
उपभोक्ता फोरम ने गृह निर्माण मंडल पर लगाया 17.79 लाख हर्जाना, सात प्रकरणों पर एकसाथ फैसला
दुर्ग@Patrika. तालपुरी इंटरनेशलन कालोनी में मकान को समय पर पूरा नहीं करने और निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत लेने पर जिला उपभोक्ता फोरम ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल दुर्ग को दोषी ठहारते कुल 17 लाख 79 हजार रुपए जमा करने का निर्देश दिया है। यह राशि गृह निर्माण मंडल को एक माह के भीतर जमा करना होगा। सात अलग अलग प्रकरणों में फैसला फोरम के सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने सुनाया। फोरम ने प्रत्येक परिवादी से सर्विस टैक्स के रुप में लिए गए कुल 10 लाख 9005 रुपए लौटाने का निर्देश दिया है। वहीं सातों परिवादी को एक-एक लाख रुपए मानसिक कष्ट और वाद व्यय के रुप में एक-एक हजार रुपए देने का निर्देश दिया है।
यह है मामला
परिवाद प्रस्तुत करने वाले पीडि़तों ने फोरम को जानकारी दी है कि गृह निर्माण मंडल ने तालपुरी योजना की नींव २००८-०९ में रखी। आकर्षक ब्रोशर, विज्ञापन व कैटलाग का प्रकाशन कर प्रसार प्रचार किया गया। इसे देखने के बाद ही वे मकान खरीदने गृह निर्माण मंडल से अनुबंध किया। तब उन्हें जानकारी दी गई कि मकान २४ माह के भीतर तैयार कर हैंडओवर किया जाएगा। इस दौरान मकान की कीमत १० प्रतिशत से अधिक बढऩे पर विधिवत अनुमति लेकर कार्य कराया जाएगा, लेकिन गृह निर्माण मंडल ने स्वयं विलंब किया और आवश्यकता से अधिक सर्विस टैक्स लिया है। साथ ही ब्रोशर में दी गई सुविधाओं से उन्हें अब तक वंचित रखा है।
गिनाई खामिया
-मकान निर्माण में निधारित कालम व बीम नहीं
-अनुबंध कराने वाले केवल 40 प्रतिशत लोगों को ही मकान उपलब्ध कराया
-जल प्रदाय योजना और सिवर टिट्रमेंट कार्यशुरू तक नहीं हुआ
-क्लब हाउस व कम्युनिटी हाल नहीं
- गार्डन की सुविधा नहीं
परिवाद का आधार
परिवादी गणों का कहना था कि गृह निर्माण मंडल निर्माता कंपनी नहीं है। मकान निर्माण मैकेन्तोष बर्न कोलकाता कर रही है। गृह निर्माण मंडल केवल रुपए लेकर मकान निर्माण कार्य का सुपरविजन कर रही है। निर्धारित समय पर कार्यपूरा नहीं होने पर जिम्मेदार निर्माण करने वाली कंपनी है। गृह निर्माण मंडल ने सर्विस टैक्स गलत ढंग से लिया है। मकान का दर बढ़ाकर कंपनी को दोहरा लाभ पहुंचा रही है।
बचाव में कहा
गृह निर्माण मंडल ने सुनवाई के दौरान कहा कि मंडल मकान निर्माण करने में किसी तरह का समय निर्धारित की है। वैसे भी वह नियम व शर्तों के हिसाब से राशि ली है। वैसे भी प्रावधान है कि अगर मकान का दर अधिक लग रहा है तो वे मूल चालान प्रस्तुत कर राशि वापस ले सकते हैं। मकान तैयार होने पर वह संतुष्ट प्रमाण पत्र लेने के बाद ही हैंडओवर करते है। वैसे भी मकान का मूल्य बढ़ाने के मामले में सुनवाई का अधिकार जिला उपभोक्ता फोरम को नहीं है। इसलिए परिवाद को निरस्त किया जाए।
परिवादी सर्विस टैक्स मानसिक क्षतिपूर्ति वाद व्यय
एजाज अहमद 140645 100000 1000
राकेश अस्थाना 148591 100000 1000
निरज कुमार 91939 100000 1000
असीत कुमार घोष 178834 100000 1000
बीआर चंद्राकर 100515 100000 1000
एस मनोज 181564 100000 1000
हेमंत कुमार 166917 100000 1000
Published on:
22 Nov 2018 10:40 pm
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