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Navratri Special : देवी कंकालीन ने अंग्रेजों के तीन प्रश्न का जवाब स्वप्न में पुजारी को दिए

यहां देवी ने स्वप्न में स्वयं के प्रगट होने और मंदिर बनाने की जानकारी दी थी। इसी तरह अंग्रेजों के जमाने में देवी की परीक्षा और तीन प्रश्न पूछने के किस्से भी मशहूर है। अंग्रेजों ने पूजा पाठ को अंधविश्वास बताकर देवी से तीन सवाल के जवाब देने पर ही मंदिर को नहीं तोडऩे की शर्त रख दी थी।

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नवरात्रि स्पेशल : देवी कंकालीन ने अंग्रेजों के तीन प्रश्न का जवाब स्वप्न में पुजारी को दिए, प्रसन्न होकर चढ़ाया चांदी का कलश

नवरात्रि स्पेशल : देवी कंकालीन ने अंग्रेजों के तीन प्रश्न का जवाब स्वप्न में पुजारी को दिए, प्रसन्न होकर चढ़ाया चांदी का कलश

भिलाई@Patrika. शारदीय नवरात्रि पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। देश के विभिन्न शक्तिपीठों और देवी मंदिरों की तरह छत्तीसगढ़ में भी सिद्ध पीठ और देवी मंदिर है जहां की अपनी तरह की अलग ही मान्यता और विशेषताएं है। (Balod patrika) ऐसे ही छत्तीसगढ़ केबालोद जिले के गुरुर ब्लॉक के ग्राम कनेरी स्थित देवी कंकालीन मंदिर ( Devi Kankalin Temple) की अपनी मान्यता और आस्था हैं। यहां देवी ने स्वप्न में स्वयं के प्रगट होने और मंदिर बनाने की जानकारी दी थी। इसी तरह अंग्रेजों के जमाने में देवी की परीक्षा और तीन प्रश्न पूछने के किस्से भी मशहूर है। (Chhattisgarh Dharma-Karam) अंग्रेजों ने पूजा पाठ को अंधविश्वास बताकर देवी से तीन सवाल के जवाब देने पर ही मंदिर को नहीं तोडऩे की शर्त रख दी थी। बताया जाता है कि उनके प्रश्नों के जवाब देवी ने स्वप्न में पुजारी दो दिए थे। पुजारी द्वारा अंग्रेजों के प्रश्न का जवाब देने के बाद प्रसन्न होकर चांदी का छत्र चढ़ाया था और उनकी आस्था हिंदू धर्म के साथ देवी-देवताओं पर बढ़ गई थी।

गुरुर ब्लॉक मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर ग्राम कनेरी में देवी कंकालीन विराजित
गुरुर ब्लॉक मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर ग्राम कनेरी में देवी कंकालीन विराजित है। मंदिर समिति के अध्यक्ष जनार्दन सिन्हा, उपाध्यक्ष मोहन सिन्हा, संरक्षक हीरालाल यादव, सचिव देवेन्द्र यादव, सहसचिव अमित यादव ने बताया मंदिर 18 वीं शताब्दी की है। ऐसी मान्यता है कि बैगा पर अचानक मां कंकालीन विराजमान हो गई और बैगा जमीन पर लेटकर कहने लगा मैं कंकालीन देवी हूं। देवी ने कहा हम तीन बहनें और विराट नगर से निकले हैं। एक बहन रायपुर में, दूसरी बहन ग्राम पेटेचुआ में और तीसरी मैं यहां शीतला मंदिर के पीछे हूं। यहीं पर मेरी स्थापना कर मंदिर बनाया जाए।

