
Breaking news नामांकित पार्षदों की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने सामने
भिलाई. नगर पालिक निगम, रिसाली के सदन का गठन होने से पहले आठ नामांकित पार्षदों के मनोनयन के मामले में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने हो गए हैं। छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने इस मनोनयन पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने बिना सदन का गठन हुए नामांकित पार्षदों के मनोनीत करने के मामले में सरकार से पूछा है कि क्या इसके पहले या बाद में किसी और निकाय में इस तरह से मनोनयत किए हैं। अगर नियम में होता तो पहले और बाद में भी होता। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता इसे राज्य सरकार का सही फैसला बता रहे हैं।
विपक्ष के हाथ लगा मुद्दा
रिसाली में नामांकित पार्षदों की नियुक्ति और मानदेय को देखते हुए भिलाई के नामांकित पार्षदों ने भी मानदेय की मांग की है। यहां सरकार के अधिकारी जिस नियम का हवाला दे रहे हैं, रिसाली में जाकर उससे यू टर्न ले लेते हैं। जिससे विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है। दस माह से जो मानदेय दिया जा रहा है, उसको लेकर भी वे सवाल खड़ा कर रहे हैं। नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा - 9 के मुताबिक नगर पालिक निगम की संरचना नगर पालिक वार्डों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित महापौर अर्थात सभापति, वार्डों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित पार्षद और नगर पालिक प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले छह से अनधिक ऐसे व्यक्ति जिन्हें राज्य सरकार ने नामनिर्दिष्ट किया गया हो।
चुने हुए प्रतिनिधियों को नियमानुसार मानदेय देना किए बंद
नगरीय निकाय के नियम के मुताबिक 26 दिसंबर 2019 को जब नगर पालिक निगम, रिसाली अस्तत्व में आया तब से ही रिसाली के तमाम पार्षदों को शून्य घोषित कर दिए। उन्हें माह में 7500 रुपए मानदेय दिया जाता था, वह मिलना बंद हो चुका है। वहीं रिसाल में सितंबर 2020 के दौरान नामांकित पार्षद मनोनीत कर दिए। दूसरी ओर नगर पालिक निगम, भिलाई के नामांकित पार्षदों को जनवरी 2021 से शून्य घोषित कर दिए। वे इस मामले में कलेक्टर को पत्र लिखे हैं।
सभा गठन के बाद ही किया जाता है नामांकित पार्षद मनोनीत
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ शासन प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने बताया कि नगर पालिक निगम, रिसाली में अब तक सभा का गठन नहीं हुआ है। तब नामांकित पार्षद किस तरह से मनोनीत किया जा सकता है। नामांकित पार्षदों को मनोनीत करना बेशक राज्य सरकार का अधिकार है। ऐसा प्रदेश में सरकार ने दूसरे जगह किया है क्या.. ? भिलाई से रिसाली को जब अलग किया गया, तब से ही चुने हुए पार्षदों को शून्य कर दिया गया। तब एल्डरमैन को किस तरह मनोनीत किया जा सकता है। इसका जवाब आने वाले समय में सरकार को देना होगा।
एल्डरमैन की नियुक्ति राज्य सरकार का विशेषाधिकार
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता व विधायक देवेंद्र यादव ने बताया कि एल्डरमैन की नियुक्ति राज्य सरकार का विशेषाधिकार है। वहीं चुनाव करवाना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। चूंकि कोविड महामारी के चलते चुनाव टाले गए हैं, लेकिन राज्य शासन तो एल्डरमैन की नियुक्ति कर सकती है। एल्डरमैन राज्य सरकार और शहर की सरकार के बीच का एक प्रतिनिधि होता है। आज चुनाव न होने की स्थिति में कहीं न कहीं एल्डरमैन की नियुक्ति प्रशासन और जनता के बीच संवाद का काम करेगी। जब तक रिसाली नगर निगम को शहर की सरकार नहीं मिल जाती। स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में एल्डरमैन जनसेवा के कार्यों में लगेंगे। सरकार के इस फैसले से सहमत हूं।
Published on:
10 Jul 2021 01:41 am
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