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कार चलाते वक्त आप ऐसी गलती तो नहीं करते हैं? पढि़ए पूरी खबर

सड़क हादसे में एक दंपती की जान बाल-बाल बच गई। दोनों ने सीट बेल्ट बांध रखी थी। इस वजह से ट्रक की टक्कर के बाद भी दोनों कार से बाहर नहीं गिरे।

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Road accident in bhilai

भिलाई. फोरलेन पर रविवार को सड़क हादसे में एक दंपती की जान बाल-बाल बच गई। एक ट्रक ने पीछे से उनकी कार को जोरदार टक्कर मारी। कार फुटबॉल की तरह लुढ़कते हुए दूसरी दिशा में चली गई और सीधे रेलिंग से जा टकराई। गनीमत है कि दोनों ने सीट बेल्ट बांध रखी थी। इस वजह से ट्रक की टक्कर लगने के बाद भी दोनों कार से बाहर नहीं गिरे। बेल्ट नहीं लगाए रहने की स्थिति में टक्कर के बाद दोनों के शरीर का बैलेंस बिगड़ता और गंभीर रूप से घायल होते पर ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा पर ध्यान दिए जाने की वजह से दोनों की जान बच गई। दुर्घटना के बाद मौजूद लोगों ने दोनों को कार से बाहर निकाला। वहीं दुर्घटना के बाद चालक ट्रक छोड़कर फरार हो गया।

कार दूसरी साइट होकर लोहे की रेलिंग से टकरा गई

रिसाली सेक्टर निवासी सत्येन्द्र शुक्ला बीएसएनएलरायपुर में नौकरी करते हंै। सत्येन्द्र पत्नी संध्या के साथ कार सीजी ०४ एचबी २९५७ को ड्राइव करते हुए घर वापस आ रहे थे। तभी दुर्ग की ओर जा रहे ट्रक डब्ल्यूबी ३७ डी ०३७३ के चालक ने भिलाई निगम कार्यालय के सामने पीछे से जोरदार ठोकर मार दी। ठोकर लगने पर ड्राइविंग सीट पर बैठे सत्येन्द्र को कुछ समझ नहीं आया। कार दूसरी साइट होकर लोहे की रेलिंग से टकरा गई। कार के सामने का हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। इस दुर्घटना की वजह से फोरलेन पर करीब ३० मिनट तक जाम की स्थिति बनी रही। सूचना पर ट्रैफिक पुलिस और सुपेला थाना की टीम पहुंची।

ओवरटेक कर आगे निकली कार पीछे से ट्रक ने मारा ठोकर
मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि पहले तो कार सवार ने ट्रक को ओवर टेक किया। इस बीच ट्रक के चालक ने पीछे से टक्कर मार दी। कार रेलिंग से जा टकराई। इस बीच ट्रक चालक नहीं रुका और घसीटते हुए आगे बढ़ गया। इस बीच चालक निगम के सामने ट्रक को खड़े कर फरार हो गया।

मौत करीब से निकल गई, सीट बेल्ट की अहमियत समझ में आई

कार सवार रायपुर बीएसएलएल के ऑफिसर सत्येन्द्र ने बताया कि जब ट्रक ने टक्कर मारी तो पीछे से धड़ाम से आवाज आई और मैं होश खो बैठा। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर क्या हो गया है। मेरी कार पलभर में ही दूसरी दिशा में चली गई। हादसे के वक्त मैंने संध्या को जोर से पकड़ रखा था। जब लोग कार के समीप पहुंचकर दरवाजे खोलने लगे, तब पता चला कि मौत करीब से आकर चली गई। उन्होंने कहा कि भगवान का शुक्र है कि सीट बेल्ट बांधे हुए थे। इसलिए हम दोनों की जान बच गई। अब सीट बेल्ट की अहमियत समझ आई।