अंग्रेजों ने ली थी देवी की परीक्षा
मंदिर प्रभारी किशनराम छपेन्द्र, घनश्याम उइके, महेशराम सिन्हा, आनंदराम यादव ने बताया सन 1931 में ग्राम कनेरी में हैजा फैल गया था। अनेकों प्रकार के उपचार के बाद भी रोग से मुक्ति नहीं मिल रही थी, तब ग्रामीणों ने देवी कंकालीन से रोगमुक्ति दिलाने की प्रार्थना और पूजा अर्चना की। पूजा-अर्चना के पश्चात हैजा रोग जड़ से समाप्त हो गया। अंग्रेजों को देवी कंकालीन की शक्ति पर विश्वास नहीं था उन्होंने उनकी परीक्षा लेने की ठानी। अंग्रेजों द्वारा मंदिर को नष्ट करने की चेतावनी दी लेकिन उसी रात पुजारी को स्वप्न आ गया। अंग्रेजों ने ग्रामीणों से कहा था कि हम तीन प्रश्न पूछेंगे यदि इन तीनों प्रश्नों का जवाब नहीं मिला तो इस मंदिर को नष्ट कर दिया जाएगा। तभी उसी रात देवी ने पुजारी को स्वप्न में तीनों प्रश्न के जवाब दिए।

अंग्रेजों के पूछे गए प्रश्न
अंग्रेजों ने मंदिर के पुजारी से ग्रामीणों की उपस्थिति में प्रश्न किया एक बकरी के पेट में पल रहे मेमने का रंग और जेंडर बताओ। दूसरा कद्दू के भीतर का बीज पका हुआ है या नहीं। तीसरे प्रश्न में पुजारी को 20 फीट गहरे तालाब को पार करने के लिए कहा गया था।

सपने में आकर मां ने दिए उत्तर
जब अंग्रेजों द्वारा तीन सवालों के जवाब पर उत्तर नहीं देने पर मंदिर नष्ट करने की चेतावनी दी गई, तब देवी कंकालीन ने स्वप्न में आकर तीनों सवालों के जवाब दिए। जिसमें पहले प्रश्न के अनुसार देवी ने एक बकरी का रंग सफेद और जेंडर बकरा बताया, दूसरे का रंग काला एवं बकरी होगी। दूसरे प्रश्न के अनुसार सवाल का जवाब कद्दू का बीज पका हुआ बताया तथा तीसरे प्रश्न के अनुसार देवी ने पुजारी से कहा कि तालाब 20 फीट गहरा है लेकिन तुम डरना मत, मैं तुम्हारे साथ रहूंगी। अगले दिन अंग्रेजों द्वारा यही प्रश्न पूछे गए जिसमें बिल्कुल सही जवाब पुजारी ने दिए।

अंग्रेजों ने दान में दिए चांदी के कलश
तीनों प्रश्नों के सही जवाब मिलने पर अंग्रेजों को देवी की शक्ति का पता चला और उनकी आस्था बढ़ी। अंग्रेजों ने तीनों प्रश्नों के सही जवाब देने पर मंदिर में चांदी का कलश दान दिया और मंदिर के ध्वज पताका को भी वापस कर दिया गया।

मंदिर समिति का गठन
मां की शक्ति दिनों-दिन बढ़ती गई। जिससे लोगों का विश्वास और बढ़ता गया। इस दौरान मंदिर समिति का गठन कर मंदिर प्रांगण में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई जिसमें विश्वकर्मा मंदिर, बूढ़ादेव, पंचमुखी हनुमान मंदिर, गणेश मंदिर, ज्योति कक्ष, मंदिर के पास बइहा राव एवं राजाराव की प्रतिमाएं स्थापित की गई है।

सौंदर्य बिखेर रही पुष्प वाटिका, 335 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित
मंदिर प्रांगण में पुष्प वाटिका बनाई गई है जो प्राकृतिक सौंदर्य की छटा बिखेर रही है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र है। यहां बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले एवं बैठने के लिए लोहे एवं सीमेंट के चबूतरे भी बनाए गए हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि पर 335 ज्योति कलश की स्थापना की गई है।

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