कि आदिवासी राजाओं के जमाने का है। शहर के अंतिम छोर में स्थित होने के कारण लोग सिर्फ दिन में ही पूजा-अर्चना करते थे। रात में अंधेरा होने के कारण लोग वहां जाने से डरते थे। धीरे-धीरे कुंड की प्रसिद्धि फैलने और आस्था बढऩे पर देवी की प्रतिमा स्थापित की गई। @Patrika. प्रतिमा स्थापना के बाद आज से छह दशक पहले शहर के एक श्रद्धालु डेरहा राम यादव ने मंदिर निर्माण के लिए 50 हजार रुपए दान दिया था। मंदिर निर्माण में उनके बड़े योगदान को देखते हुए फिर ट्रस्ट का गठन हुआ। वर्तमान में मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित है।
कुंड का आकार योनिस्वरूपा
बताते हैं कि कुंड का आकार योनिस्वरूपा है। पूरे देश में कामाख्या मंदिर के बाद एकमात्र योनिस्वरूपा मंदिर है।
छोटी बहन आमगांव महाराष्ट्र में
कुछ लोग बताते हैं देवी चंडी की छोटी बहन का मंदिर महाराष्ट्र के आमगांव में स्थित है।
1975-76 से ज्योति कलश प्रज्ज्वलन की शुरुआत
इस मंदिर में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलन की शुरुआत 1975-76 में हुई है। इसके पहले सिर्फ एक ज्योतिकलश दोनों नवरात्रि में प्रज्ज्वलित की जाती थी। @Patrika.ज्योति कलश की शुरुआत आचार्य स्व. अभयराम द्विवेदी के मार्गदर्शन में शुरू हुआ था। वर्तमान में ज्योतिकलश की संख्या हजारों में पहुंच गई है। चैत्र और क्वांर नवरात्रि पर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में बसे देवी के भक्त मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करवाते हैं।
Published on:
22 Feb 2019 04:09 pm
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