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आप जानते है कि हनुमानजी की भी है सवारी

जिस तरह भगवान शंकर नंदी, गणेश मूषक और मां दुर्ग सिंह की सवारी करती हैं। आप जानते हैं हनुमान जी की सवारी ऊंट है।

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Hanuman with wife

Hanuman with wife

पंकज तिवारी. भिलाई. जिस तरह भगवान शंकर नंदी, गणेश मूषक और मां दुर्ग सिंह की सवारी करती हैं। आप जानते हैं हनुमान जी की सवारी ऊंट है। इस मंदिर में हनुमान जी की पूजा उनकी पत्नी के साथ होती है। सुनने में अजीब और चौंकाने वाला लग सकता है कि लेकिन भिलाई से मात्र 12 किलोमीटर दूर पुनैरा में छत्तीसगढ़ का इकलौता मंदिर है। यहां हनुमानजी अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान है। इस मंदिर में मुरादो की अर्जी द्वारपाल ऊंची के कानों में बोलने से हनुमानजी तक पहुंच जाती है।

आंध्रप्रदेश के कारीगरों ने बनाई हनुमान की मूति

मंदिर के संस्थापक, कार्यकर्ता लक्ष्मण राव ने बताया मंदिर की स्थापना 1995 में हुई। 10 फीट की एक बलरंगबली की मूर्ति आंध्र से आए कारीगरों ने बनाई। डेढ़ फीट अष्ट धातु की हनुमानजी और माता सुवर्चला की मूर्ति राजमुंदरी आंध्र प्रदेश से लेकर आए। स्थापना निकुम्ब माता जी ने की। प्रदेश में संभवत: यह इकलौता मंदिर है जिसमें हनुमानजी और उनकी पत्नी सुवर्चला विराजमान है। यहां की मान्यता है कि जो भी हनुमानजी और उनकी पत्नी के दर्शन करता है, उन भक्तों के वैवाहिक जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती है।

पाराशर संहिता में उल्लेख हनुमान विवाह का

पाराशर संहिता में उल्लेख मिलता है कि हनुमानजी अविवाहित नहीं, विवाहित हैं। उनका विवाह सूर्यदेव की पुत्री सुवर्चला से हुआ है। संहिता के अनुसार हनुमानजी ने सूर्य देव को अपना गुरु बनाया था। सूर्य देव के पास 9 दिव्य विद्याएं थीं। सूर्य देव ने 5 विद्याओं का ज्ञान तो हनुमानजी को दे दिया, लेकिन शेष 4 विद्याओं केवल विवाहिक शिष्य को ही दिया जा सकता था, लेकिन हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी थे, इस समस्या के निराकरण के लिए सूर्य देव ने हनुमान जी से कहा कि तुम मेरी पुत्री सुवर्चला से विवाह कर लो। सुवर्चला तपस्विनी थी। हनुमान जी से विवाह के बाद सुवर्चला वापस तपस्या में लीन हो गई। इस तरह हनुमान जी ने विवाह की शर्त पूरी कर ली और ब्रह्मचारी रहने का व्रत भी कायम रहा।