
Breaking news कोरोना का टीका लगवाने के कुछ देर बाद हो गई मौत, परिवार के सामने आर्थिक संकट
भिलाई. रिसाली में रहने वाली रत्नामाली (30 साल) ने मंगलवार को सुबह करीब 11.30 बजे कोरोना का टीका रिसाली के बाजार वाले वैक्सीनेटर सेंटर में लगवाया। इसके बाद वह रूटीन में जिस अपार्टमेंट में बुजुर्गों के लिए खाना बनाने जाती थी, वहां पहुंची। उसके साथ उसकी ढाई साल की बेटी भी थी। कमरे में वह कुछ काम कर रही थी, इस दौरान वह बेहोश हो गई। घर में मौजूद बुजुर्ग दंपत्ती को जब कुछ देर तक उसकी मौजूदगी का एहसास नहीं हुआ तो वे भीतर जाकर देखे, वहां वह बेहोश पड़ी थी। उन्होंने तुरंत अपार्टमेंट के सुरक्षाकर्मी को बुलाया। सुरक्षा कर्मी ने बताया कि वह तुरंत रत्नामाली को पास के निजी विनायक अस्पताल, रिसाली में लेकर गए। जहां डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया।
शव लेकर पहुंचा टीकाकरण केंद्र
सुरक्षा कर्मी ने बताया कि वह महिला का शव को लेकर वह सीधे वैक्सीनेशन सेंटर पहुंच गया। जहां जानकारी दिए कि जिस वैक्सीन को रत्ना को लगाया गया है, उस वैक्सीन को अन्य ९ लोगों को लगाए हैं किसी ने शिकायत नहीं की है। इसके बाद वह शव को लेकर अपार्टमेंट आया। पूरे मामले की नेवई पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने मर्ग कायम किया और शव को मच्र्यूरी में रखवा दिए।
चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर से किए जांच की मांग
पीडि़त परिवार ने कोरोना टीका लगवाने के बाद हुई मौत की जांच करवाने और मुआवजा देने को लेकर चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग डॉक्टर गंभीर सिंह ठाकुर को पत्र लिखा है। इसके बाद तीन सदस्यों की टीम की मौजूदगी में पोस्ट मार्टम किया गया है। जिसमें एक महिला चिकित्सक, एक फोरेंसिंक एक्सपर्ट और एक डॉक्टर शामिल हैं। पीएम का वीडियो भी बनवाया गया है, ताकि आने वाले समय में परिवार अगर न्यायालय जाता है तो वहां इसे चिकित्सक पेश कर सके।
परिवार पर आया आर्थिक संकट
मृतका के भाई ने बताया कि कोरोना का टीका लगवाने के बाद उसकी जिस घर में मौत हुई, वहां वह खाना बनाने के साथ-साथ घर का अन्य काम भी करती थी। जिसके एवज में उसे करीब तीन हजार रुपए मिल जाते थे। इसके अलावा दो घर में और काम करती थी, जहां से 700 और 800 रुपए माह में मिलते थे। आर्थिक रूप से परिवार कमजोर था, इस वजह से घर को चलाने के लिए पति रामलाल माली मजदूरी और पत्नी घर में जाकर काम कर रही थी। उसके दो बच्चे हैं, बड़ा लड़का करीब आठ साल का और छोटी बेटी महज ढाई साल की है। मृतका के चले जाने से परिवार के सामने आर्थिक संकट आ गया है।
बचपन से नहीं थी कोई बीमारी
मृतका के भाई बनवाली ने बताया कि रत्ना को बचपने से कोई बीमारी नहीं थी। एकाएक टीका लगवाने के बाद उसकी मौत हो गई। जिसकी वजह से शिकायत किए हैं। शासन से चाहते हैं कि उसके दोनों बच्चों का मदद करे।
यहां उठ रहे सवाल
सवाल उठ रहा है कि जिस वॉयल से दस हितग्राहियों को टीका लगाया गया, उसमें से शेष 9 लोग किस तरह से सुरक्षित है। अगर टीका लगने से ही मौत होती तो वे भी सुरक्षित नहीं रहते। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग पीएम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। जिसमें मौत की असल में वजह क्या थी वह साफ हो सके। छत्तीसगढ़ में इस तरह की पहली शिकायत सामने आ रही है, जिसमें पीडि़त परिवार ने पहले शव ले जाकर टीकाकरण केंद्र में टीका लगाने के बाद मौत होने की शिकायत की है।
पीएम के लिए किए टीम गठित
डॉक्टर गंभीर सिंह ठाकुर, चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग ने बताया कि पीडि़त परिवार ने शिकायत किया है, जिसके बाद पोस्ट मार्टम के लिए एक टीम गठित किए। जिसमें एक महिला चिकित्सक, एक फॉरेंसिक एक्पसर्ट और अन्य डॉक्टर को शामिल किए थे। पीएम का वीडियोग्राफी भी करवाए हैं। महिला ने कोरोना का टीका लगवाया इसके बाद वह काम पर चली गई। वहां उसकी तबीयत कैसे बिगड़ी यह अभी साफ नहीं हुआ है। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट हो जाएगा।
Published on:
30 Jun 2021 11:53 pm
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