
दुर्ग . यश ग्रुप की संपत्ति कुर्क करके निवेशकों के 60 करोड़ रुपए लौटाने के मामले में सुनवाई टल गई है। शनिवार को कार्यवाही को स्थगित करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके अग्रवाल ने सुनवाई के लिए 28 मई की तारीख दी है।
कुर्की आदेश जारी करने पर स्थगन
सुनवाई टलने के पीछे कानूनी पेंच को वजह माना जा रहा है। जिला मजिस्ट्रेट ने जिस संपत्ति को कुर्की के लिए सीज कर मूल्यांकन किया है। उसे यश ग्रुप की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट में प्रकरण लंबित है। खास बात यह है के न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी ने इस मामले में स्थगन दिया था। बाद में उन्होंने जिला न्यायालय को स्वतंत्र रूप से कार्यवाही करने का निर्देश दिया था। इसके बाद यश गु्रप ने दोबारा आरसीएस सामंत की खंडपीठ में अपील की। खंडपीठ ने कुर्की आदेश जारी करने पर स्थगन दिया है।
अप्रैल 2015 में कलक्टर ने की संपत्ति सीज
यश ग्रुप के खिलाफ सुपेला थाना में एफआईआर दर्ज हुई थी। जांच के बाद प्रकरण न्यायालय में पेश किया गया। इसमें हितग्राहियों की जमा राशि लौटाने के लिए छत्तीसगढ़ निक्षेपकों का हित संरक्षण अधिनियम के तहत यश गु्रप की अचल संपत्ति को सीज कर डीएम ने कुर्की करने अंतरिम आदेश पारित किया है। कुर्की के लिए अंतिम आदेश जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके अग्रवाल को जारी करना है।
यश ग्रुप का दावा
यश ग्रुप के आरोपी डायरेक्टर का दावा है कि प्रशासन ने उसकी संपत्ति का मूल्यांकन कम किया है। उसके पास प्रापर्टी इतनी है कि उसे बेचकर वह सभी हितग्राहियों से लिए रकम लौटा सकता है। वहीं प्रशासन का मूल्यांकन पर वह केवल भिलाई के निवेशकों की पैसा ही लौटा सकता है।
प्रकरण 60 करोड़ का
यशगु्रप के खिलाफ भोपाल, रायपुर व भिलाई में एफआईआर दर्ज है। यश गु्रप पर ६० करोड़ लेकर हड़पने का आरोप है। इसमें से २७ करोड़ रुपए केवल भिलाई का है। यह आकड़ा उन हितग्राहियों का है जिन्होंने एफआईआर दर्ज कराई है। यश गु्रप का अनुमानित कारोबार लगभग १५०-२०० करोड़ रुपए का था।
Published on:
28 Apr 2018 08:59 pm
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